भारत
5 घंटे पहले
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विचारों
दिल्ली में ब्रिक्स का भव्य आगाज
भारत की राजधानी नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन की शुरुआत के साथ ही वैश्विक कूटनीति के केंद्र में भारत आ गया है। दो दिवसीय इस भव्य आयोजन के पहले दिन कई ऐसे घटनाक्रम हुए जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचा है। इस समिट का सबसे बड़ा आकर्षण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक रही, जो करीब सात साल के लंबे अंतराल के बाद संपन्न हुई। इसके अलावा, सम्मेलन में भाग लेने वाले सदस्य देशों के बीच गहन मंथन हुआ और एक व्यापक साझा घोषणापत्र भी जारी किया गया।
मोदी और जिनपिंग की ऐतिहासिक मुलाकात
ब्रिक्स समिट से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बातचीत बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह मुलाकात इसलिए भी खास है क्योंकि गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद चीनी राष्ट्रपति का यह पहला भारत दौरा है। चीनी मीडिया एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने सहयोग की वकालत करते हुए कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे की खूबियों से सीखने की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि साझा विकास को हासिल करने के लिए दोनों पड़ोसी देशों को मिलकर काम करना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने भी समिट में आए सभी वैश्विक नेताओं का आभार व्यक्त किया।
साझा घोषणापत्र में आतंकवाद पर कड़ा रुख
ब्रिक्स देशों ने अपने साझा घोषणापत्र में दुनिया के सामने मौजूद तमाम चुनौतियों पर अपनी स्पष्ट राय रखी है। सदस्य देशों ने आतंकवाद के हर स्वरूप और उसकी कार्यप्रणाली की पुरजोर निंदा की है। घोषणापत्र में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले का जिक्र करते हुए उस पर चिंता जताई गई। ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर सहमति जताई है। इसके साथ ही, आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह मिलने और उन्हें मिलने वाली फंडिंग को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की गई है। सदस्य देशों ने वैश्विक स्तर पर आतंकियों की जवाबदेही तय करने का संकल्प दोहराया है।
वैश्विक आर्थिक नीतियों और प्रतिबंधों पर चिंता
ब्रिक्स घोषणापत्र में सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगाए जाने वाले एकतरफा आर्थिक और सेकेंडरी प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की है। इस बात पर जोर दिया गया है कि इस तरह के कड़े प्रतिबंधों का सीधा असर आम लोगों के जीवन, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और मानवाधिकारों पर पड़ता है। सदस्य देशों ने विशेष रूप से एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं जैसी संरक्षणवादी नीतियों को WTO के नियमों के विरुद्ध बताया है।
प्रौद्योगिकी और भविष्य के वैश्विक नियम
शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भविष्य की तकनीकों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि AI, साइबर स्पेस, आउटर स्पेस, बायोटेक्नोलॉजी और क्रिटिकल टेक्नोलॉजीज न केवल भविष्य के अवसर खोल रहे हैं, बल्कि ये ही अब भविष्य के वैश्विक नियम भी तय करेंगे। उन्होंने जोर दिया कि इन क्षेत्रों में 'ग्लोबल साउथ' की समान और सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना बहुत आवश्यक है।
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष पर चर्चा
ब्रिक्स समिट के दौरान मिडिल ईस्ट में चल रहे मौजूदा युद्ध पर भी गंभीर चर्चा हुई। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण वहां के लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह युद्ध अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के बिल्कुल विपरीत है।
शांति और कूटनीति का संकल्प
ब्रिक्स के इस पहले दिन सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने के लिए केवल शांतिपूर्ण बातचीत और कूटनीतिक रास्तों को अपनाने की वकालत की है। देशों ने जंग और टकराव को रोकने के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया है। इस पूरे आयोजन का समापन एक शानदार गाला डिनर के साथ हुआ, जिसमें नेताओं ने अनौपचारिक माहौल में कई मुद्दों पर चर्चा की।
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