Bihar Sindoor Park: बिहार में सिंदूर की खेती का नया मॉडल, बनेंगे दो सिंदूर पार्क, जानें BAU का पूरा प्रोजेक्ट भारत एक महीने पहले 25
बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने सिंदूर की खेती को बढ़ावा देने के लिए भागलपुर के बाद अब राज्य की दो प्रमुख सैनिक छावनियों में सिंदूर पार्क विकसित करने की योजना बनाई है।

बिहार में सिंदूर की खेती का विस्तार

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) अब आम, लीची और परवल के बाद सिंदूर की खेती को बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। विश्वविद्यालय ने इसके लिए एक खास मॉडल तैयार किया है, जिसके तहत भागलपुर के रामसी गांव को सिंदूर ग्राम के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही, अब राज्य की दो सैनिक छावनियों में भी सिंदूर पार्क बनाए जाएंगे।

इन जगहों पर बनेंगे सिंदूर पार्क

BAU के कुलपति Dr. Duniya Ram Singh के अनुसार, इस योजना के पहले चरण में दो प्रमुख स्थानों का चयन किया गया है:

  • Officers Training Camp, Gaya
  • Danapur Cantonment

विश्वविद्यालय की टीम जल्द ही इन स्थलों का दौरा करेगी और इसके बाद पौधे लगाने का काम शुरू किया जाएगा। इसके लिए विश्वविद्यालय ने पहले ही पर्याप्त संख्या में पौधे तैयार कर लिए हैं।

खेती के लाभ और उपयोग

सिंदूर की खेती मुख्य रूप से Bixa orellana नामक पौधे के जरिए की जा रही है। इस खेती से जुड़े कुछ प्रमुख तथ्य इस प्रकार हैं:

  • प्राकृतिक उत्पाद: इससे मिलने वाला सिंदूर पूरी तरह जैविक और प्राकृतिक होता है।
  • अतिरिक्त उपयोग: सिंदूर के अलावा इस पौधे से लिपस्टिक और खाने योग्य रंग (Food grade color) भी तैयार किए जा सकते हैं।
  • स्वरोजगार: इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करना है।
  • मुनाफेदार खेती: किसान इसे अपनी जमीन की मेड़ पर या फिर पूरे बागान के रूप में लगाकर अच्छी कमाई कर सकते हैं।

किसानों के लिए वैज्ञानिक मदद

बिहार कृषि विश्वविद्यालय उन किसानों को पूरी सहायता प्रदान कर रहा है जो सिंदूर की खेती शुरू करना चाहते हैं। इच्छुक किसान विश्वविद्यालय से संपर्क कर सकते हैं, जहां उन्हें न केवल उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे, बल्कि खेती की तकनीक और वैज्ञानिक देखभाल के बारे में भी पूरी जानकारी दी जाएगी।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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