धर्म
एक घंटा पहले
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विचारों
कठिन तपस्या और बाबा श्याम के प्रति अगाध श्रद्धा
आध्यात्मिक जगत में भक्ति और संकल्प की शक्ति के कई उदाहरण मिलते हैं, लेकिन हरियाणा के झज्जर जिले की रहने वाली रेणु हरिवंशी का संकल्प कुछ अलग ही स्तर का है। रेणु इस समय खाटूश्याम जी के दर्शन के लिए एक बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण दंडवत यात्रा कर रही हैं। यह कोई सामान्य पदयात्रा नहीं है। इस यात्रा में वे कुछ कदम चलने के बाद जमीन पर दंडवत लेटकर प्रणाम करती हैं और फिर उठकर आगे बढ़ती हैं। 273 किलोमीटर की यह लंबी दूरी उनके दृढ़ निश्चय के सामने छोटी जान पड़ती है। घुटनों का दर्द और शरीर की थकान को दरकिनार कर उन्होंने बाबा श्याम तक पहुंचने का जो बीड़ा उठाया है, वह लोगों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।
5 जुलाई से शुरू हुआ सफर
रेणु हरिवंशी ने अपनी इस यात्रा की शुरुआत हरियाणा के सुबाणा गांव से 5 जुलाई को की थी। उनके साथ लगभग 15 लोगों का एक समूह भी चल रहा है जो इस पूरी यात्रा के दौरान उनकी मदद करता है। यात्रा के दौरान उनका शरीर बार-बार जमीन को स्पर्श करता है और वे इसी कठिन प्रक्रिया को दोहराते हुए राजस्थान की सीमा में प्रवेश कर चुकी हैं। जहां आम आदमी के लिए कुछ किलोमीटर की सामान्य पैदल यात्रा करना भी थका देने वाला होता है, वहीं रेणु की हर एक चाल दंडवत प्रणाम के साथ पूरी होती है। यह उनकी बाबा श्याम के प्रति गहरी आस्था ही है कि इतनी भीषण गर्मी और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद वे अपने लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ती जा रही हैं।
नौ साल से नहीं किया अन्न ग्रहण
रेणु की जीवनशैली भी उनके धार्मिक संकल्प की तरह ही अनूठी है। उनके अनुसार, उन्होंने वर्ष 2018 से अन्न का पूरी तरह त्याग कर रखा है। वे पिछले 9 सालों से भोजन के स्थान पर केवल नारियल पानी पीकर ही जीवन निर्वाह कर रही हैं। इसी कालखंड में उन्होंने अपनी एएनएम (ANM) की सरकारी नौकरी को भी अलविदा कह दिया था। उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा धार्मिक सेवा और आध्यात्मिक संकल्पों के नाम कर दिया है। उनके पति सिद्धार्थ मल्हान, जो एक सहकारी बैंक में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं, इस कठिन यात्रा में साये की तरह उनके साथ खड़े हैं। परिवार के सामान्य जीवन के बीच रहते हुए भी रेणु ने जिस प्रकार से खुद को अध्यात्म और जनसेवा के लिए समर्पित किया है, वह प्रेरणादायक है।
पिछली यात्राओं का अनुभव
सिद्धार्थ मल्हान बताते हैं कि रेणु का यह कोई पहला संकल्प नहीं है। इससे पहले भी उन्होंने अपनी श्रद्धा का परिचय देते हुए 237 किलोमीटर की दंडवत यात्रा पूरी की थी। साल 2023 में संपन्न हुई उस यात्रा में उन्होंने लगभग 67 दिन का समय लिया था। उस समय भी उन्होंने यात्रा के दौरान किसी गद्दे या आराम की चीजों का उपयोग नहीं किया था। वर्तमान में जारी 273 किलोमीटर की यह दूसरी और लंबी यात्रा भी वे बिना गद्दे के ही पूरी कर रही हैं। इसके अतिरिक्त, वे ब्रज चौरासी कोस की चार पैदल यात्राएं भी पूरी कर चुकी हैं, जो उनकी सहनशक्ति और समर्पण को दर्शाता है।
धार्मिक और सामाजिक संदेश
रेणु का मानना है कि उनकी यात्रा केवल भगवान के दर्शन के लिए नहीं है। इस यात्रा के माध्यम से वे समाज को गौ संरक्षण और सनातन धर्म के प्रति जागरूक करने का संदेश दे रही हैं। उनका एक मुख्य संकल्प गौ माता को 'राष्ट्र माता' का दर्जा दिलाने की मांग को लोगों तक पहुंचाना भी है। जब वे सड़क से गुजरती हैं, तो रास्ते में कई लोग उनके जज्बे को देखकर रुक जाते हैं, उनका स्वागत करते हैं और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। हालांकि, सम्मान और स्वागत के बाद वे फिर से अपने उसी दंडवत क्रम में लग जाती हैं और आगे बढ़ चलती हैं।
खाटू के बाद सालासर तक का इरादा
वर्तमान में रेणु का लक्ष्य खाटूश्याम जी के दरबार में पहुंचना है। उनका कहना है कि नवरात्रों के आसपास वे बाबा श्याम के चरणों में अपनी हाजिरी लगाने की उम्मीद रखती हैं। लेकिन उनकी भक्ति का सफर केवल खाटू पहुंचने पर समाप्त नहीं होगा। खाटूश्याम जी के दर्शन करने के बाद उनकी योजना आगे चलकर सालासर बालाजी के लिए भी पैदल यात्रा करने की है। 273 किलोमीटर की यह यात्रा महज दूरी तय करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह रेणु के उस वर्षों पुराने संकल्प को पूरा करने की कड़ी है, जिसे उन्होंने अपने जीवन का मुख्य उद्देश्य बना लिया है। उनके साथ चल रहे सहयोगी समूह का कहना है कि उनकी हर दंडवत के साथ आस्था का एक नया अध्याय जुड़ता जा रहा है, जिसे लोग विस्मय और श्रद्धा के साथ देख रहे हैं।
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