भागलपुर में चाहिए सुकून के पल, तो शाम ढले पहुंचिए बरारी रिवर फ्रंट, मिलेगा कुदरत का अनोखा नजारा बिहार 2 महीने पहले 82
भागलपुर का बरारी रिवर फ्रंट और सीढ़ी घाट शाम के वक्त प्रकृति प्रेमियों के लिए शांति और सुकून का बेहतरीन ठिकाना बन गया है, जहां 1905 में बना राधा-कृष्ण का अष्टकोणीय मंदिर भी आकर्षण का केंद्र है।

शाम होते ही हर किसी का मन कुछ पल सुकून के बिताने को करता है, लेकिन आज के शहरों में ऐसी जगहें बहुत कम बची हैं। आमतौर पर इंसान को असली शांति प्रकृति के बीच ही मिलती है। शहरी इलाकों में कहीं-कहीं पार्क जरूर नजर आ जाते हैं, मगर ज्यादातर जगहों पर अब सीमेंट, कांच और लोहे से बने मकानों का ‘कंक्रीट का जंगल’ ही फैला हुआ है। यही वजह है कि लोग प्रकृति की गोद की कमी महसूस करते रहते हैं।

हालांकि कुछ शहर ऐसे भी हैं, जो आज भी कुदरत के करीब होने का अहसास कराते हैं। भागलपुर शहर में भी एक ऐसी ही जगह मौजूद है, जहां आप प्रकृति के बीच कुछ शांत और सुकून भरे पल बिता सकते हैं। यहां सैंडिस कंपाउंड नाम का एक पार्क है, जहां लोग टहलने और शाम का वक्त गुजारने पहुंचते हैं।

बरारी रिवर फ्रंट की खूबसूरती

भागलपुर के बरारी रिवर फ्रंट की सुंदरता देखते ही बनती है। यहां प्रकृति का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। शाम के समय जब आप बरारी स्थित सीढ़ी घाट पहुंचते हैं, तो वहां बने राधा-कृष्ण के अष्टकोणीय मंदिर की खूबसूरती, गंगा की अविरल धारा में डॉल्फिन की अठखेलियां और डूबते सूरज का अनोखा दृश्य आपका मन मोह लेता है। अब यहां पर्यटकों की आमद भी बढ़ने लगी है।

यहां तक पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले बरारी आना होगा और उसके बाद वहां से सीढ़ी घाट का रुख करना होगा। शाम के वक्त इस जगह का नजारा बेहद खास हो जाता है।

क्यों खास है यह मंदिर

यहां का राधा-कृष्ण अष्टकोणीय मंदिर बेहद खास माना जाता है। कहा जाता है कि अभी पूरे भारत में इस तरह का दूसरा कोई मंदिर नहीं है। इसे जमींदार बाबू ब्रज ठाकुर ने बनवाया था और बताया जाता है कि इसका निर्माण 1905 में हुआ था।

हालांकि अब यह मंदिर जर्जर हालत में पहुंच गया है और अपने अच्छे दिनों की राह देख रहा है। इसके बावजूद इसकी भव्यता और खूबसूरती आज भी देखने वालों का मन मोह लेती है। यहां आकर आपको गहरी शांति का अनुभव होगा। माना जाता है कि अगर इस मंदिर का जीर्णोद्धार कर दिया जाए, तो यह एक बार फिर अपनी पुरानी रौनक के साथ जीवंत हो उठेगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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