मध्य प्रदेश
एक महीने पहले
77
विचारों
मध्य प्रदेश का बुरहानपुर जिला अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के साथ-साथ अपनी अनूठी प्रतिभाओं के लिए भी जाना जाता है। यहाँ के युवाओं ने अपनी असाधारण कला के दम पर न केवल देश बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। इन्हीं अद्भुत कलाकारों में से एक हैं शिवा पाटिल, जो एक साधारण किसान के बेटे हैं। शिवा पाटिल ने चित्रकारी के क्षेत्र में एक ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसकी चर्चा आज हर तरफ हो रही है। वह कांच की खाली बोतलों के भीतर धुएं से ऐसी खूबसूरत कलाकृतियां उकेरते हैं कि देखने वाले हैरान रह जाते हैं। बिना किसी औपचारिक ट्रेनिंग के उन्होंने इस अनूठी कला में महारत हासिल की है और आज उनकी पेंटिंग्स देश-विदेश में धूम मचा रही हैं।
बचपन के संघर्ष और दीवारों पर उकेरी कला
शिवा पाटिल की कला यात्रा बेहद संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक रही है। उन्होंने बताया कि बचपन में उनके पास चित्रकारी करने के लिए न तो ब्रश हुआ करते थे और न ही रंग खरीदने के पैसे थे। लेकिन कला के प्रति उनके भीतर ऐसा जुनून था कि उन्होंने संसाधनों की कमी को कभी अपने आड़े नहीं आने दिया। शिवा टीवी पर आने वाले कार्टूनों को देखकर चित्र बनाना सीखते थे। ब्रश न होने पर वह माचिस की तीली पर रुई लपेटते थे और उसी को ब्रश की तरह इस्तेमाल करके अपने घर और पड़ोस की दीवारों पर चित्रकारी किया करते थे।
शुरुआत में शिवा की इस अनूठी कला को देखकर परिवार के लोग हैरान थे, लेकिन जल्द ही उन्होंने शिवा के इस असाधारण हुनर को पहचान लिया। परिवार ने उनका विरोध करने के बजाय उन्हें पूरा सहयोग देना शुरू कर दिया। शिवा का कहना है कि उन्होंने किसी भी कला संस्थान से चित्रकारी की कोई शिक्षा नहीं ली है। यह कला उनके लिए पूरी तरह से एक ईश्वरीय उपहार यानी 'गॉड गिफ्ट' है, जिसे उन्होंने अपनी मेहनत और निरंतर अभ्यास से निखारा है।
कांच की बोतल में धुएं का अनोखा जादू
शिवा पाटिल की सबसे खास कलाकृति वह है जिसे देखकर लोग दांतों तले उंगली दबा लेते हैं। वह कांच की खाली बोतलों के भीतर धुआं भरकर उसमें बेहद सधे हुए हाथों से चित्र बनाते हैं। इस तकनीक में बारीक सूझबूझ और अत्यधिक नियंत्रण की आवश्यकता होती है, क्योंकि धुएं के साथ चित्रकारी करना बेहद मुश्किल माना जाता है। उनकी इस नायाब कला की मांग अब काफी बढ़ गई है।
शिवा को चित्रकारी के क्षेत्र में काम करते हुए लगभग 30 साल बीत चुके हैं। इन तीन दशकों की लंबी यात्रा में उन्होंने 2000 से अधिक पेंटिंग्स बनाई हैं। उनकी इस अद्भुत प्रतिभा के लिए उन्हें अब तक अलग-अलग मंचों पर 100 से अधिक बार सम्मानित किया जा चुका है। उनकी पेंटिंग्स की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केवल भारत ही नहीं, बल्कि कई विदेशी कला प्रेमी भी उनकी पेंटिंग्स को काफी पसंद करते हैं और खरीदकर अपने साथ ले जाते हैं। इससे न केवल उन्हें वैश्विक पहचान मिली है, बल्कि यह उनकी आजीविका और रोजगार का एक मजबूत साधन भी बन गया है।
स्थानीय कलाकारों को मंच देने का संकल्प
शिवा पाटिल सिर्फ अपनी सफलता तक ही सीमित नहीं रहना चाहते। उनका मुख्य लक्ष्य बुरहानपुर के अन्य छिपे हुए प्रतिभावान कलाकारों को एक बड़ा और अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करना है। उनका मानना है कि इस क्षेत्र में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, बस जरूरत है तो इन कलाकारों को सही दिशा और अवसर देने की।
इसी उद्देश्य के साथ शिवा समय-समय पर कला प्रदर्शनियों का आयोजन करते रहते हैं। इन प्रदर्शनियों के जरिए वे स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा को दुनिया के सामने लाते हैं और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास करते हैं। एक किसान के बेटे से लेकर एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकार बनने तक का शिवा पाटिल का यह सफर देश के लाखों युवाओं के लिए एक बड़ी सीख और प्रेरणा है।
Comments
0 comment