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5 घंटे पहले
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पश्चिम एशिया में पिछले कई महीनों से जारी संघर्ष के कारण पूरी दुनिया ऊर्जा संकट की गंभीर चुनौती से जूझ रही है। अमेरिका और इजरायल की ईरान के साथ बढ़ती तनातनी ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतों में भारी अस्थिरता पैदा कर दी है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल के टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने के बाद से भारत और चीन जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के सामने नई चिंताएं खड़ी हो गई हैं। जब भी ऐसा लगता है कि हालात नियंत्रण में आ रहे हैं, तभी अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से टकराव शुरू हो जाता है। इस बीच, जहां अमेरिका खुद को मध्य पूर्व के सैन्य संघर्षों में उलझाए हुए है, वहीं चीन ने इस संकट के बीच बेहद खामोशी से अपना एक बड़ा रणनीतिक दांव खेल दिया है।
बीजिंग वर्तमान में समुद्र पर अपनी निर्भरता को कम करने और सुरक्षित भू-मार्ग स्थापित करने के लिए किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान के माध्यम से एक विशाल रेलवे कॉरिडोर का निर्माण कर रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना ने हाल ही में एक बड़ी सफलता हासिल की है, जिससे चीन सीधे तौर पर ईरान और पूरे पश्चिम एशिया के बेहद करीब पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मध्य एशिया में चीन की बड़ी कामयाबी: पहली सुरंग बनकर तैयार
चीन-किर्गिस्तान-उज्बेकिस्तान रेलवे परियोजना के निर्माण कार्य में लगे इंजीनियरों और श्रमिकों ने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर लिया है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, इस परियोजना के किर्गिस्तान खंड में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाने वाली 'नंबर-2 नॉर्थ कोश्तोबे सुरंग' का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। चीन-किर्गिस्तान-उज्बेकिस्तान रेलवे कंपनी ने इस बात की पुष्टि की है कि यह किर्गिस्तान क्षेत्र में पूरी होने वाली पहली सुरंग बन गई है।
इस सुरंग के तकनीकी पहलुओं की बात करें तो इसकी कुल लंबाई 209.6 मीटर है और इसकी अधिकतम गहराई लगभग 41 मीटर तक है। इसे एक सिंगल-ट्रैक रेलवे टनल के रूप में डिजाइन किया गया है। निर्माण दल ने सुरक्षा और गुणवत्ता के उच्चतम मानकों को ध्यान में रखते हुए इस जटिल काम को समय से पहले पूरा करने का दावा किया है। इस मुख्य सुरंग के पूरा होने के बाद परियोजना के अन्य हिस्सों पर भी काम बहुत तेजी से चल रहा है।
होर्मुज और बाब अल-मंदेब संकट का पक्का तोड़
वर्तमान में समुद्री व्यापार मार्ग, विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब अल-मंदेब, लगातार भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री लुटेरों के हमलों की वजह से असुरक्षित बने हुए हैं। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा अपने तेल और गैस की आपूर्ति के लिए इन्हीं रास्तों पर निर्भर है। ईरान के साथ जारी युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण समुद्री जहाजों को इन क्षेत्रों से गुजरने में भारी जोखिम उठाना पड़ रहा है।
ऐसी स्थिति में, चीन की यह रेलवे परियोजना एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। भौगोलिक रूप से देखा जाए तो किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान की सीमाएं आगे तुर्कमेनिस्तान से जुड़ती हैं, और तुर्कमेनिस्तान के ठीक बाद ईरान की सीमा शुरू हो जाती है। यदि चीन इस रेलवे कॉरिडोर को पूरी तरह सक्रिय करने में सफल रहता है, तो उसे भविष्य में ईरान और पश्चिम एशिया के अन्य तेल उत्पादक देशों से कच्चे तेल और LPG की सुरक्षित आपूर्ति के लिए होर्मुज जैसे संवेदनशील जलमार्गों की आवश्यकता नहीं होगी। यह चीन की ऊर्जा सुरक्षा को एक अभेद्य कवच प्रदान करेगा।
स्थानीय नाराजगी से बचने के लिए चीन ने बदला अपना रवैया
अतीत में अफ्रीका और कुछ अन्य देशों में चीनी निवेश परियोजनाओं को स्थानीय स्तर पर भारी विरोध और असंतोष का सामना करना पड़ा था। इस कड़वे अनुभव से सीख लेते हुए, चीन अब मध्य एशिया में स्थानीय भावनाओं और अर्थव्यवस्था का विशेष ध्यान रख रहा है। चीनी कंपनियां यह सुनिश्चित कर रही हैं कि इस मेगा प्रोजेक्ट के कारण स्थानीय लोगों में किसी भी तरह का गुस्सा न भड़के।
