भारत
2 घंटे पहले
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विचारों
सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं
ओडिशा के नबरंगपुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां सनाटेमेरा हाई स्कूल हॉस्टल में रहने वाले 180 से अधिक छात्र व्यवस्था से तंग आकर अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर घर के लिए पैदल ही निकल पड़े। इन बच्चों के गांव हॉस्टल से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। छात्रों का आरोप है कि हॉस्टल में उन्हें लंबे समय से न केवल घटिया भोजन परोसा जा रहा था, बल्कि वहां रहने के लिए बुनियादी सुविधाएं भी नदारद थीं। छात्रों की मानें तो वे काफी समय से नारकीय परिस्थितियों में जी रहे थे, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। गौरतलब है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के सीतापुर में भी स्कूली बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे थे।
रहने की बदतर स्थिति से छात्र परेशान
हॉस्टल छोड़ने वाले छात्रों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि वहां कमरों की भारी कमी है, जिसके कारण उन्हें बहुत ही भीड़भाड़ वाले वातावरण में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा था। भोजन की खराब गुणवत्ता के अलावा, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी वहां अभाव है। छात्रों की नाराजगी तब चरम पर पहुंच गई जब इन समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकला। एक साथ बड़ी संख्या में बच्चों के हॉस्टल से निकलने के बाद हड़कंप मच गया और आनन-फानन में अभिभावक भी मौके पर पहुंच गए। कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को सुरक्षित वापस अपने साथ घर ले जाने का फैसला किया।
स्थानीय लोगों ने खोली पोल
स्थानीय निवासी मधु माझी ने छात्रों के आरोपों की पुष्टि करते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि हॉस्टल की चारदीवारी बुरी तरह क्षतिग्रस्त है और छात्रों के उपयोग के लिए पर्याप्त शौचालय मौजूद नहीं हैं। माझी के अनुसार, भारी बारिश के कारण हॉस्टल परिसर और भी बदहाल हो गया है, जिससे वहां रहना मुश्किल हो गया है। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन को तत्काल प्रभाव से हॉस्टल के जीर्णोद्धार और वहां सभी आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
प्रशासन की कार्रवाई और नया हेडमास्टर
घटना की सूचना मिलने पर असिस्टेंट ब्लॉक ऑफिसर दशरथ गोंड मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। गोंड ने बताया कि जब वे वहां पहुंचे तो बच्चे पैदल ही घर की ओर बढ़ रहे थे। अधिकारियों ने बच्चों को तुरंत दुकलपाड़ा स्कूल में रुकने की व्यवस्था की और उन्हें वहां भोजन उपलब्ध कराया। दशरथ गोंड ने स्वीकार किया कि बच्चों की शिकायतें सही थीं, क्योंकि उस स्थान पर हॉस्टल के कमरे और शौचालय का निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई करते हुए हेडमिस्ट्रेस का तबादला कर दिया गया है और अब गणेशराम नायक को नया हेडमास्टर नियुक्त किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और देखभाल विभाग की प्राथमिकता है, इसलिए उन्हें समझा-बुझाकर गाड़ी के माध्यम से वापस स्कूल भेज दिया गया है। विभाग इस बात को लेकर भी सजग है कि बच्चों की जिम्मेदारी पूरी तरह से प्रशासन की है।
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