छत्रपति संभाजीनगर दर्दनाक हादसा: कुणाल चंदगुडे मामले में आईफोन वाली बात निकली अफवाह, पुलिस की जांच में हुआ ये खुलासा महाराष्ट्र एक घंटा पहले 5
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की पहाड़ी से गिरने से हुई मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। पुलिस ने साफ किया है कि इस त्रासदी के पीछे आईफोन की कोई भूमिका नहीं थी, बल्कि परिवार लंबे समय से मानसिक तनाव और आपसी कलह से जूझ रहा था।

मामले की सच्चाई और पुलिस का रुख

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले के तिसगांव इलाके में हुई हृदय विदारक घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। एक ही परिवार के तीन सदस्यों के पहाड़ी से गिरने के कारण हुई मौत के बाद से ही लगातार कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। शुरुआत में यह चर्चा थी कि 19 वर्षीय कुणाल चंदगुडे की मौत की वजह आईफोन की मांग थी, जिस पर पिता और पुत्र के बीच विवाद हुआ था। हालांकि, अब डीसीपी रत्नाकर नवल ने इस मामले में एक बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने आधिकारिक तौर पर साफ किया है कि पुलिस की अब तक की शुरुआती जांच में आईफोन का आत्महत्या या मौत की घटना से कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया है।

पुलिस क्या है पुलिस का कहना

इस दुखद घटना के बारे में जानकारी देते हुए डीसीपी रत्नाकर नवल ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के तुरंत बाद 112 नंबर पर फोन आया था। सूचना मिलते ही पुलिस टीम और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। दमकल विभाग और एम्बुलेंस की मदद से बचाव अभियान चलाने की कोशिश की गई, लेकिन दुर्भाग्यवश किसी को भी जीवित नहीं बचाया जा सका। डीसीपी के अनुसार, प्राथमिक साक्ष्यों से यह स्पष्ट है कि युवक अत्यधिक मानसिक तनाव और अवसाद से गुजर रहा था। फिलहाल, परिवार का कोई सदस्य जीवित न होने के कारण घटना के कारणों की परतें खोलने में समय लग सकता है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आईफोन वाली बात सिर्फ एक अफवाह है और मामले की गहराई से जांच अभी जारी है।

प्रत्यक्षदर्शियों और रिश्तेदारों के दावों में क्या है सच

घटना के प्रत्यक्षदर्शी और पूर्व सरपंच संजय जाधव ने पुलिस के दावों का समर्थन किया है। उन्होंने बताया कि कुणाल के पास पहले से ही आईफोन मौजूद था, इसलिए उसे पाने के लिए झगड़े वाली बात में कोई दम नहीं दिखता। घटना के समय वे स्वयं वहां मौजूद थे और उन्होंने कुणाल को नीचे उतरने के लिए लगातार समझाने की कोशिश की थी, लेकिन कुणाल किसी की भी बात सुनने की स्थिति में नहीं था। दूसरी ओर, चंदगुडे परिवार के रिश्तेदारों ने बताया कि घर के हालात काफी समय से ठीक नहीं थे। पिता मुरलीधर चंदगुडे एक ट्रक ड्राइवर थे और काम के सिलसिले में अधिकांश समय घर से बाहर ही रहते थे। परिवार में बड़ी त्रासदी तब आई जब छह साल पहले उनके बड़े बेटे की बीमारी के कारण असमय मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद से ही घर में कलह का माहौल बन गया था, जिसका सीधा असर कुणाल पर पड़ रहा था।

मेरी जिंदगी का कोई मतलब नहीं: कुणाल के आखिरी शब्द

खावड्या डूंगर पर खड़े होकर कुणाल ने अपने जीवन की हताशा को इन शब्दों में बयां किया था, 'मां, मेरी कोई नहीं सुनता। अब जीने की कोई इच्छा नहीं। मेरी जिंदगी का कोई अर्थ नहीं। मेरा कुछ नहीं होगा।' 19 वर्षीय कुणाल का यह दर्द भरा बयान उसके मन में चल रही गहरी पीड़ा को दर्शाता है। 10वीं की परीक्षा में 92 प्रतिशत अंक हासिल करने वाला यह मेधावी युवक जिंदगी की जद्दोजहद में हार गया। मात्र पांच सेकंड के घटनाक्रम में एक पूरा परिवार उजड़ गया। जब कुणाल पहाड़ी के किनारे पर था, तो उसे बचाने के चक्कर में पिता मुरलीधर का संतुलन बिगड़ गया और वे 150 से 200 फीट गहरी खाई में जा गिरे। अपने पति और बेटे को गिरता देख मां संगीता चंदगुडे ने भी वही कदम उठा लिया, जिससे मौके पर ही तीनों की मौत हो गई।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और कलह के कारण

चंदगुडे परिवार मूल रूप से अंबड तालुका के धनगर पिंपलवाड़ी का रहने वाला था, लेकिन पिछले 18 वर्षों से वे शहर के झालता फाटा इलाके में रह रहे थे। आर्थिक तंगी और पिता के काम के कारण घर से लगातार दूर रहने से कुणाल पर किसी भी प्रकार का नियंत्रण नहीं रह गया था। रिश्तेदारों का कहना है कि पिता और पुत्र के बीच संबंध काफी समय से सामान्य नहीं थे। पिता दो दिन पहले ही काम से घर लौटे थे, जिसके बाद दोनों के बीच कहा-सुनी हुई थी। कुणाल को शिकायत थी कि पिता उसे पर्याप्त जेब खर्च नहीं देते थे। मोबाइल की बकाया किस्तों और अन्य छोटी-मोटी बातों को लेकर अक्सर घर में तनाव बना रहता था। शुक्रवार को इसी तनाव के बाद कुणाल घर से निकल गया था और खावड्या डूंगर पहुंच गया था, जहां उसे मनाने पहुंचे माता-पिता भी काल के गाल में समा गए।

बचाव की नाकाम कोशिशें

घटना के समय मां संगीता ने हर मुमकिन कोशिश की कि उनका बेटा मान जाए। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि पिता से कोई विवाद है, तो वे घर छोड़कर कहीं और रहने चले जाएंगे। मां ने कुणाल को भरोसा दिलाने के लिए अपना मंगलसूत्र भी उतारकर फेंक दिया था। पुलिस और आसपास के लोग भी उसे समझाने का प्रयास कर रहे थे। इसी बीच पिता मुरलीधर ने उसे पहाड़ी के किनारे से खींचने की कोशिश की, जिससे दोनों का संतुलन बिगड़ गया और वे खाई में गिर गए। यह दृश्य इतना भयानक था कि मां संगीता भी खुद को रोक नहीं पाईं। यह पूरी घटना एक परिवार के बिखरने की दुखद कहानी बनकर रह गई है।

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देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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