उत्तर प्रदेश
एक महीने पहले
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VIP दर्शन पास जारी करने के लिए नई व्यवस्था
अयोध्या में प्रभु श्रीराम के मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सूचना है। राम मंदिर के वीआईपी (VIP) दर्शन पास जारी करने की प्रक्रिया में अब बड़ा बदलाव हुआ है। अब से वीआईपी और सुगम दर्शन पास जारी करने का आधिकारिक जिम्मा महंत दिनेंद्र दास को सौंपा गया है। इस नई जिम्मेदारी के तहत महंत दिनेंद्र दास की आईडी को आधिकारिक सिस्टम में सक्रिय कर दिया गया है, जिसके बाद अब उन्हीं की सिफारिश पर दर्शन पास बनाए जाएंगे।
पुराने अधिकारियों की एक्सेस बंद
इस प्रशासनिक बदलाव के साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कुछ वरिष्ठ सदस्यों की एक्सेस को डी-एक्टिवेट कर दिया गया है। अब पूर्व में जिम्मेदारी संभाल रहे चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की आईडी अब इस सिस्टम से काम नहीं करेंगी। ट्रस्ट ने यह कदम प्रशासनिक व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से उठाया है।
ट्रस्टी की सिफारिश है अनिवार्य
राम मंदिर में दर्शन की व्यवस्था को लेकर नियम पहले से तय हैं, जिसके अनुसार विशिष्ट और सुगम दर्शन पास पाने के लिए किसी ट्रस्टी की सिफारिश होना अनिवार्य है। मंदिर प्रशासन ने सभी ट्रस्टियों के नाम से अलग-अलग आईडी सिस्टम में जनरेट की हुई हैं। इन्हीं के माध्यम से श्रद्धालुओं के लिए विशेष दर्शन पास जारी किए जाते रहे हैं। हालांकि, इन पासों को जारी करने के अधिकार को लेकर हाल के समय में काफी चर्चाएं रही हैं।
पास जारी करने में हेराफेरी के गंभीर आरोप
हाल के दिनों में दर्शन पास जारी करने की व्यवस्था पर सवाल भी उठे थे। मीडिया रिपोर्टों और दावों के मुताबिक, राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में आरोपी टिन्नू यादव पर यह गंभीर आरोप लगा था कि उसने इस सिस्टम का अनुचित लाभ उठाया और सैकड़ों पास जारी करवा लिए थे। साथ ही, कुछ अन्य लोगों पर भी अनिल मिश्रा और चंपत राय के नाम का इस्तेमाल कर वीआईपी पास बनवाने और इसके जरिए लाखों की अवैध कमाई करने के आरोप लगे हैं, जिसकी वजह से इस पूरी प्रक्रिया को बदला गया है।
चढ़ावे की गिनती और स्टाफ का मुद्दा
मंदिर में चढ़ावे की गणना और आउटसोर्स कर्मचारियों के इस्तीफे को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। बैंक सूत्रों के अनुसार, हाल ही में 8 लोगों की गिरफ्तारी के बाद से कोई नई नियुक्ति नहीं हुई है, लेकिन काम पर कोई असर नहीं पड़ा है। अभी श्रद्धालुओं की भीड़ कम होने के कारण चढ़ावे की गणना सुचारू रूप से चल रही है। आउटसोर्स स्टाफ का मुख्य काम नोटों को व्यवस्थित करना होता है, जबकि वास्तविक गिनती केवल बैंक अधिकारी ही करते हैं। आगामी 22 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में इन तमाम व्यवस्थाओं और भविष्य की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की जाएगी ताकि दर्शन व्यवस्था और भी बेहतर हो सके।
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