वंदे मातरम पर घमासान: सोनिया और राहुल गांधी पर बीजेपी का बड़ा हमला, माफी की मांग राष्ट्रीय राजनीति 5 घंटे पहले 2
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम के गायन को रोकने के कथित इशारे को लेकर बीजेपी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है।

बीजेपी का सोनिया और राहुल पर तीखा प्रहार

स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम के गायन को कथित रूप से रोकने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना को राष्ट्रीय गौरव का अपमान बताते हुए सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से सार्वजनिक माफी की मांग की है।

क्या है पूरा मामला और बीजेपी के आरोप

बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने मीडिया के सामने घटना का विवरण देते हुए आरोप लगाया कि जब पूरा देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, तब कांग्रेस कार्यालय में एक शर्मनाक दृश्य देखने को मिला। भंडारी के अनुसार, सोनिया गांधी ने वहां हाथ के इशारे से वंदे मातरम के गायन को रोकने का निर्देश दिया। जब गाना जारी रहा, तो उन्होंने दोबारा वही इशारा किया। भंडारी ने इसे 'दिमागी नक्सल' मानसिकता का स्पष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस समर्थक पहले पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते थे, तब उनकी लीडरशिप का आक्रोश क्यों नहीं जागता था, लेकिन वंदे मातरम के समय ऐसा व्यवहार किया गया जैसे कोई बड़ा अपराध हो गया हो।

संविधान और राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान

प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि सोनिया और राहुल गांधी का रवैया देश के स्वतंत्रता सेनानियों, संविधान, और भारत की संप्रभुता के प्रति नकारात्मक है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक इत्तेफाक नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी नीति का हिस्सा है। इसी क्रम में उन्होंने केरल की कांग्रेस सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम के गायन को स्किप किया गया। भंडारी के मुताबिक, राहुल और सोनिया गांधी के दिल देश के बजाय उन ताकतों के लिए धड़कते हैं जो हाशिए पर हैं।

पी. चिदंबरम और नक्सली विचारधारा पर तंज

बीजेपी प्रवक्ता ने पी. चिदंबरम के उस बयान पर भी निशाना साधा जिसमें उन्होंने स्वयं को 'दिमागी नक्सल' बताया था। भंडारी ने कहा कि जब कांग्रेस का शासन था, तब नक्सलियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के कार्यकाल में नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में बड़े कदम उठाए गए और आदिवासी आबादी को सुरक्षा प्रदान की गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग देश की संसद को सर्वोपरि मानते हैं, वे कभी राष्ट्रगीत का अपमान करने का सोच भी नहीं सकते।

राष्ट्रीय सम्मान कानून का उल्लंघन

बीजेपी ने इस घटना को कानूनी दृष्टिकोण से भी गंभीर बताया है। भंडारी ने उल्लेख किया कि 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971' में 2026 में हुए संशोधन के तहत वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया है। इस अधिनियम की धारा 3 के अनुसार, जानबूझकर इसका विरोध करना कानून का उल्लंघन है। भंडारी ने कहा कि सोनिया और राहुल गांधी ने जानबूझकर ऐसा किया है, जो यह साबित करता है कि वे भारत को आगे ले जाने वाली किसी भी पहल का विरोध करने वाली चरमपंथी ताकतों के साथ खड़े हैं। हालांकि, कांग्रेस ने सफाई दी है कि मल्लिकार्जुन खड़गे को खड़े होने में दिक्कत थी, इसलिए ऐसा हुआ।

सोनिया और राहुल से पांच तीखे सवाल

प्रदीप भंडारी ने इस विवाद को लेकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के समक्ष पांच महत्वपूर्ण प्रश्न रखे हैं:

  • पहला सवाल: क्या देशभक्ति का एक अंश भी होने पर, स्वतंत्रता सेनानियों और तिरंगे के अपमान के लिए उन्हें अगले 24 घंटे के भीतर माफी नहीं मांगनी चाहिए?
  • दूसरा सवाल: क्या राहुल गांधी के कथित ऑडियो और केरल सरकार की कार्यप्रणाली इस बात का प्रमाण नहीं है कि कांग्रेस पार्टी में राष्ट्रवाद और देशभक्ति की कमी है?
  • तीसरा सवाल: क्या कांग्रेस नेता जयराम रमेश का अब तक का बचाव पूरी तरह से झूठ साबित नहीं हो चुका है?
  • चौथा सवाल: स्वतंत्रता दिवस के दिन वंदे मातरम का विरोध केवल वही कर सकता है जिसे भारत की अखंडता में विश्वास न हो। क्या कांग्रेस का यह व्यवहार संविधान के सक्रिय विरोध के समान नहीं है?
  • पांचवां सवाल: देश का युवा, विशेषकर जेन जी, जो राष्ट्रवादी पीढ़ी का हिस्सा है, क्या वह कांग्रेस के इस दोहरे चरित्र और तिरंगे के अपमान को कभी बर्दाश्त करेगा?

अंत में, भंडारी ने दोहराया कि कांग्रेस के नेतृत्व को हर देशभक्त भारतीय से माफी मांगनी चाहिए क्योंकि उनके द्वारा दिखाए गए इस रवैये ने 140 करोड़ भारतीयों की भावनाओं को आहत किया है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप