चीन में खुली दुनिया की पहली रोबोट यूनिवर्सिटी, अब मशीनें सीखेंगी इंसानी काम विश्व एक महीने पहले 64
चीन के शंघाई में दुनिया का पहला ह्यूमनॉइड रोबोट ट्रेनिंग सेंटर शुरू हुआ है, जहां 100 से अधिक रोबोट खेती से लेकर फैक्ट्री तक के जटिल कार्य करने का प्रशिक्षण ले रहे हैं।

रोबोट्स के लिए खास ट्रेनिंग सेंटर का आगाज

इंसानों के लिए तो आपने अब तक कई स्कूल और कॉलेज देखे होंगे, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि रोबोट्स को भी स्कूल भेजा जा रहा है। चीन ने भविष्य की तकनीक को हकीकत में बदलते हुए दुनिया का पहला ह्यूमनॉइड रोबोट ट्रेनिंग सेंटर खोल दिया है। शंघाई के हाई-टेक क्षेत्र झांगजियांग में स्थापित इस अनोखे संस्थान में 100 से अधिक इंसानी दिखावट वाले रोबोट्स को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह पहल आने वाले समय में मशीनों को इंसान के रोजमर्रा के कामों में निपुण बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

क्या-क्या सीखेंगे ये रोबोट?

इस ट्रेनिंग स्कूल में रोबोट्स को शुरुआत में लगभग 45 बुनियादी कार्यों में दक्ष बनाया जाएगा। इसमें वस्तुओं को उठाना, पकड़ना, उन्हें सही स्थान पर रखना और इधर-उधर ले जाने जैसे सामान्य कार्य शामिल हैं। इसके बाद उन्हें अधिक चुनौतीपूर्ण कार्यों के लिए तैयार किया जाएगा, जैसे कि कपड़ों को तह करना, अलमारियों की सफाई करना और विभिन्न गैजेट्स का रखरखाव करना। गौरतलब है कि रोबोटिक्स विशेषज्ञों के अनुसार, टी-शर्ट को मोड़ना रोबोट के लिए सबसे कठिन कार्यों में से एक माना जाता है, जिसे सीखने पर यहां विशेष जोर दिया जा रहा है।

डेटा का विशाल संग्रह

इस सेंटर को बनाने का मुख्य उद्देश्य केवल रोबोट्स को प्रशिक्षित करना ही नहीं है, बल्कि उनके कार्य करने के तौर-तरीकों का एक विशाल मैगा डेटा तैयार करना भी है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से प्रतिदिन करीब 50,000 डेटा पॉइंट्स जुटाए जाएंगे। उम्मीद है कि एक साल के भीतर यह आंकड़ा लगभग 1 करोड़ तक पहुंच जाएगा। यह डेटा आने वाली पीढ़ियों के रोबोट्स को पहले से कहीं अधिक बुद्धिमान और त्वरित सीखने वाला बनाने में मददगार साबित होगा।

सीखने की नई संस्कृति और सुपर ब्रेन का विकास

इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ विभिन्न कंपनियों द्वारा बनाए गए रोबोट एक ही छत के नीचे मौजूद होंगे और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखेंगे। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रक्रिया से तकनीक में सुधार की गति बढ़ेगी और नए रोबोट्स को तैयार करने में लगने वाले समय और लागत में काफी कमी आएगी। चीन यहाँ से प्राप्त जानकारी का उपयोग करके एक ऐसा 'सुपर ब्रेन' बनाने की योजना बना रहा है, जिससे किसी एक रोबोट द्वारा सीखी गई दक्षता का लाभ भविष्य के अन्य सभी रोबोट्स को मिल सके।

भविष्य की जरूरतें और लक्ष्य

यह ट्रेनिंग स्कूल लगभग 5000 वर्ग मीटर के दायरे में फैला हुआ है। चीन का लक्ष्य स्पष्ट है कि भविष्य में ये ह्यूमनॉइड रोबोट केवल फैक्ट्रियों तक सीमित न रहकर अस्पतालों, होटलों, कृषि क्षेत्रों और घरों में इंसानों के सहायक के रूप में काम करें। चीन पहले से ही रोबोटिक्स में दुनिया का नेतृत्व करने की ओर अग्रसर है, जहाँ हजारों रोबोट पहले से ही फैक्ट्रियों में इंसानों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। शंघाई का यह नया केंद्र रोबोटिक्स के क्षेत्र में चीन की पकड़ को और अधिक मजबूत करेगा और उन्हें औद्योगिक तथा घरेलू कार्यों के लिए पूरी तरह से तैयार करेगा।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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