आशुतोष रांका और सौरभ दास की जमानत सुनवाई के दौरान SEM को मिली धमकी, अज्ञात के खिलाफ पुलिस मामला दर्ज
दिल्ली
एक घंटा पहले
5
विचारों
मामले की पृष्ठभूमि
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उस समय हड़कंप मच गया जब विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) को धमकी मिलने की खबर सामने आई। यह घटना कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के दो प्रमुख नेताओं, सौरभ दास और आशुतोष रांका की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान हुई। दिल्ली पुलिस ने इस धमकी के मामले में रविवार को अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ गैर-संज्ञेय रिपोर्ट (एनसीआर) दर्ज की है। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला उस समय और तूल पकड़ गया जब सीजेपी ने अपनी पार्टी के नेताओं की रिहाई में जानबूझकर देरी किए जाने का गंभीर आरोप लगाया। पार्टी का दावा है कि जमानतदारों की गारंटी को निराधार और अस्पष्ट कारणों का हवाला देकर खारिज किया जा रहा है।
जमानत प्रक्रिया में देरी के आरोप
सीजेपी की विधि प्रकोष्ठ की प्रमुख रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सुनवाई के दौरान हुई देरी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने विस्तार से बताया कि वे खुद सुबह 11 बजे से थाने पर मौजूद थीं, जबकि सुनवाई का समय दोपहर 12 बजे तय किया गया था। रत्ना सिंह के मुताबिक, शाम 4 बजकर 42 मिनट तक भी सहायक पुलिस आयुक्त मंदिर मार्ग थाने नहीं पहुंचे थे। गौरतलब है कि सौरभ दास और आशुतोष रांका को बीते 14 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने और वहां के बंद फाटकों को फांदने के आरोप में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट किया है कि जंतर-मंतर का वह हिस्सा अब प्रदर्शन के लिए अधिसूचित स्थानों की सूची में शामिल नहीं है।
धमकी का विवाद और वकीलों की प्रतिक्रिया
रत्ना सिंह ने दावा किया कि बाद में मजिस्ट्रेट ने उन्हें खुद सूचित किया कि उन्हें किसी अनजान व्यक्ति द्वारा धमकी दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी वकील ने चार दिनों तक उपस्थिति दर्ज नहीं कराई और पांचवें दिन आने के बावजूद वे मामले पर चर्चा से बचते रहे। रत्ना सिंह ने आरोप लगाया कि प्रशासन किसी भी सूरत में दोनों नेताओं को रिहा नहीं करना चाहता। जब एसईएम ने धमकी के बारे में बताया, तो सीजेपी के वकीलों ने तुरंत मांग की कि मजिस्ट्रेट उस धमकी देने वाले का फोन नंबर और नाम रिकॉर्ड में दर्ज करें और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करें। उन्होंने सवाल उठाया कि धमकी के बहाने जमानत की सुनवाई को क्यों टाला जा रहा है। हालांकि, इन तीखे आरोपों पर दिल्ली पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।
Comments
0 comment