मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज, बीजेपी के महेश केवट की निर्विरोध जीत लगभग पक्की मध्य प्रदेश एक महीने पहले 23
कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने से मध्य प्रदेश की तीसरी सीट पर बीजेपी के महेश केवट का निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा है। कांग्रेस ने कोई डमी उम्मीदवार खड़ा न करने के कारण अब उसके पास इस सीट के लिए कोई प्रत्याशी नहीं बचा है।

मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द हो जाने के बाद राज्य की सियासत में हलचल मच गई है। नामांकन निरस्त होते ही भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी महेश केवट की राह आसान हो गई है और उनका निर्विरोध राज्यसभा पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है। कांग्रेस ने इस फैसले के खिलाफ निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।

बदल गया पूरा चुनावी समीकरण

कांग्रेस उम्मीदवार का पर्चा खारिज होते ही पूरा चुनावी गणित पलट गया है। जिस सीट पर अब तक कड़े मुकाबले की संभावना जताई जा रही थी, वहां अब भाजपा की राह बेहद आसान दिखाई दे रही है। एक ओर कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है, तो दूसरी ओर भाजपा खेमे में उत्साह का माहौल है।

मीनाक्षी नटराजन के चुनावी मैदान से बाहर हो जाने के बाद राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशियों की संख्या भी घट गई है। पहले मैदान में भाजपा के तीन और कांग्रेस की ओर से राज्यसभा का एक उम्मीदवार था। अब मध्य प्रदेश से कांग्रेस का राज्यसभा के लिए कोई प्रत्याशी नहीं बचा है। पार्टी की पूरी रणनीति मीनाक्षी नटराजन के इर्द-गिर्द ही टिकी हुई थी, ऐसे में नामांकन रद्द होने से कांग्रेस की समूची चुनावी योजना प्रभावित हुई है।

कैसे तय हुई महेश केवट की जीत

मध्य प्रदेश विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के कुल 164 विधायक हैं, जबकि राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कुल 58 विधायकों की जरूरत होती है। इस लिहाज से भाजपा के दो उम्मीदवार आसानी से राज्यसभा पहुंच सकते थे। इसके बाद बचे हुए 48 विधायकों के दम पर भाजपा ने महेश केवट को मीनाक्षी नटराजन के सामने उतार दिया था।

तीसरी सीट के लिए 18 जून को राज्यसभा चुनाव होना था, लेकिन उससे पहले ही कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन रद्द हो गया। अब महेश केवट का निर्विरोध राज्यसभा पहुंचना तय माना जा रहा है। दूसरी तरफ इस तीसरी सीट के लिए कांग्रेस ने कोई डमी कैंडिडेट भी खड़ा नहीं किया था, यही वजह है कि अब इस सीट पर चुनाव होना मुश्किल नजर आ रहा है।

भाजपा की राह हुई आसान

राज्यसभा चुनाव के इस घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी निगाहें निर्वाचन प्रक्रिया के अगले चरण और अंतिम परिणामों पर टिकी हुई हैं। फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम से भाजपा की राह आसान हुई है और उसे इसका सीधा फायदा मिलता दिख रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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