ज्वालामुखी ने लिखी मिंग साम्राज्य के अंत की पटकथा: 276 साल के शासन का पतन और राजा की खुदकुशी की असली वजह विश्व एक घंटा पहले 6
एक नई जलवायु रिसर्च के अनुसार, 1640 में फिलिपींस में हुए भीषण ज्वालामुखी विस्फोट ने चीन में भयंकर सूखा फैलाया, जिससे फसलें तबाह हुईं और मिंग डायनेस्टी के पतन का रास्ता खुल गया।

चीन के इतिहास में पूरे 276 साल तक सत्ता संभालने वाला मिंग साम्राज्य आखिर किस तरह बिखर गया, इस सवाल पर अब तक की सबसे बड़ी वैज्ञानिक पड़ताल सामने आई है। लंबे समय से माना जाता रहा है कि कमजोर शासक और भ्रष्टाचार ही इस साम्राज्य के अंत के लिए जिम्मेदार थे। लेकिन ‘क्लाइमेट ऑफ द पास्ट’ जर्नल में प्रकाशित नई स्टडी ने इस धारणा को पूरी तरह पलट दिया है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक दिसंबर 1640 में फिलिपींस के दक्षिणी हिस्से में स्थित माउंट पार्कर में एक भयानक ज्वालामुखी विस्फोट हुआ था। इस प्राकृतिक घटना ने चीन में पहले से चल रहे राजनीतिक और आर्थिक संकट को कई गुना गहरा कर दिया। विस्फोट से निकले धुएं ने सूरज की रोशनी को रोक दिया, जिससे पूर्वी एशिया का मानसून तंत्र पूरी तरह गड़बड़ा गया। उत्तरी चीन में इसके बाद ऐसा भीषण सूखा पड़ा कि खेती चौपट हो गई। इसी विनाशकारी हालात ने भुखमरी और जनविद्रोह को जन्म दिया, और मिंग डायनेस्टी ढह गई।

क्या 1644 में बीजिंग पर कब्जा सिर्फ विद्रोही सेना का कमाल था?

ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि साल 1644 में ली जिचेंग के नेतृत्व वाली एक विद्रोही सेना ने बीजिंग पर कब्जा जमा लिया था। इसके बाद मिंग साम्राज्य के आखिरी राजा ने आत्महत्या कर ली। हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि इस विद्रोह के पीछे असली प्रेरक शक्ति मौसम में आया बदलाव थी।

फिलिपींस के ज्वालामुखी विस्फोट ने वायुमंडल में भारी मात्रा में सल्फेट एरोसोल छोड़ दिए थे। इससे धरती पर ग्लोबल कूलिंग हुई और तापमान अचानक नीचे गिर गया। इस ठंडे मौसम ने खेती-किसानी को बर्बाद कर दिया। नतीजा यह हुआ कि राजा के पास अपनी सेना को देने के लिए न पैसा बचा और न ही अनाज। इस तरह एक प्राकृतिक आपदा ने विद्रोही सेना की राह आसान कर दी।

विस्फोट कैसे बना मिंग साम्राज्य के लिए ‘स्ट्रेस मल्टीप्लायर’

इस नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने बीते दौर के ज्वालामुखी विस्फोटों और वैश्विक तापमान के आंकड़ों का विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि बड़े विस्फोट हमेशा स्थापित व्यवस्थाओं के लिए ‘स्ट्रेस मल्टीप्लायर’ यानी तनाव को कई गुना बढ़ाने वाले साबित होते हैं।

मिंग साम्राज्य उस समय पहले से ही चांदी की किल्लत और उत्तर-पूर्वी सीमाओं पर सैन्य दबाव से जूझ रहा था। ऐसे नाजुक मोड़ पर माउंट पार्कर के विस्फोट ने आग में घी डालने का काम किया। शोधकर्ताओं ने अपनी स्टडी में लिखा है कि पार्कर विस्फोट की वजह से लंबा और गंभीर सूखा पड़ा, जिसने मिंग डायनेस्टी की पूरी खाद्य व्यवस्था को अस्थिर कर दिया।

क्या चीन के दूसरे राजवंशों का अंत भी ऐसी ही आपदाओं से जुड़ा है?

यह रिसर्च पिछले दो हजार साल के चीनी इतिहास को एक नए नजरिए से देखती है। पुराने आंकड़ों से पता चलता है कि चीन के कई बड़े राजवंशों के पतन का सीधा संबंध ज्वालामुखी विस्फोटों से रहा है। जब-जब पर्यावरण में अचानक बड़ा बदलाव आया, तब-तब वहां बड़े जनविद्रोह भड़के। भोजन की कमी ने भूखी जनता को सरकार के खिलाफ खड़े होने पर मजबूर कर दिया।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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