बिलासपुर के बाजारों में बढ़ा कमल गट्टे का क्रेज, शुगर के मरीजों के लिए बना पहली पसंद छत्तीसगढ़ 3 महीने पहले 147
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में मानसून की दस्तक के साथ ही कमल गट्टे (कोपरा) का बाजार सज गया है। पौष्टिकता से भरपूर इस मौसमी फल की मांग मधुमेह (शुगर) के मरीजों के बीच काफी बढ़ गई है।

छत्तीसगढ़ में जैसे ही मानसून की पहली फुहारें गिरती हैं, वैसे ही बिलासपुर के पारंपरिक बाजारों में एक अनोखी रौनक देखने को मिलने लगती है। इस सुहाने मौसम के आते ही शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक, देवकीनंदन चौक पर एक खास मौसमी फल की बहार आ जाती है। हम बात कर रहे हैं कमल गट्टे की, जिसे स्थानीय लोग बड़े चाव से 'कोपरा' भी कहते हैं। स्वाद में लाजवाब और सेहत के नजरिए से अत्यंत गुणकारी होने के कारण इन दिनों इसकी मांग आसमान छू रही है। बिलासपुर के इस बाजार में सुबह से ही ग्राहकों का तांता लग जाता है, जिनमें सबसे अधिक संख्या स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने वाले लोगों और विशेष रूप से शुगर यानी मधुमेह से पीड़ित मरीजों की देखी जा रही है।

देवकीनंदन चौक पर वर्षों पुराना पारंपरिक कारोबार

बिलासपुर के देवकीनंदन चौक के एक कोने में पिछले कई सालों से कमल गट्टा बेच रहीं बुजुर्ग महिला विक्रेता विजयलक्ष्मी ठाकुर अब इस क्षेत्र की एक पहचानी हुई हस्ती बन चुकी हैं। बारिश के दिनों में उनकी छोटी सी दुकान पर खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ती है। विजयलक्ष्मी ठाकुर ने बताया कि बरसात के मौसम की शुरुआत के साथ ही इस फल की बिक्री में भारी उछाल आता है। उनके अनुसार, केवल बिलासपुर के स्थानीय निवासी ही नहीं, बल्कि विभिन्न गांवों और बाहरी शहरों से आने वाले लोग भी जब इस चौक से गुजरते हैं, तो कमल गट्टा खरीदना कभी नहीं भूलते। इस मौसमी व्यापार से उन्हें हर साल एक अच्छी आजीविका मिल जाती है, जो उनके परिवार के भरण-पोषण के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बनती है।

बेमेतरा के तालाबों से बिलासपुर के बाजार तक का सफर

यह स्वादिष्ट और सेहतमंद कमल गट्टा स्थानीय स्तर पर बिलासपुर में तैयार नहीं होता है, बल्कि इसे एक लंबी दूरी तय करके यहां लाया जाता है। विजयलक्ष्मी ठाकुर ने इस फल के स्रोत के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वे इसे विशेष रूप से पड़ोसी बेमेतरा जिले के नांदघाट और उसके आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित बड़े-बड़े तालाबों से मंगवाती हैं। वहां के स्थानीय लोग तालाबों की गहराई से इन ताजे कमल गट्टों को निकालते हैं और फिर इन्हें बिलासपुर के बाजारों तक सुरक्षित पहुंचाया जाता है। नांदघाट से आने वाला यह कमल गट्टा अपने बिल्कुल ताजे स्वाद, सौंधी खुशबू और बेहद मुलायम सफेद दानों के कारण ग्राहकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। इसके नरम दानों को चबाना बेहद आसान और स्वादिष्ट होता है।

शुगर के मरीजों के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक औषधि

बिलासपुर के इस बाजार में कमल गट्टे की मांग इतनी ज्यादा होने के पीछे केवल इसका बेहतरीन स्वाद ही नहीं है, बल्कि इसके भीतर छिपे अनेक स्वास्थ्य लाभ भी हैं। दुकान पर आने वाले अधिकांश ग्राहक इसे विशेष तौर पर घर के बुजुर्गों और शुगर के मरीजों के लिए खरीदकर ले जाते हैं। स्थानीय लोगों और विक्रेता का ऐसा मानना है कि कमल गट्टे में प्राकृतिक रूप से शुगर की मात्रा बहुत कम होती है, जिससे यह रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने में सहायक हो सकता है। इसके अलावा, इसे एक बेहद हल्का और सुपाच्य फल माना जाता है जो पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखता है। हालांकि, स्वास्थ्य के मामलों में किसी भी प्रकार का सेवन करने से पहले डॉक्टरों या योग्य चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह लेना बेहद जरूरी और फायदेमंद होता है। इसके बावजूद, इसकी प्राकृतिक पौष्टिकता के कारण लोगों का इस पर अटूट विश्वास बना हुआ है।

कीमत और मौसमी आमदनी का जरिया

कीमत के लिहाज से देखें तो देवकीनंदन चौक पर यह स्वादिष्ट कमल गट्टा इस समय 80 रुपये से लेकर 100 रुपये प्रति दर्जन की दर से बेचा जा रहा है। महंगाई के इस दौर में भी लोग इस स्वास्थ्यवर्धक फल को इस कीमत पर खरीदने में बिल्कुल भी संकोच नहीं कर रहे हैं। विजयलक्ष्मी ठाकुर ने बेहद खुशी के साथ बताया कि रोजाना उनके पास अच्छी खासी तादाद में ग्राहक पहुंचते हैं, जिससे उनका सारा माल आसानी से बिक जाता है। इस मौसमी कारोबार से होने वाला मुनाफा उन्हें साल के इस समय में काफी बड़ी राहत देता है। मानसून के इस सुहाने मौसम में कमल गट्टे का अनोखा स्वाद और इसके औषधीय गुण बिलासपुर के लोगों को लगातार अपनी तरफ आकर्षित कर रहे हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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