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13 घंटे पहले
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इंडो-पैसिफिक में अमेरिकी नौसेना का नया सुरक्षा चक्र
वैश्विक सैन्य और सामरिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, विशेष रूप से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में जहां चीन अपनी नौसैनिक और हवाई ताकत का लगातार विस्तार कर रहा है। इस बढ़ते रणनीतिक खतरे का मुकाबला करने के लिए अमेरिका ने अपनी सैन्य तैयारियों को एक नया और बेहद घातक आयाम दिया है। अमेरिकी नौसेना ने हाल ही में आयोजित हुए प्रतिष्ठित टेलहुक सिम्पोजियम में अपनी अगली पीढ़ी की सबसे अत्याधुनिक और लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल AIM-424 मैलिस को दुनिया के सामने पेश किया है। इसे अमेरिकी सैन्य इतिहास में रक्षा तकनीक का एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
इस नए हथियार को बेहद लंबी दूरी तक हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल यानी लॉन्ग रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल के रूप में वर्गीकृत किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस मिसाइल का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स की सुरक्षा को अभेद्य बनाना और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती लंबी दूरी की मिसाइल चुनौतियों का दृढ़ता से मुकाबला करना है। नौसेना के उच्च अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यह मिसाइल रेंज, मारक क्षमता और आधुनिक युद्धक प्रणाली के मामले में वर्तमान में मौजूद सभी हथियारों से कई गुना आगे है और यह एक ऐतिहासिक पीढ़ीगत छलांग का प्रतिनिधित्व करती है।
AIM-424 मैलिस का मुख्य उद्देश्य और इसकी रणनीतिक विशेषताएं
आमतौर पर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का मुख्य लक्ष्य दुश्मन के लड़ाकू विमानों को मार गिराना होता है। हालांकि, AIM-424 मैलिस का उद्देश्य केवल इतने तक ही सीमित नहीं है। इस मिसाइल को खास तौर पर उन भारी बमवर्षक विमानों और लॉन्च प्लेटफॉर्म्स को बहुत दूरी पर ही नष्ट करने के लिए तैयार किया गया है, जो हवा से दागी जाने वाली एंटी-शिप बैलिस्टिक या क्रूज मिसाइलों को लेकर उड़ते हैं और अमेरिकी सतह के बेड़ों पर हमला कर सकते हैं।
गौरतलब है कि चीन की कुछ समुद्री-स्ट्राइक मिसाइलों की मारक क्षमता कथित तौर पर 1,000 नॉटिकल मील से भी अधिक बताई जाती है। इस वजह से चीन के बमवर्षक विमान अमेरिकी रक्षा बेड़े की पहुंच से सुरक्षित दूरी पर रहकर ही मिसाइल दागने में सक्षम हो जाते थे। अमेरिकी नौसेना के लिए यह एक बहुत बड़ा खतरा था। इसी चुनौती से निपटने के लिए AIM-424 मैलिस को विकसित किया गया है। यह मिसाइल निम्नलिखित रणनीतिक लाभ प्रदान करती है:
- यह मिसाइल अमेरिकी नौसेना के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के सुरक्षा घेरे को काफी बढ़ा देती है, जिससे दुश्मन के विमानों को बहुत दूर ही रोका जा सकता है।
- यह दुश्मन की लक्ष्य निर्धारण प्रणाली यानी टारगेटिंग सीक्वेंस को बीच में ही पूरी तरह से बाधित करने की क्षमता रखती है।
- चीन की बेहद आक्रामक एंटी-एक्सेस/एरिया-डिनायल (A2/AD) रणनीति को सीधे चुनौती देकर निष्क्रिय करने में यह मिसाइल बेहद कारगर साबित होगी।
वर्तमान में इस मिसाइल का गहन परीक्षण अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के अग्रणी लड़ाकू विमानों F/A-18E सुपर हॉर्नेट और F-35 पर किया जा रहा है। हाल ही में सामने आई तस्वीरों में देखा गया है कि सुपर हॉर्नेट विमान अपने बाहरी हिस्सों पर चार मैलिस मिसाइलों को आसानी से ले जा सकता है, जो इसकी उत्कृष्ट क्षमता को दर्शाता है। वहीं, F-35C विमान के आंतरिक हथियारों के बे में भी इसे सफलतापूर्वक फिट किया जा सकता है, जिससे विमान की स्टेल्थ कॉन्फिगरेशन यानी रडार से बचने की क्षमता प्रभावित हुए बिना दुश्मन पर लंबी दूरी से अचूक हमला किया जा सकता है। यह मिसाइल सुपर हॉर्नेट्स, स्टेल्थ F-35C और भविष्य की छठी पीढ़ी के फाइटर विमान F/A-XX के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण ऑपरेशनल ब्रिज का काम करेगी।
इस मिसाइल के विकास का महत्वपूर्ण श्रेय RTX की एडवांस्ड टेक्नोलॉजी टीम को जाता है, जिन्होंने इसके निर्माण में बेहद जटिल और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया है। हालांकि, सुरक्षा कारणों से अमेरिकी नौसेना ने अभी तक इसके सटीक आयाम, कुल वजन, प्रोपल्शन तकनीक, गाइडेंस सिस्टम या इसकी अधिकतम रेंज से जुड़े बुनियादी आंकड़ों का खुलासा नहीं किया है।
चीन की आधुनिक PL-15 मिसाइल के सामने मैलिस की स्थिति
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की लंबी दूरी की मिसाइलें जैसे PL-15 और उससे भी घातक PL-17 को अमेरिकी विमानों के लिए एक बड़ा खतरा माना जाता रहा है। चीनी PL-15 मिसाइल की रेंज लगभग 200 से 300 किलोमीटर या उससे अधिक आंकी जाती है। यह मिसाइल एक्टिव रडार होमिंग तकनीक से लैस है और इसमें बियॉन्ड विजुअल रेंज यानी आँखों की सामान्य दृष्टि से बहुत दूर के लक्ष्यों को भी मार गिराने की क्षमता है।
इस चीनी खतरे की तुलना में AIM-424 मैलिस को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह चीनी मिसाइलों के लॉन्च प्लेटफॉर्म्स को ही हवा में बहुत पहले और अधिक दूरी से नष्ट कर सके। इसका मुख्य विचार यह है कि चीन के लड़ाकू और बमवर्षक विमानों को अमेरिकी बेड़े के करीब पहुंचने ही न दिया जाए, जिससे उनका मिसाइल लॉन्च सिस्टम स्वतः ही बेकार हो जाए। जहां चीनी PL-15 मुख्य रूप से फाइटर-टू-फाइटर एंगेजमेंट और सामान्य हवाई घुसपैठ को रोकने पर केंद्रित है, वहीं मैलिस का मुख्य फोकस नौसेना के बड़े जहाजी बेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और हवा में एकतरफा बढ़त बनाना है। सटीक रणनीतिक डेटा गुप्त होने के बावजूद यह स्पष्ट है कि अमेरिकी मिसाइल अपने मल्टी-प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन की वजह से चीनी युद्ध प्रणाली को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त करने की क्षमता रखती है।
ब्रह्मोस मिसाइल से तुलना: दोनों में कौन कितना ताकतवर?
अक्सर रक्षा विश्लेषक इस नई मिसाइल की तुलना भारत और रूस द्वारा विकसित की गई प्रसिद्ध ब्रह्मोस मिसाइल से भी करते हैं। हालांकि, इन दोनों मिसाइलों की प्रकृति और युद्ध के मैदान में इनका काम बिल्कुल अलग है। ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल है, जिसे मुख्य रूप से पानी के जहाजों और जमीन पर मौजूद ठिकानों को तबाह करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ब्रह्मोस की रेंज करीब 300 से 500 किलोमीटर है और इसे थल, जल और हवा, तीनों जगहों से लॉन्च किया जा सकता है।
इसके विपरीत, अमेरिकी AIM-424 मैलिस पूरी तरह से एक अलग श्रेणी की मिसाइल है। यह हवा से हवा में वार करने वाली मिसाइल है, जो केवल दुश्मन के विमानों को ही निशाना बनाती है। सरल शब्दों में कहें तो जहां ब्रह्मोस दुश्मन के बड़े जहाजों और कैरियरों पर सीधा विनाशकारी हमला करने के लिए जानी जाती है, वहीं मैलिस का काम उन लड़ाकू और बमवर्षक विमानों को रास्ते में ही खत्म करना है जो ब्रह्मोस जैसी एंटी-शिप मिसाइलों को दागने के लिए उड़ान भरते हैं।
ब्रह्मोस जहां सतह और समुद्री युद्ध में अपनी ताकत दिखाती है, वहीं मैलिस हवाई क्षेत्र में अपनी संप्रभुता स्थापित करती है। दोनों ही मिसाइलें अपने-अपने क्षेत्र में अद्वितीय हैं और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन को गहराई से प्रभावित करने की क्षमता रखती हैं। संक्षेप में कहें तो AIM-424 मैलिस आने वाले समय में अमेरिकी नौसेना की हवाई वर्चस्व रणनीति का एक अनिवार्य स्तंभ बनने जा रही है, जो भविष्य के आधुनिक युद्धों का रुख पूरी तरह से बदल सकती है।
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