आषाढ़ माह का आगाज: चातुर्मास में इस तरह करें भगवान शिव की पूजा, दूर होंगी सभी बाधाएं धर्म 2 महीने पहले 64
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ मास के साथ ही चातुर्मास का शुभारंभ हो गया है, जिसमें भगवान शिव की विशेष आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

आषाढ़ मास और चातुर्मास की शुरुआत

धार्मिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के समापन के बाद आषाढ़ मास का आगमन हो चुका है। आषाढ़ कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से ही चातुर्मास की शुरुआत मानी जाती है। यह विशेष काल आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तक चलता है। धार्मिक ग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख है कि चातुर्मास का पूरा समय भगवान भोलेनाथ को समर्पित होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान सृष्टि के संचालन का दायित्व स्वयं भगवान शिव संभालते हैं।

भोलेनाथ की पूजा का महत्व

हरिद्वार के प्रसिद्ध ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री के अनुसार आषाढ़ मास में भगवान शंकर की भक्ति करने का विशेष महत्व है। जो भक्त इन चार महीनों में नियमपूर्वक भगवान शिव की आराधना करते हैं, उनके जीवन में आ रही सभी प्रकार की अड़चनें और तरक्की में आने वाली बाधाएं समाप्त हो जाती हैं। चातुर्मास के दौरान ही प्रसिद्ध कावड़ यात्रा का भी आयोजन किया जाता है, जो पूरी तरह से शिव भक्ति पर केंद्रित होती है। हालांकि, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी के बाद से भगवान विष्णु समेत सभी देवता निद्रा में चले जाते हैं, इसलिए यह काल शिव उपासना के लिए सबसे उत्तम माना गया है।

पूजा और साधना की सही विधि

ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि चातुर्मास के दौरान भगवान शिव को प्रसन्न करने के कई सरल और प्रभावशाली उपाय धार्मिक ग्रंथों में वर्णित हैं। भक्तों को अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और सुखमय जीवन के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • सुबह और शाम के समय नियमित रूप से भगवान शिव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और रुद्राभिषेक करना चाहिए।
  • सूर्यास्त के समय आने वाले प्रदोष काल को शिव पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • शिव पुराण का पाठ और उसका जाप करना भक्तों के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होता है।
  • घर के देवालय या किसी सिद्ध शिव मंदिर में बैठकर श्रद्धा भाव से पूजा करना शुभ फल देता है।

विशेष स्तोत्रों का पाठ

यदि कोई साधक मनवांछित फल प्राप्त करना चाहता है, तो उसे कुछ विशेष ग्रंथों और स्तोत्रों का पाठ करना चाहिए। पंडित जी के अनुसार, चातुर्मास में रुद्राष्टक, शिव तांडव स्तोत्र, शिव महिम्न स्तोत्र और पशुपत्येष्टक का पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है। इन स्तोत्रों के निरंतर पाठ से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और साधक के लिए सफलता के द्वार खुल जाते हैं। चातुर्मास के दौरान भोलेनाथ की भक्ति करना न केवल आसान है, बल्कि यह बहुत जल्दी फल देने वाला भी माना गया है। जो भक्त पूरी निष्ठा के साथ इस अवधि में भगवान शंकर की शरण में रहते हैं, उनके सभी कष्टों का निवारण स्वयं भोलेनाथ करते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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