बिहार
एक घंटा पहले
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लौकी की फसल पर फ्रूट कीट का खतरा
सब्जी की खेती करने वाले किसान अक्सर फसल में लगने वाले कीटों और बीमारियों से परेशान रहते हैं। भागलपुर के किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर नकदी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन इसमें सही प्रबंधन की बहुत आवश्यकता होती है। वर्तमान में लौकी की फसल में फ्रूट कीट का प्रकोप देखा जा रहा है। ये कीट लौकी के अंदर घुसकर उसे सड़ा देते हैं, जिससे बाजार में बिकने लायक फसल नहीं बचती और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
कीट लगने का मुख्य कारण
पौध संरक्षण विभाग के अधिकारी सुजीत पाल के अनुसार, सब्जी की खेती में फंगल वायरस और कीटों का संक्रमण तब सबसे अधिक होता है जब पौधों में फलन शुरू होता है। खासकर बरसात के दिनों में इनका असर काफी बढ़ जाता है। जिन खेतों में खरपतवार की मात्रा अधिक होती है, वहां इन कीटों के पनपने और फसल को बर्बाद करने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।
फसल को बचाने के प्रभावी उपाय
अगर किसान समय रहते सतर्क हो जाएं, तो इन उपायों के जरिए फसल को कीटों के हमले से बचाया जा सकता है:
- नीम के तेल का छिड़काव: बचाव के लिए हर 15 दिन में एक बार नीम के तेल का छिड़काव करें। इससे कीटों के आने की संभावना काफी कम हो जाती है।
- फ्रूट कीट ट्रैप का प्रयोग: खेत में फ्रूट कीट ट्रैप लगाएं। इसमें हानिकारक मक्खियां फंस जाती हैं और फसल सुरक्षित रहती है।
- रासायनिक कीटनाशक: यदि कीटों का प्रकोप अधिक हो, तो विशेषज्ञों की सलाह पर नियमित रूप से रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग करें।
- प्रबंधन पर ध्यान दें: कीटों के नियंत्रण के अलावा खेतों में पानी और उर्वरक का सही प्रबंधन करना भी बहुत जरूरी है।
इन छोटी-छोटी सावधानियों को अपनाकर किसान अपनी लौकी की पैदावार में सुधार कर सकते हैं और अच्छी कमाई कर सकते हैं।
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