भोपाल में 'धूम' फिल्म की तर्ज पर सक्रिय गैंग का पर्दाफाश, 11 लाख के मोबाइल और महंगी बाइक बरामद मध्य प्रदेश 2 महीने पहले 79
भोपाल पुलिस ने मोबाइल स्नैचिंग करने वाले एक ऐसे गिरोह को पकड़ा है जो तेज रफ्तार बाइकों पर सवार होकर वारदातों को अंजाम देता था। पुलिस ने आरोपियों के पास से 22 महंगे फोन और कई बाइकें जब्त की हैं।

फिल्मी अंदाज में वारदात

भोपाल के अयोध्या नगर थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो मशहूर फिल्म 'धूम' की तर्ज पर राहगीरों को अपना शिकार बनाता था। ये अपराधी तेज रफ्तार बाइकों पर सवार होकर आते थे और राह चलते लोगों के हाथ से मोबाइल छीनकर फरार हो जाते थे। पुलिस ने इस मामले में कुल 4 शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है।

लाखों का सामान जब्त

पुलिस की कार्रवाई में गिरोह के कब्जे से 22 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जिनकी कुल कीमत करीब 11 लाख रुपये बताई जा रही है। चोरी और लूट की वारदातों में इस्तेमाल की गई गाड़ियां भी जब्त की गई हैं, जिनमें KTM, पल्सर, R-15 और होंडा साइन बाइकें शामिल हैं।

जांच का दायरा और गिरफ्तारी

इस गिरोह का खुलासा 11 जून को फरियादी निखिल ओझा की शिकायत के बाद हुआ। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन का बारीकी से विश्लेषण किया, जिसके बाद आरोपियों तक पहुंचने में सफलता मिली। पकड़े गए आरोपियों की पहचान साहिल, फैज़ान, समीर और तालिब के रूप में हुई है। मुख्य आरोपी साहिल के पास से एक छुरी भी बरामद की गई है।

वारदात का तरीका

पूछताछ में पता चला कि ये आरोपी रोज शाम 7 बजे से रात 10 बजे के बीच सक्रिय हो जाते थे। पकड़े जाने से बचने के लिए वे अपनी बाइकों पर फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल करते थे। लूटने के बाद वे मोबाइल फोन को अमन कॉलोनी में रहने वाले सबदर ईरानी को बेच देते थे, जहां वे मात्र 3 से 4 हजार रुपये में महंगे फोन खपा दिया करते थे।

महंगे शौक बने कारण

एसीपी दिव्या झारिया ने बताया कि आरोपी कम समय में जल्दी पैसे कमाने और अपने महंगे शौक पूरे करने के लिए अपराध की दुनिया में आए थे। इन सभी का पिछला आपराधिक रिकॉर्ड भी है और राजधानी के विभिन्न थानों में इनके खिलाफ मारपीट, चोरी और आर्म्स एक्ट के तहत पहले से ही मामले दर्ज हैं। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य साथियों की तलाश में जुटी है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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