राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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विचारों
प्रदूषण पर केंद्र की सख्ती
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में हर साल सर्दियों के मौसम में वायु प्रदूषण का संकट गहरा जाता है। इस समस्या के गंभीर होने से पहले ही केंद्र सरकार ने अब सक्रियता दिखाते हुए बड़े कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रदूषण के खिलाफ चल रही तैयारियों की समीक्षा करने के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक में दिल्ली के अलावा हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
जीरो टॉलरेंस की नीति
बैठक में केंद्रीय मंत्री ने राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों के मामले में अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए। भूपेंद्र यादव ने जोर देकर कहा कि जो भी औद्योगिक इकाइयां पर्यावरणीय नियमों का पालन नहीं कर रही हैं, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इतना ही नहीं, नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वाली इकाइयों के नाम सार्वजनिक करने का निर्देश भी दिया गया है, ताकि ऐसी संस्थाओं की जवाबदेही तय की जा सके।
हॉटस्पॉट पर विशेष फोकस
इस मंथन में दिल्ली में मौजूद प्रदूषण के प्रमुख हॉटस्पॉट की पहचान और उनके निराकरण को प्राथमिकता दी गई है। इन हॉटस्पॉट वाले इलाकों के लिए सरकार ने व्यावहारिक और प्रभावी एक्शन प्लान तैयार करने को कहा है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को हिदायत दी गई है कि वे इन चिन्हित इलाकों पर अपनी निगरानी को और अधिक मजबूत करें और जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई करें।
राज्यों के लिए अलग-अलग दिशा-निर्देश
बैठक के दौरान सभी पांच राज्यों के साथ अलग-अलग बिंदुओं पर चर्चा की गई ताकि NCR में हवा की गुणवत्ता को सुधारा जा सके:
- हरियाणा: राज्य को निर्देश दिया गया कि वह NCR के अन्य पड़ोसी राज्यों के साथ तालमेल बिठाकर काम करे और प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों पर कड़ी नजर रखे।
- उत्तर प्रदेश: एनसीआर में शामिल जिलों के प्रदूषण हॉटस्पॉट पर विशेष ध्यान देने और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने को कहा गया है। गैर-अनुरूप औद्योगिक इकाइयों को बंद करने की कार्रवाई पर जोर दिया गया है।
- पंजाब: कृषि क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण के स्रोतों पर मुख्य रूप से चर्चा की गई। केंद्रीय कृषि, पर्यावरण और शहरी विकास मंत्रालय के माध्यम से राज्य के समकक्ष विभागों के साथ समन्वय बैठकें करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
- राजस्थान: एनसीआर के सामूहिक वायु गुणवत्ता प्रबंधन प्रयासों में सक्रिय भागीदारी और कार्ययोजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
केवल जागरूकता काफी नहीं
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि केवल सूचना, शिक्षा और संचार यानी IEC गतिविधियां प्रदूषण रोकने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जागरूकता अभियानों के साथ-साथ नियमों का कड़ाई से प्रवर्तन यानी एन्फोर्समेंट बेहद जरूरी है। बिना सख्त प्रवर्तन के हवा की गुणवत्ता में सुधार संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्यों को अपने स्तर पर जनभागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ प्रदूषण के नियमों को तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना लगाने और कानूनी कार्रवाई करने में कोई संकोच नहीं करना चाहिए।
सितंबर में अगली समीक्षा
केंद्र सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया में एनसीआर के सभी राज्यों को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया है। मंत्री ने जानकारी दी कि मौजूदा तैयारी और राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा के लिए सितंबर महीने में एक और उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी। इस आगामी बैठक में राज्यों द्वारा अब तक की गई प्रगति का आकलन किया जाएगा और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तार से मंथन होगा ताकि सर्दी के मौसम में लोगों को साफ हवा मिल सके।
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