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एक घंटा पहले
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मणिपुर में सुरक्षा स्थिति को लेकर एक बार फिर बड़ी चिंता सामने आई है। इम्फाल ईस्ट जिले के याइरिपोक स्थित बिष्णुनाहा इलाके में मणिपुर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कैशम मेघचंद्र सिंह के घर के पास एक भीषण धमाका हुआ है। यह घटना रात के करीब 8:15 बजे की बताई जा रही है, जब अचानक एक जोरदार आवाज से पूरा इलाका दहल उठा। इस धमाके के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बलों की टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं। फिलहाल पूरे क्षेत्र की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और पुलिस बल द्वारा बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
धमाके की वजह अभी तक साफ नहीं, जांच जारी
इस अप्रत्याशित घटना के संबंध में मणिपुर कांग्रेस अध्यक्ष कैशम मेघचंद्र सिंह के जनसंपर्क अधिकारी इबोचौबा थौनाओजाम ने जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि धमाका उनके घर के बेहद करीब हुआ था, लेकिन अभी तक यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह हमला किस तरह का था और इसके पीछे किसका हाथ है। गनीमत यह रही कि इस हादसे में अब तक किसी के हताहत होने या घायल होने की कोई खबर नहीं मिली है। पुलिस इस मामले की गहनता से पड़ताल कर रही है कि क्या यह कोई सुनियोजित साजिश थी या फिर कोई दुर्घटना थी।
गौरतलब है कि मणिपुर काफी समय से गंभीर जातीय संघर्ष की आग में जल रहा है। इस हिंसा में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। राज्य में शांति बहाली के प्रयास लगातार जारी हैं, लेकिन अब तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। इस धमाके से कुछ दिन पहले ही, पिछले सप्ताह उग्रवादियों ने कांगपोकपी में एक हिंसक हमला किया था, जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई थी। इस ताजा घटना ने इलाके में फिर से तनाव बढ़ा दिया है।
विधानसभा में विस्थापितों के पुनर्वास पर हुई चर्चा
इसी बीच, राज्य की विधानसभा में विस्थापित लोगों के पुनर्वास और उनकी स्थिति को लेकर चर्चा हुई। विधानसभा में कांग्रेस विधायक टी लोकेश्वर सिंह द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का उत्तर देते हुए मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने महत्वपूर्ण आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने सदन को सूचित किया कि राज्य में आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों की कुल संख्या लगभग 60,000 है, जिनमें से करीब 36,000 लोगों का पुनर्वास किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने इस पुनर्वास कार्य में हुई प्रगति का श्रेय सभी विधायकों के सामूहिक सहयोग और अथक प्रयासों को दिया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है, क्योंकि राज्यभर के विभिन्न राहत शिविरों में अभी भी लगभग 24,000 विस्थापित लोग रहने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि पहाड़ी और घाटी दोनों ही क्षेत्रों के विस्थापित लोगों की अपने मूल घरों को वापस लौटने की तीव्र इच्छा है।
विस्थापितों की आर्थिक मदद कर रही है सरकार
सरकार की ओर से की जा रही सहायता पहलों के बारे में विस्तार से बताते हुए वाई खेमचंद सिंह ने कहा कि पुनर्वास की प्रक्रिया को सुगम और प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने पिछले महीने विस्थापितों के करीब 6 से 7 संयुक्त संघों के प्रतिनिधियों को एक बैठक के लिए आमंत्रित किया था। इस बैठक में उनकी समस्याओं और पुनर्वास के तरीकों पर गहन मंथन किया गया था।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 36,000 लोगों के पुनर्वास के बावजूद, सरकार कुल 60,000 विस्थापितों में से लगभग 59,000 लोगों को नियमित रूप से वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। सरकार का मानना है कि जो लोग अपने घरों को लौट भी चुके हैं, उन्हें भी रोजगार और आजीविका के अवसरों की भारी कमी के कारण जीवनयापन में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसी वजह से सरकार उन्हें मासिक वित्तीय सहायता देना जारी रख रही है ताकि वे इस कठिन समय से उबर सकें।
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