इसी रणनीति के तहत परियोजना के निर्माण कार्य में स्थानीय स्तर पर खरीद और रोजगार को भारी बढ़ावा दिया जा रहा है:
- परियोजना के लिए अब तक लगभग 10 अरब सोम (जो लगभग 11.4 करोड़ डॉलर के बराबर है) के मूल्य की निर्माण सामग्री और तकनीकी उपकरण स्थानीय बाजारों से ही खरीदे गए हैं।
- इस पूरी परियोजना के निर्माण में इस्तेमाल किया जाने वाला शत-प्रतिशत ईंधन पूरी तरह से किर्गिस्तान के घरेलू बाजारों से खरीदा जा रहा है।
- सीमेंट सहित अन्य बुनियादी निर्माण सामग्रियों का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं से लिया जा रहा है।
- स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने के लिए 1,700 से अधिक स्थानीय मशीनों को किराए पर लिया गया है, जिससे वहां के लोगों की आय में वृद्धि हुई है।
इसके अतिरिक्त, चीन-किर्गिस्तान-उज्बेकिस्तान रेलवे कंपनी ने स्थानीय सामाजिक विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भी निवेश किया है। कंपनी ने अब तक इस क्षेत्र में समाज कल्याण के कार्यों के लिए लगभग 15.6 करोड़ सोम का खर्च किया है। इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्यों के लिए किया गया है:
- परियोजना के आसपास के ग्रामीण इलाकों की सड़कों का चौड़ीकरण और पक्कीकरण करना।
- स्थानीय बस्तियों में पीने के साफ पानी और बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना।
- दूरसंचार सेवाओं और मोबाइल कनेक्टिविटी का विस्तार करना।
- ग्रामीणों के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल केंद्र और बच्चों के लिए शैक्षणिक संस्थानों का निर्माण और सहायता प्रदान करना।
पर्यावरण और पशुपालकों की सुरक्षा का विशेष ध्यान
परियोजना के निर्माण के दौरान पर्यावरण और वन्य जीवों को कम से कम नुकसान हो, इसके लिए विशेष योजनाएं बनाई गई हैं। 'ग्लोबल टाइम्स' की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे रेलवे ट्रैक का नक्शा इस तरह से तैयार किया गया है कि यह क्षेत्र के प्रसिद्ध 'साइमैल्यु-ताश नेशनल पार्क' और अन्य अति-संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों से न गुजरे।
इसके अलावा, स्थानीय वन्यजीवों की प्राकृतिक आवाजाही में कोई बाधा न आए और वहां के पारंपरिक पशुपालक अपने मवेशियों को सुरक्षित रूप से चरा सकें, इसके लिए रेलवे ट्रैक के नीचे विशेष पुलिया (कलवर्ट) का निर्माण किया जा रहा है। निर्माण कंपनी का कहना है कि बिजली आपूर्ति और बुनियादी अस्थायी सड़कों जैसे आवश्यक शुरुआती काम पहले ही पूरे किए जा चुके हैं।
कैसा है इस रेलवे कॉरिडोर का पूरा नक्शा और वर्तमान स्थिति?
यह महत्वाकांक्षी रेलवे कॉरिडोर चीन की सबसे बड़ी रणनीतिक पहल 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस रेलवे मार्ग का पूरा रूट इस प्रकार है:
- यह रेलवे मार्ग चीन के शिनजियांग प्रांत के ऐतिहासिक व्यापारिक शहर काशगर से शुरू होगा।
- वहां से यह पहाड़ी रास्तों से गुजरते हुए तोरुगार्ट दर्रे के माध्यम से किर्गिस्तान की सीमा में प्रवेश करेगा।
- किर्गिस्तान के भीतर यह जलाल-अबाद शहर से गुजरते हुए आगे बढ़ेगा।
- अंततः, यह कॉरिडोर उज्बेकिस्तान के पूर्वी छोर पर स्थित प्रमुख औद्योगिक केंद्र अंदीजान तक पहुंचेगा।
इस विशाल निर्माण कार्य की वर्तमान प्रगति की बात करें तो सुरक्षा और परिवहन मानकों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर काम हो रहा है। पूरी परियोजना के तहत कुल 27 सुरंगों, 43 पुलों और 88 रोडबेड सेक्शन पर एक साथ काम शुरू किया जा चुका है। इनमें से एक मुख्य सुरंग का काम पूरी तरह संपन्न हो चुका है, जबकि मार्ग में पड़ने वाले 20 अलग-अलग रेलवे स्टेशनों की नींव रखने का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इस तरह, जब वैश्विक शक्तियां पारंपरिक युद्धों और आपसी संघर्षों में उलझी हुई हैं, चीन जमीनी स्तर पर ऐसे आर्थिक और रणनीतिक गलियारों का निर्माण कर रहा है जो आने वाले दशकों में वैश्विक व्यापार और ऊर्जा के प्रवाह को पूरी तरह से बदल कर रख देंगे।
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