बिहार
एक घंटा पहले
2
विचारों
पटना: बिहार से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जांच में पता चला है कि पेपर लीक से जुड़े गिरोह ने बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा के बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन सिस्टम को ही हैक कर लिया था। इस साल मार्च में हुई BPSC की परीक्षा में असली विद्यार्थियों के बदले प्रॉक्सी कैंडिडेट को बिठाने की पूरी व्यवस्था की गई थी। परीक्षा कराने वाली एजेंसी की मिलीभगत से प्रॉक्सी कैंडिडेट के बायोमैट्रिक्स को असली अभ्यर्थी के बायोमैट्रिक्स से बदल दिया गया। इस पूरे मामले में अब तक 37 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
अफसरों के साथ साठगांठ कर परीक्षा में गड़बड़ी
बिहार की आर्थिक अपराध इकाई के DIG मानवजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन ने अभ्यर्थियों के बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का ठेका जयपुर की जिस कंपनी को दिया था, उसी कंपनी ने BPSC के अधिकारियों के साथ मिलकर परीक्षा में गड़बड़ी की। न तो कंपनी के कर्मचारियों ने BPSC के नियमों का पालन किया और न ही अधिकारियों ने इसकी कोई जांच की।
जांच में खुली पूरी सच्चाई
ढिल्लों ने आगे बताया कि बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन करने वाली कंपनी ने संदिग्ध पृष्ठभूमि के लोगों को परीक्षक के रूप में नियुक्त कर दिया। इनमें से कई ऐसे थे जो पहले भी पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों के आरोप में गिरफ्तार हो चुके थे। कंपनी ने BPSC के ठेके की एक भी शर्त को पूरा नहीं किया, लेकिन परीक्षा की पूरी प्रक्रिया के दौरान इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने भी कंपनी के काम की क्रॉस चेकिंग नहीं की। इसी वजह से पेपर लीक से लेकर अभ्यर्थी के स्थान पर किसी और के परीक्षा देने तक की शिकायतें सामने आईं। इसके बाद जांच शुरू हुई और पूरी हकीकत सामने आ गई।
अधिकारियों की मिलीभगत के सबूत भी मिले
हैरान करने वाली बात यह है कि इस धांधली में BPSC के अधिकारियों की मिलीभगत के सबूत भी मिले हैं। अगर अधिकारी ही अपराधियों से मिल जाएं तो पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो जाते हैं। BPSC बिहार की सबसे बड़ी और सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा मानी जाती है। इसी परीक्षा को पास कर विद्यार्थी बिहार सरकार के बड़े अधिकारी बनते हैं। ऐसे में इतनी बड़ी परीक्षा में गड़बड़ी होना बेहद चिंताजनक है।
परीक्षा के लिए 11 लाख अभ्यर्थियों ने भरा था फॉर्म
आर्थिक अपराध इकाई ने इस वर्ष परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी की जांच को लेकर अपनी उपलब्धियों की जानकारी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। इसी दौरान इकाई के एडीजी मानवजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि 14 अप्रैल से 21 अप्रैल तक तीन चरणों में सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) के कुल 935 पदों के लिए BPSC की ओर से आयोजित परीक्षा, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया था, में गड़बड़ी और कदाचार को लेकर 5 जिलों में FIR दर्ज की गई थी। इस परीक्षा के लिए 11 लाख अभ्यर्थियों ने फॉर्म भरा था। अब तक कुल 35 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
35 आरोपी न्यायिक हिरासत में भेजे गए
एडीजी ने बताया कि बिहार लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) प्रतियोगिता परीक्षा-2026 में धांधली और कदाचार से जुड़े पांच मामले मुंगेर, नालंदा, वैशाली, बेगूसराय और नवादा में दर्ज किए गए थे। आर्थिक अपराध इकाई ने जांच अपने हाथ में ली। जांच के दौरान इन पांचों मामलों में 35 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
दोनों परीक्षाओं में एक जैसा था गड़बड़ी का तरीका
