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3 घंटे पहले
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गोबी रेगिस्तान में पीएलए का बड़ा शक्ति प्रदर्शन
चीन और जापान के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव के बीच चीनी सेना यानी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है। ईस्टर्न थिएटर कमांड की वायु सेना इकाई को गोबी रेगिस्तान में एक विशेष सैन्य अभ्यास के लिए भेजा गया। इस दौरान चीन की ओर से अपनी लंबी दूरी की वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली, जिसे HQ-9 के नाम से जाना जाता है, को तैनात किया गया। इस अभ्यास की खासियत यह रही कि मिसाइल प्रणालियों को रेगिस्तानी परिवेश में छिपाने के लिए उनका मूल रंग बदल दिया गया। यह सैन्य गतिविधि ऐसे समय पर हुई है जब जापान में अमेरिकी Typhon मिसाइल सिस्टम की मौजूदगी को लेकर चीन और रूस ने अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
रणनीतिक तैयारी और उपकरणों का रंग रूप बदलना
चीन के आधिकारिक सैन्य बयानों के अनुसार, ईस्टर्न थिएटर कमांड की इस यूनिट को अचानक एक नए और कठिन भौगोलिक इलाके में अभ्यास के लिए निर्देशित किया गया था। सैनिकों ने अत्यंत तत्परता के साथ अपने उपकरणों को तैयार किया, उन्हें सैन्य ट्रेनों में लोड किया और निर्धारित युद्धाभ्यास क्षेत्र की ओर प्रस्थान किया। गोबी रेगिस्तान के कठिन भौगोलिक वातावरण में पहुँचते ही सैनिकों ने न केवल अपनी स्थिति मजबूत की, बल्कि अपने उपकरणों के रंग को भी बदल दिया। तस्वीरों में स्पष्ट देखा जा सकता है कि जो HQ-9 लॉन्चर पहले घने जंगलों के अनुकूल हरे और काले रंग के थे, उन्हें रेगिस्तानी रेत के अनुरूप पीले रंग में रंगा गया। रक्षा विशेषज्ञ सोंग झोंगपिंग का कहना है कि आधुनिक सैन्य इकाइयों के लिए विभिन्न प्रकार के भौगोलिक क्षेत्रों में खुद को ढालना और अपनी मौजूदगी को दुश्मन की नजरों से छिपाए रखना एक बेहद अनिवार्य कौशल बन गया है।
युद्धाभ्यास के दौरान अपनाई गई आपातकालीन रणनीतियां
यह युद्धाभ्यास केवल मिसाइल लॉन्चर को तैनात करने तक सीमित नहीं था। चीनी सेना ने इस अभ्यास में कई चुनौतीपूर्ण परिदृश्यों का समावेश किया था, जिसमें ड्रोन के जरिए होने वाले हमलों का सामना करना, उपकरणों में तकनीकी खराबी आने पर उसे दुरुस्त करना, अचानक दिशा परिवर्तन और अन्य आपातकालीन स्थितियां शामिल थीं। इन सभी परिदृश्यों का उद्देश्य सैनिकों को युद्ध के मैदान में बदलती हुई स्थितियों के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करना था। चीनी सेना का दावा है कि विभिन्न विशेषज्ञ इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल ने सैनिकों की प्रतिक्रिया देने की क्षमता को परखा है।
HQ-9 प्रणाली की मारक क्षमता
HQ-9 मिसाइल प्रणाली चीन की तीसरी पीढ़ी का एक मध्यम से लंबी दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम है। इसे इस प्रकार से तैयार किया गया है कि यह किसी भी विपरीत मौसम और भारी इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के बावजूद अपना कार्य सटीकता से कर सके। बीजिंग का दावा है कि यह सिस्टम दुश्मन के विमानों, ड्रोन और सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों के खिलाफ एक अभेद्य सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है।
इलाकों से परे सैन्य गतिशीलता
ईस्टर्न थिएटर कमांड का मुख्य कार्यक्षेत्र सामान्यतः चीन के पूर्वी तटीय इलाकों और ताइवान जलडमरूमध्य के आसपास केंद्रित माना जाता है। हालांकि, इस यूनिट को चीन के पूर्वी तट से हजारों किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिम के रेगिस्तानी इलाके में भेजना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चीन की उस बढ़ती सैन्य गतिशीलता को दर्शाता है जिसमें वह यह दिखाना चाहता है कि उसके सैनिक देश के किसी भी कोने में तेजी से तैनात होने में सक्षम हैं। भविष्य के संघर्ष केवल एक निश्चित भौगोलिक सीमा तक सीमित नहीं रहेंगे, इसलिए अलग-अलग थिएटर कमांड के बीच हथियारों और सैनिकों का तेजी से आवागमन बहुत मायने रखता है।
जापान में Typhon तैनाती पर चीन का कड़ा रुख
इस सैन्य अभ्यास का समय भी काफी महत्वपूर्ण है। जापान के क्यूशू द्वीप पर अमेरिकी Typhon मिसाइल प्रणाली की तैनाती को लेकर चीन ने हाल ही में कड़ा कूटनीतिक विरोध व्यक्त किया है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने 21 सितंबर को आधिकारिक रूप से पुष्टि की कि बीजिंग ने जापान को कूटनीतिक नोट भेजकर अपनी नाराजगी फिर से जताई है। इस मुद्दे पर रूस भी पहले ही अपनी आपत्ति दर्ज करा चुका है। वर्तमान में अमेरिकी और जापानी सेनाएं 'ईस्टर्न शील्ड-26' नामक साझा सैन्य अभ्यास में शामिल हैं, जिसमें Typhon सिस्टम का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। चीन ने इसे एक रणनीतिक आक्रामक हथियार बताते हुए चेतावनी दी है कि इससे पूरे क्षेत्र में हथियारों की होड़ बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है, साथ ही उसने जापान से अपनी सैन्य नीति पर पुनर्विचार करने का आह्वान किया है।
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