CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: पीएम केयर्स के आधे से ज्यादा ऑक्सीजन प्लांट ठप, वेंटिलेटर भी धूल फांक रहे पश्चिम बंगाल एक दिन पहले 10
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नई रिपोर्ट ने पश्चिम बंगाल में कोविड-19 प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, महामारी के दौरान मिले संसाधनों का सही उपयोग नहीं हुआ और करोड़ों रुपये की निधि बिना खर्च किए पड़ी रही।

विधानसभा में पेश हुई CAG की चौंकाने वाली रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल में कोविड-19 महामारी के दौरान स्वास्थ्य प्रबंधन और संसाधनों के आवंटन को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की रिपोर्ट ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। शुभेंदु अधिकारी ने अपने वादे के अनुसार विधानसभा के पटल पर वर्ष 2024 की यह ऑडिट रिपोर्ट रखी है। इस रिपोर्ट में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और कोरोना काल की तैयारियों में भारी खामियों का खुलासा किया गया है। रिपोर्ट बताती है कि पीएम केयर्स फंड और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के जरिए जुटाए गए ऑक्सीजन प्लांट और मेडिकल उपकरण पूरी तरह से लोगों के काम नहीं आ सके।

75 में से 43 प्लांट निष्क्रिय

रिपोर्ट के अनुसार, राज्य को पीएम केयर्स और सीएसआर के माध्यम से कुल 75 पीएसए ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र प्राप्त हुए थे। हालांकि, दिसंबर 2023 तक की स्थिति बेहद चिंताजनक रही। आंकड़ों के मुताबिक, इन 75 संयंत्रों में से केवल 32 प्लांट ही सुचारू रूप से काम कर रहे थे। इसका सीधा सा अर्थ है कि शेष 43 ऑक्सीजन प्लांट या तो तकनीकी खामियों के चलते बंद पड़े थे या फिर उन्हें स्थापित किए जाने के बावजूद शुरू करने की जहमत नहीं उठाई गई।

उपकरणों की बर्बादी और फंड का अधूरा उपयोग

CAG ने अपनी जांच में पाया कि सरकारी अस्पतालों को पीएम केयर्स के जरिए जो वेंटिलेटर और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मुहैया कराए गए थे, उनका भी समुचित इस्तेमाल नहीं हुआ। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि दो बड़े सरकारी अस्पतालों में ये महत्वपूर्ण जीवन रक्षक उपकरण बिना इस्तेमाल के ही पड़े रहे। साथ ही, वित्तीय प्रबंधन में भी बड़ी विफलता सामने आई है। आपात कोविड प्रतिक्रिया पैकेज (ECRP)-2 के अंतर्गत मिली राशि में से 659.28 करोड़ रुपये, जो कुल आवंटन का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा है, मार्च 2022 तक खर्च ही नहीं किए जा सके। इसी प्रकार, राज्य कोविड संयुक्त निधि के तहत आवंटित 462.05 करोड़ रुपये की राशि का भी उचित उपयोग नहीं हो पाया।

स्वास्थ्य तंत्र की विफलता पर गंभीर सवाल

CAG ने अपनी समीक्षा में यह भी रेखांकित किया है कि केंद्र सरकार ने महामारी से निपटने और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए ये संसाधन उपलब्ध कराए थे, लेकिन राज्य प्रशासन इनका सही लाभ जनता तक पहुँचाने में नाकाम रहा। उल्लेखनीय है कि तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने इससे पहले चार वित्तीय वर्षों, यानी 2024-25 तक की CAG रिपोर्ट को विधानसभा में पेश नहीं किया था। अब शुक्रवार को पटल पर रखी गई इस रिपोर्ट ने राज्य सरकार के दावों की पोल खोल दी है और स्वास्थ्य सेवाओं के ऑडिट पर विस्तृत सवाल खड़े कर दिए हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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