CBSE का थ्री-लैंग्वेज रूल: कक्षा 10 के छात्रों के लिए बड़ी राहत और नए दिशा-निर्देश जारी शिक्षा 2 घंटे पहले 2
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने तीन भाषा नियम को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है, जिसमें 10वीं कक्षा के वर्तमान छात्रों को बड़ी राहत दी गई है।

CBSE के नए भाषा नियम और गाइडलाइंस

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE ने शैक्षणिक सत्र को लेकर थ्री-लैंग्वेज रूल या तीन भाषा नियम के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड की ओर से स्पष्ट किया गया है कि कक्षा 10वीं के मौजूदा बैच पर नई भाषा नीति का कोई दबाव नहीं होगा। इतना ही नहीं, जो छात्र फिलहाल सातवीं, आठवीं और नौवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें भी 10वीं में पहुंचने पर तीसरी भाषा के लिए बोर्ड परीक्षा देने की बाध्यता से मुक्ति मिलेगी। गाइडलाइन के अनुसार, सातवीं, आठवीं और नौवीं कक्षा के जो छात्र पहले से ही दो विदेशी भाषाओं का अध्ययन कर रहे हैं, वे एक भारतीय भाषा को जोड़कर अपना अध्ययन क्रम जारी रख सकते हैं।

थ्री-लैंग्वेज नियम की मुख्य शर्तें

CBSE द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक, छात्रों को जो तीन भाषाएं चुननी होंगी, उनमें से दो का भारतीय भाषा होना अनिवार्य है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि तीसरी भाषा यानी R3 के रूप में किसी विदेशी भाषा को चुना जा सकता है, लेकिन यह तभी संभव है जब बाकी की दो भाषाएं भारतीय हों। बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि इस बदलाव के दौरान छात्रों को ट्रांज़िशनल पीरियड यानी संक्रमण काल के तहत विशेष छूट और रिलैक्सेशन का लाभ भी दिया जाएगा, ताकि पढ़ाई के दबाव को कम किया जा सके।

कक्षा 10वीं और 9वीं के छात्रों को मिली राहत

जारी गाइडलाइन के अनुसार, साल 2026-27 के दौरान कक्षा 10वीं के छात्र अपने पुराने दो-भाषा वाले सिस्टम के साथ ही आगे बढ़ सकेंगे। इन छात्रों पर किसी भी प्रकार की तीसरी भाषा थोपे जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अलावा, 2026-27 में नौवीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिसमें से कम से कम एक भाषा भारतीय होगी। खास बात यह है कि इन छात्रों की तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर आंतरिक परीक्षा के माध्यम से होगा। जब यह बैच 2027-28 में 10वीं कक्षा में प्रवेश करेगा, तब भी उन्हें तीसरी भाषा के लिए कोई CBSE बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी।

भारतीय और विदेशी भाषाओं का वर्गीकरण

CBSE की इस नीति में भारतीय भाषाओं की सूची में हिंदी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, पंजाबी, गुजराती, उड़िया और असमिया जैसी भाषाएं शामिल की गई हैं। वहीं, विदेशी भाषाओं के अंतर्गत अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, अरबी और स्पेनिश जैसे विकल्प रखे गए हैं।

क्या है CBSE का थ्री-लैंग्वेज रूल?

बोर्ड के सेकेंडरी स्कूल करिकुलम के मुताबिक, भाषा के विषयों को तीन स्तरों यानी R1, R2 और R3 में विभाजित किया गया है। R1 छात्र की मुख्य भाषा होगी, जबकि R2 एक अलग भाषा के रूप में चुनी जाएगी। वहीं, R3 यानी तीसरी भाषा को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 के लिए अनिवार्य किया जाएगा, जिसका विस्तार 2030-31 तक पूरी तरह से कक्षा 10 तक कर दिया जाएगा। बोर्ड के नोटिफिकेशन में कहा गया है कि R1 और R2 के लिए एक ही भाषा नहीं चुनी जा सकेगी। कुल मिलाकर इस व्यवस्था में भारत की दो आधिकारिक भाषाओं के साथ-साथ संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाएं और अन्य क्षेत्रीय व विदेशी भाषाएं पढ़ाई जाएंगी। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए छात्र बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।

अनन्या जोशी पाबना की शिक्षा संवाददाता हैं, जो शिक्षा, परीक्षा और करियर से जुड़ी खबरें कवर करती हैं। प्रवेश परीक्षाओं, बोर्ड और करियर विकल्पों पर वे छात्रों के लिए उपयोगी जानकारी देती हैं। उनका फोकस सही और समय पर मार्गदर्शन देने पर रहता है।

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