अमेरिकी संविधान और तीसरी बार राष्ट्रपति बनने की चाह: डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने फिर गर्म की सियासत विश्व एक घंटा पहले 3
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर तीसरे कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ने की अपनी इच्छा जाहिर कर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। यद्यपि वह खुद मानते हैं कि कानून उन्हें ऐसा करने से रोकता है, फिर भी उन्होंने 2020 के चुनाव में कथित गड़बड़ी का हवाला देते हुए अपनी बात रखी है।

तीसरे कार्यकाल को लेकर डोनाल्ड ट्रंप का नया बयान

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश का राष्ट्रपति पद तीसरी बार संभालने के अपने अधिकार पर एक बार फिर नई बहस छेड़ दी है। सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआत में यह स्वीकार किया कि देश का मौजूदा कानून उन्हें फिर से चुनाव मैदान में उतरने की अनुमति नहीं देता है। हालांकि, इसके कुछ ही पलों बाद उन्होंने वर्ष 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में कथित रूप से हुई धांधली का जिक्र करते हुए तीसरे कार्यकाल के लिए अपना दावा पेश कर दिया। गौर करने वाली बात यह है कि वर्ष 2020 के चुनाव में व्यापक स्तर पर धांधली होने के उनके दावों को साबित करने के लिए कोई भी सबूत सामने नहीं आया है।

'कानून के बारे में 100 फीसदी निश्चित नहीं'

अपने विचार व्यक्त करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनका मानना है कि कानून उन्हें दोबारा चुनाव लड़ने से रोकता है, हालांकि वह इसे लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि कानून कहता है कि मुझे फिर से चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं है। मैं इस बारे में 100 फीसदी निश्चित नहीं हूं, लेकिन मुझे लगता है कि कानून यही कहता है।" इसके तुरंत बाद वर्ष 2020 के मतदान का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया, "उन्होंने चुनाव में धांधली की थी।"

अमेरिकी संविधान का 22वां संशोधन और चुनावी नियम

अमेरिकी संवैधानिक व्यवस्था की बात करें तो वहां का 22वां संशोधन किसी भी व्यक्ति को दो बार से अधिक राष्ट्रपति चुने जाने से स्पष्ट रूप से रोकता है। इस नियम के तहत कोई भी नागरिक दो कार्यकाल पूरे करने के बाद तीसरी बार राष्ट्रपति पद पर आसीन नहीं हो सकता। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बार-बार तीसरे कार्यकाल की बात कहे जाने के बाद यह चर्चा शुरू हो गई है कि यह नियम क्यों बना था और क्या संविधान में संशोधन के जरिए कोई नया रास्ता निकाला जा सकता है।

मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले आई राजनीतिक बयानबाजी

अमेरिकी राजनीति में यह नया घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब देश में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों की तैयारियां जोरों पर हैं। इन चुनावों को बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इसके जरिए रिपब्लिकन पार्टी अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में अपना वर्चस्व और नियंत्रण बरकरार रखने का प्रयास कर रही है। मतदान की तारीख से ठीक पहले आए डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान ने देश का राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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