पिता के निधन के बाद संगीतकार ने अपनाया इस्लाम, बदला नाम, मां की पसंद से की शादी और अब टूटा 29 साल का रिश्ता मनोरंजन 2 महीने पहले 30
दो बार ऑस्कर जीतने वाले मशहूर संगीतकार ए.आर. रहमान का जीवन सफलता और संघर्ष दोनों से भरा रहा है, जिसमें धर्म परिवर्तन से लेकर मां की पसंद की लड़की से शादी और बाद में तलाक तक की कहानी शामिल है।

भारतीय संगीत की दुनिया में ए.आर. रहमान वह नाम है, जिनकी धुनों ने सिर्फ देश को ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को अपना मुरीद बना दिया। दो ऑस्कर अपने नाम करने वाले इस महान संगीतकार का सफर जितना शानदार रहा, उतना ही चुनौतियों और संघर्षों से भी भरा हुआ था। देश के इस सबसे चर्चित म्यूजिक कंपोजर की निजी जिंदगी भी उतनी ही दिलचस्प रही है।

बचपन में ही उठ गया पिता का साया

ए.आर. रहमान का जन्म 1967 में चेन्नई में हुआ था और उस समय उनका नाम ए.एस. दिलीप कुमार रखा गया था। उनके पिता आर.के. शेखर फिल्मों के संगीतकार थे, लेकिन बहुत जल्दी उनका निधन हो गया। जब पिता का देहांत हुआ, तब रहमान महज 9 साल के थे और इसके बाद उनके परिवार को भारी आर्थिक तंगी से जूझना पड़ा। हालात ये थे कि परिवार पिता के संगीत उपकरणों को किराये पर देकर घर का खर्च चलाता था।

कम उम्र में ही सिर से पिता का साया उठ जाने के बाद रहमान ने पढ़ाई के साथ-साथ कई छोटे-मोटे काम किए। इन्हीं कामों से उन्होंने परिवार को संभाला, लेकिन करियर में कुछ बड़ा करने के लिए संगीत ही उनका इकलौता सहारा बना रहा।

23 साल की उम्र में बदला धर्म और नाम

साल 1986 में, यानी पिता की मौत के दस साल बाद, उनके परिवार की मुलाकात सूफी पीर करीमुल्लाह शाह कादरी से हुई। पीर उस समय बीमार थे और रहमान की मां ने उनकी देखभाल की। इसी दौरान दोनों परिवारों के बीच गहरा रिश्ता बन गया। 23 साल की उम्र में रहमान ने इस्लाम कबूल कर लिया और धर्म परिवर्तन के बाद अपना नाम दिलीप कुमार से बदलकर अल्लाह राखा रख लिया।

'रोजा' ने पलट दी किस्मत

साल 1992 में निर्देशक मणिरत्नम की फिल्म 'रोजा' ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। फिल्म की रिलीज से पहले उनकी मां ने साफ कह दिया था कि स्क्रीन पर उनका नया नाम ही नजर आना चाहिए। 'रोजा' का संगीत इतना लोकप्रिय हुआ कि रहमान रातों-रात देश के सबसे चर्चित संगीतकार बन गए।

इसके बाद 'बॉम्बे', 'दिल से', 'लगान', 'रंगीला', 'रंग दे बसंती', 'रॉकस्टार' और 'स्लमडॉग मिलियनेयर' जैसी फिल्मों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

दो ऑस्कर समेत कई बड़े सम्मान

'स्लमडॉग मिलियनेयर' के गाने रहमान के करियर के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुए। इस फिल्म के संगीत के लिए उन्होंने दो ऑस्कर जीते। अपने पूरे करियर में संगीतकार ने दो ऑस्कर, एक ग्रैमी, एक बाफ्टा और एक गोल्डन ग्लोब पुरस्कार अपने नाम किया है।

निजी जिंदगी हमेशा रही सुर्खियों से दूर

काम के मोर्चे पर लगातार मिल रही कामयाबी के बीच रहमान ने अपनी निजी जिंदगी को हमेशा सुर्खियों से दूर रखा। उनकी पत्नी के साथ उनके रिश्ते भले ही अब पहले जैसे न रह गए हों, लेकिन इस जोड़े ने अपने रिश्ते को सार्वजनिक मंचों से दूर ही रखा।

मां ने ढूंढी थी पत्नी

साल 1994 में जब रहमान 27 साल के हुए, तब उन्होंने घर बसाने के बारे में सोचा। उन्होंने अपनी मां से ही पत्नी ढूंढने के लिए कहा, क्योंकि वह लड़कियों से बात करने में बेहद शर्मीले थे। स्टूडियो में रोज वह कई महिलाओं से मिलते थे, मगर कभी किसी को जीवनसाथी के रूप में नहीं देखा।

29 साल तक दुनिया की नजरों से दूर रहीं पत्नी

शादी के बाद इस जोड़े के घर तीन बच्चों ने जन्म लिया। उनकी दो बेटियां खातिजा और रहीमा हैं, जबकि बेटे का नाम अमीन है। परिवार ने हमेशा निजी जीवन को प्राथमिकता दी। उनकी पत्नी सायरा ने कभी कोई इंटरव्यू नहीं दिया, फिल्मी आयोजनों में नहीं गईं और शायद ही कभी तस्वीरें खिंचवाईं। रहमान की पत्नी होने के बावजूद वह 29 साल तक दुनिया की नजरों से दूर रहीं।

आन्या कपूर पाबना के मनोरंजन रिपोर्टर हैं, जो बॉलीवुड, ओटीटी और टेलीविजन की खबरें कवर करते हैं। फिल्मों, वेब सीरीज, सेलिब्रिटी और बॉक्स ऑफिस पर उनकी पैनी नजर रहती है। वे मनोरंजन जगत की हलचल को रोचक अंदाज में दर्शकों तक लाते हैं।

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