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एक घंटा पहले
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चूरू में बाल विवाह का शर्मनाक मामला सामने आया
राजस्थान के चूरू जिले से बाल विवाह की एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ दो नाबालिग सगी बहनों को उनके ससुराल से अत्यंत दयनीय स्थिति में सुरक्षित बाहर निकाला गया है। ये दोनों बच्चियां पिछले डेढ़ साल से अपने ससुराल में अमानवीय प्रताड़ना का शिकार हो रही थीं। चाइल्ड हेल्प लाइन को जब इस क्रूरता की भनक लगी, तो प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लेते हुए एक संयुक्त अभियान चलाया और बच्चियों को इस नर्क से आजाद कराया।
शादी के बाद पढ़ाई पर लगा पूर्ण विराम
चाइल्ड हेल्प लाइन के परियोजना अधिकारी पन्ने सिंह ने इस मामले का खुलासा करते हुए बताया कि दोनों पीड़ित बहनें मूल रूप से बीकानेर जिले के एक गांव की निवासी हैं। उनके पिता ने जून 2024 में इन दोनों का विवाह चूरू जिले की रतनगढ़ तहसील के अंतर्गत आने वाले कांगड़ गांव में कर दिया था। जिस समय यह विवाह रचाया गया, बड़ी बहन 11वीं कक्षा में पढ़ाई कर रही थी और छोटी बहन 9वीं कक्षा की छात्रा थी। विवाह के बंधन में बंधते ही इन दोनों लड़कियों की शिक्षा का सफर वहीं खत्म हो गया और उन्हें मजबूरन ससुराल भेज दिया गया।
उम्र में भारी अंतर और शोषण का सिलसिला
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य दोनों के पतियों की उम्र है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बड़ी बहन की शादी एक 32 वर्षीय युवक से हुई थी, जबकि छोटी बहन को एक 26 वर्षीय व्यक्ति के साथ ब्याह दिया गया था। विवाह के चंद महीनों बाद ही इन दोनों बहनों के लिए घर का माहौल किसी सजा से कम नहीं रह गया था। ससुराल पक्ष की ओर से महज छह महीने बीतने के बाद ही शोषण का दौर शुरू हो गया। उन्हें घरेलू कार्यों के बहाने मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। मामूली बातों पर उन्हें डांटना, अपमानित करना और उनके साथ मारपीट करना उस घर में एक सामान्य दिनचर्या बन चुका था।
बेल्ट से पिटाई और ब्लेड से वार
पीड़ित नाबालिग बहनों ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि उन्हें अक्सर बेल्ट से बुरी तरह पीटा जाता था। हिंसा का यह सिलसिला बुधवार की सुबह उस वक्त चरम पर पहुंच गया, जब कथित रूप से उनकी सास ने दोनों बहनों के साथ मारपीट की और उनके हाथों पर ब्लेड से गहरे घाव कर दिए। इस जघन्य घटना के बाद ही मामले की सूचना चाइल्ड हेल्प लाइन तक पहुंच सकी, जिसके बाद अधिकारियों ने तुरंत कदम उठाए।
प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई
सूचना मिलने के तुरंत बाद चाइल्ड हेल्प लाइन, मानव तस्करी विरोधी यूनिट और कालिका पेट्रोलिंग टीम ने एक संयुक्त टीम बनाकर कांगड़ गांव में छापेमारी की। टीम ने तत्परता दिखाते हुए दोनों बहनों को ससुराल से सुरक्षित रेस्क्यू किया और उन्हें अपने संरक्षण में ले लिया। फिलहाल इन दोनों बच्चियों को एक सुरक्षित स्थान पर रखा गया है, जहां विशेषज्ञ उनकी काउंसलिंग कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि काउंसलिंग की प्रक्रिया संपन्न होने के बाद इन बहनों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जाएगा और समिति द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार आगे की विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
बेटी होने के कारण जल्दबाजी में हुआ फैसला
प्राथमिक जांच और मिली जानकारी के आधार पर यह बात सामने आई है कि परिवार में छह बेटियां होने के बोझ तले दबे पिता ने जल्दबाजी में दोनों बेटियों का कम उम्र में ही विवाह कर दिया था। हालांकि, उस समय लिया गया यह फैसला अब एक बड़ी त्रासदी बन चुका है। यह मामला एक बार फिर समाज में बाल विवाह जैसी कुरीतियों के भयावह परिणामों को रेखांकित करता है। इन घटनाओं से बच्चों के मासूम भविष्य, उनकी शिक्षा और शारीरिक सुरक्षा पर जो गहरा असर पड़ता है, वह अब इन दो बहनों की स्थिति से स्पष्ट दिखाई दे रहा है। वर्तमान में प्रशासन इस मामले में कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा कर रहा है ताकि पीड़ित बच्चियों को न्याय दिलाया जा सके।
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