प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों की कुर्सी पर संकट, गिरफ्तारी पर पद छोड़ने का कानून जल्द भारत 2 महीने पहले 69
संयुक्त संसदीय समिति जल्द ही एक नए संविधान संशोधन विधेयक पर अपनी रिपोर्ट सौंपने जा रही है, जिसके तहत गंभीर अपराधों में गिरफ्तार होने पर बड़े नेताओं को पद से हटना पड़ सकता है।

गिरफ्तारी पर पद छोड़ने का नया कानून

देश के प्रधानमंत्री, किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के लिए एक नया नियम लागू होने की तैयारी है। यदि किसी गंभीर आपराधिक मामले में इन्हें गिरफ्तार किया जाता है, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। इस प्रावधान से जुड़ा 130वें संविधान संशोधन विधेयक पर विचार करने वाली संयुक्त संसदीय समिति (JPC) 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर स्वीकार करने वाली है। सूत्रों की मानें तो समिति ने विधेयक के हर पहलू पर लंबी मंत्रणा कर ली है और अब इसे मंजूरी देने की प्रक्रिया अंतिम चरणों में है।

पद से स्वतः हटने का प्रावधान

इस प्रस्तावित विधेयक का सबसे चर्चा का विषय इसके वे नियम हैं जो सीधे जनप्रतिनिधियों की कुर्सी से जुड़े हैं। यदि किसी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी भी मंत्री को गंभीर अपराधों के लिए गिरफ्तार किया जाता है और वे 30 दिनों तक लगातार पुलिस या न्यायिक हिरासत में रहते हैं, तो उन्हें स्वतः ही अपने पद से मुक्त माना जा सकता है। इस नियम के पीछे का तर्क यह है कि कार्यपालिका के उच्च पदों पर बैठे व्यक्ति यदि लंबे समय तक जेल में रहते हैं, तो वे अपनी जिम्मेदारी निभाने में सक्षम नहीं रहते।

संसद के मॉनसून सत्र में हो सकता है पेश

अगर 17 जुलाई को समिति अपनी रिपोर्ट को हरी झंडी दे देती है, तो केंद्र सरकार इसे संसद के आगामी मॉनसून सत्र में पेश करने की योजना बना रही है। संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो सकता है। यह मामला संवैधानिक पदों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही से जुड़ा है, इसलिए संसद के पटल पर इस पर काफी गरमागरम बहस होने के पूरे आसार हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी नोकझोंक देखने को मिल सकती है।

सत्र की अवधि और तैयारी

संसदीय कार्य संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति (CCPA) द्वारा संसद सत्र की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन इसके 20 जुलाई से शुरू होकर तीन सप्ताह तक चलने के संकेत मिल रहे हैं। वैसे तो आमतौर पर मॉनसून और शीतकालीन सत्र चार सप्ताह तक चलते हैं और इनमें करीब 20 बैठकें आयोजित की जाती हैं, लेकिन पहले भी कई बार कम अवधि के सत्र बुलाए गए हैं।

राजनीतिक समीकरण और भाजपा की स्थिति

यह सत्र भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल ही में असम, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों में पार्टी और उसके सहयोगियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। इनमें पश्चिम बंगाल की जीत को भाजपा के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार पार्टी ने वहां अपनी पैठ मजबूत की है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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