BPSC की एक अन्य परीक्षा सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी प्रतियोगिता परीक्षा-2026, जो 23 अप्रैल को आयोजित हुई थी, उसमें भी कदाचार का मामला सामने आया था। इस संबंध में पटना के श्रीकृष्णापुरी थाने में केस दर्ज किया गया था। EOU की जांच में इस मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। जांच एजेंसी का कहना है कि दोनों परीक्षाओं में धांधली का तरीका लगभग एक समान पाया गया, जिससे एक संगठित नेटवर्क की भूमिका साफ हो गई।
सुपरवाइजर और कई बायोमेट्रिक ऑपरेटर गिरफ्तार
जांच में सामने आया कि परीक्षाओं में बायोमेट्रिक सत्यापन का काम संभाल रही जयपुर स्थित M/s Sai Educare Private Limited के कई कर्मचारी गड़बड़ी में शामिल थे। EOU के अनुसार, कंपनी के जिला कॉर्डिनेटर, सुपरवाइजर और कई बायोमेट्रिक ऑपरेटरों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें मुंगेर, नालंदा, पटना, बांका और लखीसराय में तैनात कर्मचारी शामिल हैं।
पैसे लेकर अभ्यर्थियों तक पहुंचाई गई आंसर की
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ बायोमेट्रिक कर्मचारी पैसे लेकर परीक्षार्थियों तक आंसर की पहुंचा रहे थे और लगातार परीक्षा माफियाओं के संपर्क में बने हुए थे। DIG ने बताया कि BPSC और बायोमेट्रिक कंपनी के बीच हुए करार की कई शर्तों का उल्लंघन पाया गया है। कई बायोमेट्रिक कॉर्डिनेटर और ऑपरेटर खुद AEDO परीक्षा में अभ्यर्थी थे। कुछ का आपराधिक इतिहास होने के बावजूद उनका सत्यापन नहीं किया गया।
ब्लूटूथ के जरिए बताए गए उत्तर
DIG ने बताया कि जिन कर्मचारियों पर पहले भी परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लग चुके थे, उन्हें भी दोबारा जिम्मेदारी सौंप दी गई। अंतिम समय में ऐसे लोगों की तैनाती की गई जिनके नाम आयोग को सौंपी गई सूची में थे ही नहीं। इन तथ्यों के आधार पर संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का निर्णय लिया गया। जांच के दौरान बेगूसराय, छपरा और नालंदा में ब्लूटूथ और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से अभ्यर्थियों तक उत्तर पहुंचाने की बात सामने आई।
ECIL से जुड़े कर्मियों की भूमिका की जांच जारी
EOU ने बताया कि परीक्षा केंद्रों पर जैमर लगाने का काम कर रही ECIL से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका और उनके कामकाज के तरीके की भी जांच की जा रही है। जांच में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। DIG मानवजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि भविष्य में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी तरह की धांधली रोकने के लिए आर्थिक अपराध इकाई ने एक विशेष सेल का गठन किया है।
EOU ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर
यह सेल परीक्षा माफिया की गतिविधियों पर निगरानी रखेगा और पुराने आरोपियों की मौजूदा गतिविधियों पर भी नजर बनाए रखेगा। इसके साथ ही यह खुफिया सूचनाएं जुटाएगा और NEET UG पुनर्परीक्षा तथा सिपाही भर्ती समेत अन्य बड़ी परीक्षाओं के दौरान निगरानी करेगा। इसके लिए EOU ने हेल्पलाइन नंबर 9031829067 और ई-मेल digcou-bih@gov.in भी जारी किया है।
746 परीक्षा केंद्रों पर हुई थी परीक्षा
शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले AEDO की वैकेंसी बिहार में पहली बार निकली थी। परीक्षा कराने की जिम्मेदारी BPSC को सौंपी गई थी। फॉर्म भरने के लिए 100 रुपये की फीस तय की गई थी। कुल 935 पदों के लिए करीब 11 लाख अभ्यर्थियों ने फॉर्म भरा था। इसी कारण BPSC ने तीन चरणों में परीक्षा आयोजित की थी। पहले चरण की परीक्षा 14-15 अप्रैल को, दूसरे चरण की 17-18 अप्रैल को और तीसरे चरण की परीक्षा 20-21 अप्रैल को हुई थी। इसके लिए सभी 38 जिलों में कुल 746 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।
आर्थिक अपराध इकाई के DIG मानवजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि BPSC की ओर से आयोजित AEDO और सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी परीक्षा घोटाले में अपराध करने के नए-नए तरीके सामने आए हैं।
Comments
0 comment