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2 घंटे पहले
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दिशा बैठक में भड़कीं कंगना रनौत
मंडी संसदीय क्षेत्र से बीजेपी सांसद कंगना रनौत हाल ही में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति यानी दिशा की बैठक में बेहद नाराज दिखाई दीं। बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों द्वारा केंद्र प्रायोजित योजनाओं और सांसद निधि के तहत किए जा रहे कार्यों की धीमी रफ्तार पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। सांसद ने न केवल अधिकारियों के काम करने के तरीके पर सवाल खड़े किए, बल्कि उन्हें जनता के पैसे की जवाबदेही तय करने की सख्त नसीहत भी दी।
फंड खर्च करने में सुस्ती पर सवाल
बैठक में कंगना रनौत ने विकास कार्यों में हो रही देरी को लेकर अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे। उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि उनके सांसद फंड के तहत लगभग 11 करोड़ रुपये उपलब्ध थे, लेकिन अब तक मात्र 50 लाख रुपये ही खर्च किए जा सके हैं। सांसद ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें किसी तरह के बहाने या झूठे वादे सुनने में कोई रुचि नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि हर बार दिशा कमेटी की बैठक में उन्हें एक ही तरह की बातें सुनने को मिलती हैं। उन्होंने ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर्स से सीधा सवाल किया कि आखिर इतनी बड़ी राशि का उपयोग अब तक क्यों नहीं हो पाया है। साथ ही उन्होंने खर्च की पूरी कार्य प्रदर्शन रिपोर्ट भी तलब की है। सांसद ने आरोप लगाया कि पहले उन्हें बताया गया था कि लगभग 90 प्रतिशत फंड खर्च हो चुका है और काम में कोई दिक्कत नहीं है, जो कि वास्तविकता से परे है।
काम न करने पर अधिकारियों को लताड़ा
बैठक के दौरान कंगना रनौत का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि आपको काम पर लगाने के लिए केंद्र सरकार से पत्र तक मंगवाने पड़ते हैं, बावजूद इसके काम की स्थिति संतोषजनक नहीं है। सांसद ने आगे कहा कि उनके कार्यालय की बातों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, जिसकी वजह से नकारात्मक प्रचार हो रहा है। उन्होंने कहा कि लोग इसे लेकर सोशल मीडिया पर रील्स बना रहे हैं, जिससे उनकी व्यक्तिगत छवि भी प्रभावित होती है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि यदि उन्हें अधिकार मिल जाए तो वह एक दिन में काम करके दिखा सकती हैं।
जनता के पैसे की पारदर्शिता पर जोर
सांसद ने जोर देकर कहा कि सरकारी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचाना है। उन्होंने व्यवस्था की खामियों को रेखांकित करते हुए दावा किया कि करीब 30 से 40 प्रतिशत जनता का पैसा गलत हाथों में जा रहा है। उन्होंने सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने का आह्वान किया। सांसद के अनुसार, योजनाएं केवल सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका जमीनी असर गांवों के अंतिम व्यक्ति तक दिखना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य में विकास कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी धन के उचित इस्तेमाल पर विशेष निगरानी रखी जाए।
पहले भी सामने आ चुकी है नाराजगी
यह कोई पहली बार नहीं है जब सांसद कंगना रनौत ने अधिकारियों के प्रति अपना सख्त रवैया दिखाया हो। पूर्व में अक्टूबर 2025 में आयोजित दिशा बैठक के दौरान भी उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि विकास कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनके इस कड़े तेवर ने एक बार फिर प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता के मुद्दे को सुर्खियों में ला दिया है।
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