सुष्मिता देव के बाद क्या अब सायानी घोष की बारी? टीएमसी में बगावत का दायरा बढ़ा भारत एक घंटा पहले 2
पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद टीएमसी में टूट गहराती जा रही है। अभिनेत्री-सांसद सायानी घोष भी पार्टी के 20 बागी सांसदों की सूची में शामिल बताई जा रही हैं।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी अंदरूनी तौर पर बिखरती दिख रही है। पार्टी को लगातार झटके लग रहे हैं। आज जहां तेजतर्रार नेता सुष्मिता देव ने पार्टी और राज्यसभा दोनों से इस्तीफा सौंप दिया, वहीं अब चर्चा ममता की एक और मुखर नेता सायानी घोष को लेकर तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्टों की मानें तो सायानी घोष भी अब टीएमसी के 20 बागी सांसदों की फेहरिस्त में जुड़ गई हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने स्पीकर को पत्र लिखकर अलग बैठने और एनडीए को समर्थन देने की घोषणा की है। उनका इस तरह पार्टी से किनारा करना ममता बनर्जी और टीएमसी के लिए बड़ा आघात माना जा रहा है।

कौन हैं सायानी घोष?

सायानी घोष टीएमसी की मुखर नेताओं में गिनी जाती हैं। वे पश्चिम बंगाल की जानी-मानी बंगाली अभिनेत्री और गायिका होने के साथ-साथ टीएमसी की सांसद भी हैं। फिलहाल वे जादवपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। अब उन्होंने ममता बनर्जी की पार्टी छोड़कर बागी सांसदों के साथ जाने की बात कही है।

चर्चा और विवादों से रहा है पुराना नाता

लोकसभा में अपने बयानों और कविताओं के जरिए सत्ता पक्ष पर तंज कसने को लेकर सायानी अक्सर चर्चा में रहती हैं। बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान गाए गए उनके गीत 'मेरे दिल में है काबा और आंखों में मदीना' ने खूब सुर्खियां बटोरीं। इसी गाने को लेकर उन्हें भारी विवाद का सामना भी करना पड़ा था। बीजेपी नेताओं ने इस गीत के बहाने ममता बनर्जी को घेरा था और मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप लगाए थे।

आखिर क्यों बागी हुईं सायानी?

मिली जानकारी के मुताबिक सायानी घोष को पार्टी में अपना राजनीतिक भविष्य सुरक्षित नहीं लग रहा था। यह भी सामने आ रहा है कि चुनाव प्रचार के समय जब वे विपक्ष के निशाने पर थीं, तब पार्टी नेतृत्व ने खुलकर उनका बचाव नहीं किया। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि उस मुश्किल दौर में, जब कोई उनके साथ खड़ा नहीं था और उन्हें अपना प्रचार अभियान तय समय से पहले समेटने को कहा गया, उन्होंने खुद को अकेला महसूस किया। इसी बात से वे नाराज बताई जा रही हैं। हालांकि इस पूरे मामले पर न तो उनकी ओर से और न ही तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान आया है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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