चीन का कमाल: वैज्ञानिकों ने बनाया हीरे से 5 गुना ज्यादा मजबूत क्रिस्टल, हथौड़े से भी नहीं टूटेगा विश्व एक घंटा पहले 3
चीनी वैज्ञानिकों ने एक नए डायमंड कंपोजिट का निर्माण किया है जो हीरे से पांच से छह गुना अधिक मजबूत है। यह नवाचार हीरे की भंगुरता की समस्या को हल करता है और भविष्य में औद्योगिक उपकरणों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

चीन की नई वैज्ञानिक उपलब्धि

चीन के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी चमत्कारिक सामग्री विकसित की है, जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसा क्रिस्टल तैयार किया है जिसे किसी भी स्थिति में तोड़ा नहीं जा सकता, यहाँ तक कि हथौड़े की जोरदार चोट भी इसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। अब तक प्रकृति में पाया जाने वाला हीरा सबसे कठोर पदार्थ माना जाता रहा है, लेकिन इसमें एक बड़ी तकनीकी कमी थी। हीरा जितना सख्त है, उतना ही अधिक भंगुर भी है। यानी अगर उस पर किसी भारी चीज से जोर का प्रहार किया जाए, तो वह शीशे की तरह आसानी से चटक कर टूट जाता है। अब चीन के वैज्ञानिकों ने इस कमी का स्थायी समाधान खोज लिया है।

हीरे से पांच से छह गुना ज्यादा ताकतवर

चीनी वैज्ञानिकों ने एक नया डायमंड कंपोजिट तैयार किया है, जिसकी मजबूती सामान्य हीरे की तुलना में करीब पांच से छह गुना अधिक है। इस शोध को चीन की चाइनीज एकैडमी ऑफ साइंस के इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिक्स और बेइहांग के वैज्ञानिकों ने मिलकर अंजाम दिया है। इस क्रांतिकारी शोध के निष्कर्ष प्रतिष्ठित जर्नल नेचर सिंथेसिस में प्रकाशित किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पदार्थ टंगस्टन की उन मिश्र धातुओं से भी ज्यादा कठोर है, जिनका उपयोग आज उच्च स्तरीय सुरक्षा उपकरणों को बनाने में किया जाता है।

लैब टेस्ट और तकनीकी बारीकियां

प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों के दौरान, इस नई सामग्री की कठोरता लगभग 91.6 GPa मापी गई है, जो कि प्राकृतिक हीरे के स्तर के बराबर है। वहीं, इसकी टफनेस (मजबूती) का आंकड़ा 36.4 MPa·m¹/² तक दर्ज किया गया। यह डेटा स्पष्ट करता है कि वैज्ञानिकों ने हीरे की कठोरता को अक्षुण्ण रखते हुए, उसकी नाजुकता की कमजोरी को प्रभावी ढंग से दूर करने में सफलता हासिल की है। इस तरह, कठोरता और मजबूती का एक दुर्लभ तालमेल देखने को मिला है।

इस तकनीक के औद्योगिक उपयोग

यदि इस नई तकनीक को बड़े पैमाने पर औद्योगिक स्तर पर लागू किया जाता है, तो इसके व्यापक लाभ हो सकते हैं। इसकी उपयोगिता निम्नलिखित क्षेत्रों में अत्यधिक हो सकती है:

  • बेहद मजबूत कटिंग और पॉलिशिंग टूल्स के निर्माण में।
  • धातु और सिरेमिक के सटीक मशीनिंग कार्यों में।
  • जियोलॉजिकल ड्रिल बिट्स बनाने में, जो जमीन के भीतर कठोर चट्टानों को काटने का काम करते हैं।
  • एयरोस्पेस क्षेत्र के कंपोनेंट्स और पुर्जों में, जहाँ बहुत अधिक दबाव झेलने की आवश्यकता होती है।

कैसे बनी यह अटूट संरचना

वैज्ञानिकों ने इस नए हीरे को अत्यधिक मजबूत बनाने के लिए मल्टी-वॉल्ड कार्बन नैनोट्यूब्स (MWCNTs) का सहारा लिया है। ये संरचनाएं बहुत ही सूक्ष्म होती हैं, जो कार्बन फाइबर जैसी दिखाई देती हैं। इनका आकार इतना बारीक होता है कि इनकी मोटाई इंसान के बाल की चौड़ाई के दस हजारवें हिस्से के बराबर हो सकती है, फिर भी ये स्टील से कई गुना ज्यादा मजबूत होते हैं। निर्माण प्रक्रिया में इन नैनोट्यूब्स को बारीक डायमंड पाउडर के साथ मिलाया गया। इसके बाद इस मिश्रण को 2000 डिग्री सेल्सियस तापमान और 15 गीगापास्कल दबाव में रखा गया। यह दबाव सामान्य वायुमंडलीय दबाव से करीब 1.5 लाख गुना ज्यादा है। इस प्रक्रिया में कार्बन नैनोट्यूब्स ने अपना फाइबर जैसा ढांचा बरकरार रखते हुए हीरे के दानों के साथ एक बेहद मजबूत रासायनिक बॉन्ड बना लिया।

कंक्रीट और सरिये का विज्ञान

शोधकर्ताओं ने इस संरचना की तुलना कंक्रीट के अंदर डाले जाने वाले सरिये से की है। जैसे सरिया कंक्रीट को एक आंतरिक ढांचा और मजबूती प्रदान करता है, ठीक वैसे ही कार्बन नैनोट्यूब्स डायमंड के कणों के बीच एक मजबूत 3D नेटवर्क बनाते हैं। सामान्य हीरे में यदि दरार पड़ती है, तो वह एक सीध में आगे बढ़ती है और पूरा टुकड़ा बिखर जाता है। लेकिन इस नए कंपोजिट में, कार्बन नैनोट्यूब्स उस दरार की दिशा को मोड़ देते हैं और उसकी ऊर्जा को सोख लेते हैं, जिससे वह आगे नहीं बढ़ पाती। यह तकनीक वास्तव में विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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