एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: विधायक संजय पाठक को अवमानना मामले में मिली राहत, बिना शर्त माफी स्वीकार मध्य प्रदेश एक महीने पहले 51
मध्यप्रदेश के विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक को हाईकोर्ट ने अवमानना के एक मामले में राहत दी है, जिसमें उन्होंने एक न्यायाधीश को फोन करने के लिए बिना शर्त माफी मांगी थी।

हाईकोर्ट से भाजपा विधायक को मिली बड़ी राहत

मध्यप्रदेश के कटनी जिले के विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक और प्रमुख खनन कारोबारी संजय पाठक को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक आपराधिक अवमानना के मामले में बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनकी बिना शर्त मांगी गई माफी को स्वीकार कर लिया है। यह मामला एक न्यायाधीश को फोन कॉल और संदेश करने से संबंधित था, जिसे अदालत ने अवमानना की श्रेणी में रखा था। 9 पन्नों के अपने विस्तृत फैसले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यद्यपि यह कृत्य अवमानना के दायरे में आता है, लेकिन विधायक को सजा से छूट दी जा रही है। साथ ही, अदालत ने उन्हें भविष्य में ऐसी किसी भी हरकत से बचने की सख्त चेतावनी भी दी है। यह पूरा विवाद कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित द्वारा दायर की गई उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें एक कंपनी पर लगभग 1200 करोड़ रुपये के अवैध खनन की रिकवरी का आरोप लगाया गया था और यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है।

न्यायाधीश को कॉल करने का मामला

विवाद की शुरुआत 1 सितंबर 2025 को हुई, जब 1200 करोड़ रुपये के अवैध खनन से जुड़े मामले की सुनवाई चल रही थी। उस दौरान विधायक संजय पाठक ने मामले से जुड़े न्यायाधीश को फोन कॉल किया था। इस घटना के बाद न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि विधायक संजय पाठक ने उनसे फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया था। अपनी न्यायिक गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से उन्होंने केस की सुनवाई करने से मना कर दिया और मामले को प्रशासनिक स्तर पर तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के पास स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। इसी के बाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए विधायक संजय पाठक के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी।

माफी और कानूनी स्थिति

इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थिति तब और गंभीर हो गई जब विधायक के वकीलों ने भी मामला लड़ने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संजय पाठक के खिलाफ क्रिमिनल कंटेंप्ट का केस दर्ज करने के निर्देश जारी किए। हालांकि, बाद में हुई सुनवाई में विधायक संजय पाठक व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुए और उन्होंने अपनी गलती मानते हुए बिना शर्त माफी मांगी। विधायक का पक्ष रखते हुए यह तर्क दिया गया कि उन्होंने गलती से फोन मिला दिया था और अहसास होते ही कॉल काट दिया था। उन्होंने दावा किया कि वह केवल शिष्टाचार के नाते परिचय देने के लिए संदेश भेज रहे थे और न्यायाधीश विशाल मिश्रा से उनकी कोई सार्थक बातचीत नहीं हुई थी। उनका यह भी कहना था कि न्याय प्रक्रिया में बाधा डालने का उनका कोई इरादा नहीं था।

न्यायालय की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विधायक को कड़ी फटकार भी लगाई। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लंबित मामले से जुड़े किसी भी व्यक्ति का न्यायाधीश को फोन करना, उनसे मिलना या किसी अन्य तरीके से संपर्क करने का प्रयास करना पूरी तरह से वर्जित है। अदालत ने जोर देकर कहा कि ऐसा व्यवहार कानून की दृष्टि में आपराधिक अवमानना है। हालांकि, न्यायालय ने यह भी माना कि इस घटना के कारण न्यायिक प्रक्रिया में कोई वास्तविक बाधा उत्पन्न नहीं हुई है। अतः अवमानना अधिनियम की धारा 13 के तहत प्राप्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए कोर्ट ने विधायक की माफी स्वीकार कर ली और उन्हें भविष्य के लिए सावधान रहने की हिदायत दी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप