उत्तराखंड
5 घंटे पहले
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विचारों
उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों के बीच बसा बागेश्वर जिला इन दिनों अपनी एक अनोखी पहल के लिए चर्चा में है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों और पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों के शौकीनों के लिए बागेश्वर जिला मुख्यालय में स्थित सरस मार्केट एक पसंदीदा ठिकाना बन गया है। यह बाजार न केवल स्थानीय लोगों की जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। पहाड़ों की शुद्ध आबोहवा में उगाई गई जैविक फसलों और पारंपरिक उत्पादों को एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराने वाला यह बाजार उत्तराखंड की समृद्ध कृषि संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश करता है।
पहाड़ी दालों और औषधीय उत्पादों का अनोखा ठिकाना
सरस मार्केट की सबसे बड़ी खासियत यहां मिलने वाले विशुद्ध पहाड़ी उत्पाद हैं। स्थानीय व्यापारी संतोषी देवी के अनुसार, इस बाजार में पहाड़ की पारंपरिक दालों की मांग हमेशा बहुत अधिक रहती है। यहां मिलने वाले मुख्य उत्पादों में शामिल हैं:
- भट्ट (पहाड़ी सोयाबीन)
- गहत (कुल्थ)
- राजमा की विभिन्न किस्में
- लोबिया और मांस (उड़द)
- सोयाबीन और मसूर
पहाड़ की पारंपरिक और प्राकृतिक खेती के जरिए तैयार होने वाली इन दालों को बेहद पौष्टिक माना जाता है। इनमें प्रोटीन और सूक्ष्म पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। स्थानीय स्तर पर उत्पादित होने के कारण इन दालों में किसी भी प्रकार के रासायनिक खाद या कीटनाशकों का प्रयोग नहीं होता, जिससे इनका स्वाद और गुणवत्ता दोनों ही लाजवाब होते हैं। यही कारण है कि स्थानीय खरीदारों के साथ-साथ सैलानी भी इन्हें बड़े चाव से खरीदते हैं।
पहाड़ी नमक की 15 किस्में और अनोखे मसाले
सरस मार्केट केवल दालों तक ही सीमित नहीं है। यहां उत्तराखंड के पारंपरिक भोजन का मुख्य हिस्सा माने जाने वाले पिसे हुए पहाड़ी नमक की करीब 15 किस्में उपलब्ध हैं। लहसुन, अदरक, भांग, पुदीना और विभिन्न जड़ी-बूटियों को मिलाकर तैयार किए जाने वाले इन नमकों का स्वाद हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है। इसके अलावा, पहाड़ का प्रसिद्ध तड़का मसाला यानी जाखिया भी यहां आसानी से मिल जाता है। विभिन्न प्रकार की स्थानीय जड़ी-बूटियां और जैविक उत्पाद भी इस बाजार की शोभा बढ़ाते हैं। इन पारंपरिक मसालों के उपयोग से भोजन का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है, और यही वजह है कि इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
हर रविवार सजता है विशेष ऑर्गेनिक बाजार
इस पूरे बाजार का सबसे खास दिन रविवार होता है। हर रविवार को यहां एक विशेष ऑर्गेनिक बाजार का आयोजन किया जाता है। रविवार की सुबह होते ही जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से किसान और स्थानीय उत्पादक अपनी ताजी उपज लेकर सीधे सरस मार्केट पहुंचते हैं। इस साप्ताहिक बाजार की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें उपभोक्ताओं को सीधे खेतों से आई ताजी सब्जियां, फल और अनाज खरीदने का मौका मिलता है। इस व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो जाती है, जिससे उपभोक्ताओं को वाजिब दाम पर शुद्ध सामान मिलता है और किसानों को भी अपनी मेहनत का सीधा और पूरा मुनाफा प्राप्त होता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय संस्कृति को संबल
सरस मार्केट जैसी पहल उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में एक गेम-चेंजर साबित हो रही है। स्थानीय कृषि उत्पादों को एक व्यवस्थित बाजार मिलने से किसानों को पारंपरिक खेती को जारी रखने का प्रोत्साहन मिल रहा है। छोटे उत्पादकों और महिला स्वयं सहायता समूहों को भी इसके जरिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल रही है। यह बाजार न केवल बागेश्वर की स्थानीय पहचान को स्थापित कर रहा है, बल्कि पहाड़ी खान-पान की ऐतिहासिक संस्कृति को आधुनिक दौर में भी सहेजकर रखने का एक सराहनीय प्रयास है। यदि इस तरह के बाजारों को राज्य के अन्य हिस्सों में भी बढ़ावा दिया जाए, तो यह उत्तराखंड के कृषि क्षेत्र के लिए एक क्रांतिकारी कदम हो सकता है।
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