मनोरंजन
एक महीने पहले
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एक अलग छवि का प्रयोग
बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना को दशकों तक रोमांटिक भूमिकाओं के लिए जाना गया। उनके अभिनय का एक अलग ही जादू था, जिसने उन्हें करोड़ों दिलों का धड़कन बनाया। लेकिन 1980 में रिलीज हुई फिल्म रेड रोज में उन्होंने अपनी इस छवि को पूरी तरह तोड़ दिया। इस फिल्म में उन्होंने एक ऐसे साइको किलर की भूमिका निभाई, जिसे देखकर सिनेमाघरों में बैठे दर्शक भी सिहर उठे थे।
फिल्म की कहानी और पृष्ठभूमि
फिल्म का निर्देशन मशहूर निर्देशक भारतीराजा ने किया था। यह फिल्म उनकी ही सुपरहिट तमिल फिल्म 'Sigappu Rojakkal' का हिंदी रूपांतरण थी। फिल्म में राजेश खन्ना के साथ पूनम ढिल्लों मुख्य भूमिका में नजर आई थीं। कहानी आनंद नाम के एक अमीर और प्रभावशाली व्यवसायी की है, जो बाहर से बेहद शालीन और सभ्य नजर आता है, लेकिन असल जिंदगी में वह एक सीरियल किलर है।
क्यों डरा गया था राजेश खन्ना का यह किरदार
इस फिल्म में राजेश खन्ना ने एक ऐसे व्यक्ति का चरित्र निभाया जो महिलाओं को अपने प्रेम जाल में फंसाता है और फिर उनकी हत्या कर देता है। हत्या के बाद वह शव के पास एक लाल गुलाब छोड़ देता था। बचपन में हुई किसी अनहोनी घटना के कारण वह महिलाओं से नफरत करने लगता है और खतरनाक अपराधी बन जाता है। फिल्म में उनके इस खौफनाक रूप को देखकर सेंसर बोर्ड ने भी उस समय कड़ी आपत्ति जताई थी।
कैसे हुआ सच का खुलासा
फिल्म की कहानी तब एक नया मोड़ लेती है जब आनंद की शादी शारदा (पूनम ढिल्लों) से होती है। शारदा की मासूमियत देखकर उसे पहली बार किसी से प्यार होता है। हालांकि, शादी के कुछ समय बाद शारदा को अपने पति के बर्ताव पर संदेह होने लगता है। जब उसे घर के तहखाने में आनंद की डायरी और वहां दबी हुई लाशें मिलती हैं, तो उसे पता चलता है कि उसका पति एक सीरियल किलर है। अंत में, आनंद खुद शारदा की जान लेने की कोशिश करता है, लेकिन समय रहते पुलिस उसे बचा लेती है। इस फिल्म में आनंद को जेल भेजने के बजाय मानसिक अस्पताल भेजा जाता है।
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