नासा की भी चिंता बढ़ी, अंतरिक्ष में भारत का दबदबा; विक्रम प्रोसेसर ने रचा इतिहास राष्ट्रीय राजनीति 6 घंटे पहले 7
भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी स्वदेशी सेमीकंडक्टर तकनीक का लोहा मनवाया है। चंद्रयान-3 से लेकर आदित्य-L1 तक में भारतीय चिप्स की भूमिका ने देश को आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

अंतरिक्ष की उड़ान में भारत की स्वदेशी ताकत

भारत की सेमीकंडक्टर तकनीक अब पृथ्वी की सीमाओं को लांघकर अंतरिक्ष की गहराइयों तक पहुंच चुकी है। मोहाली स्थित सेमीकंडक्टर लैबोरेटरी यानी एससीएल द्वारा तैयार की गई फ्लाइट-ग्रेड चिप्स ने न केवल भारतीय मिशनों को सफल बनाया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की तकनीकी क्षमता को सिद्ध किया है। राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश के सामने इन गौरवशाली उपलब्धियों का विवरण साझा किया है, जो यह दर्शाती हैं कि भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों में भारत का प्रभाव बढ़ता जा रहा है।

कठिन परिस्थितियों में अडिग रहने वाली चिप्स

अंतरिक्ष का वातावरण पृथ्वी से पूरी तरह अलग और बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। वहां अत्यधिक रेडिएशन, तापमान में भारी उतार-चढ़ाव, वैक्यूम का दबाव और तीव्र कंपन जैसे कारक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को खराब करने की क्षमता रखते हैं। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए एससीएल ने विशेष रूप से फ्लाइट-ग्रेड चिप्स विकसित की हैं। अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, इन चिप्स को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है ताकि वे अंतरिक्ष के कठोर वातावरण में बिना किसी बाधा के लंबे समय तक कार्य कर सकें।

चंद्रयान-3 की कामयाबी में महत्वपूर्ण भूमिका

भारत के ऐतिहासिक चंद्रयान-3 मिशन की सफलता में एससीएल की चिप्स का बड़ा योगदान रहा है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि लैंडर के अंदर लगे कैमरा सिस्टम में एससीएल द्वारा निर्मित कैमरा चिप का प्रयोग किया गया था। चंद्रमा की सतह पर उतरते समय लैंडर का कैमरा सिस्टम बेहद महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसी के माध्यम से सतह की बारीकियों और लैंडिंग स्थल का सटीक आकलन किया जाता है। अंतरिक्ष के उन मुश्किल पलों में इन चिप्स का कुशलतापूर्वक काम करना भारतीय इंजीनियरिंग के लिए किसी बड़े मील के पत्थर से कम नहीं है।

विक्रम प्रोसेसर: रॉकेटों की नई जान

एससीएल की एक और बड़ी उपलब्धि देश के अपने 'विक्रम' प्रोसेसर का विकास है। यह प्रोसेसर आधुनिक रॉकेट और सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल के लिए एक रीढ़ की हड्डी की तरह काम कर रहा है। अंतरिक्ष मिशनों में प्रोसेसर का कार्य डेटा को नियंत्रित करना और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के बीच समन्वय स्थापित करना होता है। भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा निर्मित यह प्रोसेसर रॉकेटों की जटिल गणनाओं को संभालने में सक्षम है, जो भारत की बढ़ती सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता का प्रमाण है।

आदित्य-L1 और रेडिएशन का मुकाबला

चंद्रयान-3 के बाद, भारत के महत्वाकांक्षी सूर्य मिशन आदित्य-L1 में भी स्वदेशी तकनीक का जलवा दिखा है। चूंकि सूर्य के करीब रेडिएशन का स्तर अत्यंत घातक होता है, इसलिए वहां सामान्य इलेक्ट्रॉनिक चिप्स काम नहीं कर पातीं। एससीएल ने इस मिशन के लिए खास तौर पर रेडिएशन-हार्डन्ड एडीसी चिप्स तैयार कीं। ये चिप्स रेडिएशन के प्रभाव को बेअसर करने में सक्षम हैं, जिससे आदित्य-L1 के संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सूर्य की गतिविधियों का अध्ययन बिना किसी व्यवधान के कर पा रहे हैं।

आत्मनिर्भर भारत का सपना

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि अंतरिक्ष मिशनों में भारतीय चिप्स का उपयोग महज एक तकनीकी कदम नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ी पहल है। एक समय था जब हमें ऐसी चिप्स के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन आज भारत चांद से लेकर सूरज तक अपने उपकरणों के साथ पहुंच चुका है। सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में यह तकनीकी क्षमता आने वाले समय में भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में और अधिक मजबूती प्रदान करेगी। यह स्वदेशी तकनीक यह स्पष्ट करती है कि भारत अब केवल मिशन लॉन्च नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें सफल बनाने वाली तकनीक भी स्वयं विकसित कर रहा है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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