छत्तीसगढ़
3 घंटे पहले
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विचारों
बदलाव की नई इबारत
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में हालात तेजी से बदल रहे हैं। जिन इलाकों में कभी नक्सलियों का खौफ इस कदर था कि लोग वोट डालने के बाद अपनी उंगलियों से स्याही मिटा दिया करते थे, वहां अब लोकतंत्र की नई सुबह दिखाई दे रही है। नक्सलवाद के प्रभाव वाले क्षेत्रों में अब लोग स्वयं आगे आकर अपना वोटर आईडी कार्ड बनवा रहे हैं।
पूवर्ती में 400 नए मतदाता
नक्सली कमांडर हिड़मा के गांव के रूप में पहचाने जाने वाले पूवर्ती में बदलाव की सबसे बड़ी तस्वीर देखने को मिली है। यहां बड़ी संख्या में लोग, विशेषकर महिलाएं, मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए कतारों में लग रही हैं। स्थानीय शिक्षकों की मदद से इन ग्रामीणों के दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं और जल्द ही गांव में 400 नए मतदाता जुड़ जाएंगे।
नक्सलवाद के अंत के बाद विकास की रफ्तार
बीते 31 मार्च को क्षेत्र में सशस्त्र नक्सलवाद के पूर्णतः खत्म होने की घोषणा के बाद से विकास कार्यों ने तेजी पकड़ी है। अब गांवों में पक्की सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है, नए स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र खोले जा रहे हैं। बुनियादी बदलावों की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- जगरगुंडा जैसे क्षेत्रों में नियमित बस सेवा की शुरुआत हुई है।
- दूरस्थ गांवों में बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
- बीजापुर और दंतेवाड़ा तक का सफर अब पहले से कहीं अधिक सुगम हो गया है।
- बुर्कापाल जैसे गांवों में सामाजिक कार्यक्रम और शादियां अब बिना किसी भय के आयोजित की जा रही हैं।
ग्रामीणों में बढ़ा विश्वास
ग्रामीणों का कहना है कि अब बाजार जाने या घर से बाहर निकलने में पहले जैसा डर महसूस नहीं होता। हालांकि, ताड़मेटला जैसे कुछ इलाकों में अभी भी बिजली और सड़कों जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होना बाकी है, फिर भी लोग इसे एक सकारात्मक बदलाव मान रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, अब उनकी प्राथमिकता आदिवासियों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है, ताकि उनकी स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए क्षेत्र का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके। सुरक्षा बलों के कैंप अभी भी तैनात हैं, ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे और विकास कार्य बिना किसी बाधा के जारी रहें।
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