अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामला: 40 दिनों में 70 बार हुई नकदी और गहनों की हेराफेरी, CCTV फुटेज से हुआ खुलासा उत्तर प्रदेश 2 महीने पहले 84
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के दान और गहनों की चोरी के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है, जहां 8 आरोपियों ने मिलकर 40 दिनों में 70 बार चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया। पुलिस ने अब तक करीब 79.84 लाख रुपये की बरामदगी की है।

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का बड़ा खुलासा

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित राम मंदिर में चढ़ावे के रूप में आने वाली राशि और कीमती सामानों की चोरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस पूरे मामले में आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने अदालत में ज्यूडिशियल रिमांड नोट पेश किया है, जिसमें मंदिर परिसर में चल रही हेराफेरी, दान पात्रों से पैसे निकालने और सीसीटीवी फुटेज के जरिए मिले सबूतों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए कुल 8 आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश किया और बताया कि प्रारंभिक जांच में इन सभी के विरुद्ध पुख्ता सबूत हाथ लगे हैं।

जेब में भरकर ले जाते थे नकदी और जेवर

पुलिस की जांच और कोर्ट में पेश किए गए विवरण के मुताबिक, आरोपी बड़ी चतुराई से चढ़ावे के पैसे और गहनों को पार करते थे। सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है कि टिन्नू यादव सहित अनुकल्प, अविनाश, करुणेश, मनीष यादव, लवकुश और रमा शंकर मिश्र जैसे आरोपी गिनती पूरी होने के बाद शेष बची राशि और आभूषणों को अपनी जेब में भरकर मंदिर परिसर से बाहर ले जाते थे।

रिकवरी और बरामदगी का आंकड़ा

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अधिकारी ने अदालत को जानकारी दी है कि अब तक 7 आरोपियों की निशानदेही पर कुल 79.84 लाख रुपये की भारी भरकम राशि बरामद की जा चुकी है। हालांकि, जांच में यह भी सामने आया है कि 8वें आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के पास से फिलहाल कोई रिकवरी नहीं हो पाई है।

चाबियों का दुरुपयोग और मिलीभगत

इस पूरी चोरी की घटना में टिन्नू यादव की भूमिका बेहद संदिग्ध रही है, क्योंकि कैश काउंटर्स, दान पात्रों और नोट गिनने वाले हॉल की मुख्य चाबियां उसी के पास रहती थीं। इसके अलावा आरोपी अनुकल्प मिश्रा पर वाउचर तैयार करने की प्रक्रिया में बड़ी गड़बड़ी करने का आरोप लगा है। उसने अपने बहनोई लवकुश मिश्रा के साथ मिलकर मिलीभगत की, जिसके बाद पुलिस ने लवकुश के घर से करीब 10 लाख रुपये बरामद किए हैं।

40 दिनों में 70 बार वारदात

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि कई आरोपियों को केवल सिफारिश के आधार पर नोट गिनने का काम सौंपा गया था। काम खत्म होने के बाद इनकी तलाशी लेने का कोई प्रावधान नहीं था, जिसका फायदा आरोपियों ने उठाया। SIT ने 27 अप्रैल से 5 जून 2026 तक की सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच की, जिसमें करीब 70 बार चोरी या गबन जैसी आपराधिक गतिविधियां रिकॉर्ड हुई हैं।

आरोपी तीन दिन के लिए भेजे गए जेल

SIT की शुरुआती पड़ताल में दान की गिनती की प्रक्रिया, रिकॉर्ड प्रबंधन, सीसीटीवी कवरेज और आंतरिक निगरानी व्यवस्था में भारी खामियां पाई गई हैं। फिलहाल ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने सभी 8 आरोपियों को तीन दिन के लिए यानी रविवार तक जेल भेजने का आदेश दिया है। यदि पुलिस को आगे की पूछताछ के लिए हिरासत की आवश्यकता पड़ती है, तो सोमवार को रेगुलर जज की कोर्ट में इसके लिए याचिका दाखिल की जाएगी।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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