राजस्थान
एक घंटा पहले
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बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में चिकित्सकों ने एक दुर्लभ और बेहद जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए 58 वर्षीय महिला के फेफड़े से करीब एक इंच लंबी सुपारी बाहर निकाली। यह महिला पिछले सात वर्षों से लगातार खांसी, बार-बार निमोनिया और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याओं से परेशान थी। कई शहरों में इलाज कराने के बावजूद उसकी बीमारी की असली वजह सामने नहीं आ पा रही थी।
सात साल तक नहीं पकड़ में आई असली वजह
सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज से जुड़े पीबीएम अस्पताल के श्वसन रोग विभाग ने इस कठिन प्रक्रिया को अंजाम देकर रामदेवरा निवासी महिला को राहत दी। बीते सात साल से वह लगातार खांसी, बार-बार होने वाले निमोनिया, सीने में दर्द और सांस की तकलीफ से जूझ रही थी। कई शहरों के अस्पतालों में उपचार और अनेक डॉक्टरों से सलाह के बाद भी उसकी बीमारी का सटीक कारण पता नहीं चल सका था।
टीबी की आशंका के आधार पर हुआ इलाज
मिली जानकारी के अनुसार, महिला ने जोधपुर और फलोदी समेत कई जगहों पर इलाज कराया। उसकी सीटी स्कैन रिपोर्ट विशेषज्ञ राय के लिए मुंबई तक भेजी गई, जहां चिकित्सकों ने टीबी होने की आशंका जताई थी। इसी आधार पर आगे की जांच और इलाज भी किया गया, मगर महिला की हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। समय बीतने के साथ उसकी तकलीफें बढ़ती गईं और वह लंबे समय तक शारीरिक एवं मानसिक पीड़ा झेलती रही। इसी बीच रिश्तेदारों से जानकारी मिलने पर वह पीबीएम अस्पताल के श्वसन रोग विभाग पहुंची, जहां विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. गुंजन सोनी ने उसकी विस्तृत जांच की।
फेफड़े में विदेशी वस्तु का संदेह
जांच के दौरान चिकित्सकों को महिला के फेफड़े में किसी बाहरी वस्तु के होने का संदेह हुआ। आगे की पड़ताल में सामने आया कि उसके फेफड़े में करीब एक इंच लंबी सुपारी फंसी हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह सुपारी संभवतः कई वर्ष पहले श्वास नली के रास्ते फेफड़े में पहुंचकर वहीं अटक गई थी और यही लगातार संक्रमण, खांसी तथा सांस संबंधी दिक्कतों की जड़ बनी हुई थी।
डेढ़ घंटे चली चुनौतीपूर्ण ब्रोंकोस्कोपी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉ. गुंजन सोनी ने अपनी विशेषज्ञ टीम के साथ ब्रोंकोस्कोपी करने का निर्णय लिया। यह एक ऐसी आधुनिक तकनीक है, जिसमें दूरबीननुमा उपकरण की मदद से श्वास नलियों और फेफड़ों के भीतर पहुंचकर जांच व उपचार किया जाता है। यह प्रक्रिया इसलिए जटिल थी क्योंकि सुपारी लंबे समय से फेफड़े में फंसी थी और उसके आसपास ऊतक विकसित हो चुके थे। करीब डेढ़ घंटे तक चले इस चुनौतीपूर्ण उपचार में चिकित्सकों ने बेहद सावधानी से सुपारी को छोटे-छोटे टुकड़ों में क्रश किया और फिर बाहर निकाल लिया।
प्रक्रिया के बाद मिली तत्काल राहत
सफल प्रक्रिया के तुरंत बाद महिला को राहत महसूस हुई। चिकित्सकों के अनुसार, अब उसकी सांस लेने की क्षमता में सुधार हो रहा है और वर्षों पुरानी स्वास्थ्य समस्याओं से भी आराम मिलने लगा है। महिला के पति ने बताया कि सालों तक अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद भी बीमारी का असली कारण नहीं मिल पाया था, ऐसे में पीबीएम अस्पताल और डॉ. गुंजन सोनी की टीम ने उनकी उम्मीदों को फिर से जिंदा कर दिया। उन्होंने पूरी मेडिकल टीम का आभार जताते हुए कहा कि उनकी पत्नी को मानो नया जीवन मिल गया है।
इन चिकित्साकर्मियों का रहा योगदान
इस सफल चिकित्सा प्रक्रिया में डॉ. गुंजन सोनी के साथ डॉ. अंकित, डॉ. वसुंधरा, डॉ. मनुदेव, डॉ. प्रवेश, डॉ. दिनेश और डॉ. विजय के अलावा नर्सिंग स्टाफ मंजू तथा हेल्पर विनोद का अहम योगदान रहा। पीबीएम अस्पताल की इस उपलब्धि को चिकित्सा क्षेत्र में एक उल्लेखनीय कामयाबी माना जा रहा है।
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