उत्तर प्रदेश
3 महीने पहले
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गोबर से बदल रही है महिलाओं की आर्थिक स्थिति
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में जिला प्रशासन की एक अनूठी योजना स्थानीय महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं अब पशुओं के गोबर से खाद तैयार कर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं। प्रशासन ने इस पूरे काम को एक व्यवस्थित तरीके से लागू किया है, जिससे महिलाओं को सीधा लाभ मिल रहा है।
क्या है पूरा बिजनेस मॉडल
इस योजना के तहत महिलाएं स्थानीय गौशालाओं से बेहद कम कीमत पर गोबर खरीदती हैं। इसका गणित काफी सरल लेकिन प्रभावी है:
- महिलाएं गौशालाओं से सिर्फ 50 पैसे प्रति किलो की दर से गोबर खरीद रही हैं।
- इसके बाद वैज्ञानिक तरीके का इस्तेमाल करके केंचुआ खाद तैयार की जाती है।
- तैयार होने के बाद ग्राम पंचायतें इस खाद को सीधे महिलाओं से 10 रुपये प्रति किलो के दाम पर खरीद रही हैं।
वृक्षारोपण अभियान से मिला बड़ा मौका
जिले में आगामी बड़े वृक्षारोपण अभियान की तैयारी चल रही है, जिसके लिए खाद की भारी मांग है। प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान को सफल बनाने के लिए कुल 27 लाख किलो खाद की आवश्यकता है। यह पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन ने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को सौंपी है।
कितना होगा मुनाफा
इस विशेष प्रोजेक्ट के जरिए महिलाओं को अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने का बड़ा मौका मिला है। वृक्षारोपण के लिए खाद की आपूर्ति से इन महिलाओं को कुल 2.37 करोड़ रुपये की बंपर कमाई होने की पूरी उम्मीद है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद कर रही है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर महिला सशक्तिकरण का एक बेहतरीन उदाहरण भी पेश कर रही है।
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