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एक घंटा पहले
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अमेरिका ने अपनी सैन्य रणनीति से जुड़ा एक बड़ा कदम उठाते हुए US इंडो-पैसेफिक कमांड (USINDOPACOM) का नाम दोबारा बदल दिया है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के पहले कार्यकाल में जिस कमांड के नाम में बदलाव कर भारत की बढ़ती रणनीतिक अहमियत का संदेश दिया गया था, उसे अब फिर से US Pacific Command (USPACOM) कर दिया गया है। इस फैसले के बाद यह सवाल खड़ा हो रहा है कि कहीं यह पाकिस्तान को खुश करने की कोशिश तो नहीं, क्योंकि ईरान युद्ध के बाद इस्लामाबाद और वॉशिंगटन के बीच नजदीकियां बढ़ी हैं। हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस तरह की किसी भी वजह से इनकार करते हुए साफ कहा है कि यह केवल नाम का बदलाव है और मिशन, जिम्मेदारियों तथा रणनीति में कोई फर्क नहीं आएगा।
अमेरिकी रक्षा विभाग ने बुधवार को घोषणा की कि US इंडो-पैसेफिक कमांड का नाम बदलकर एक बार फिर US पैसेफिक कमांड किया जा रहा है। पेंटागन के मुताबिक, यह निर्णय 1947 से चली आ रही सैन्य विरासत को दोबारा सम्मान देने के लिए लिया गया है। आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह कमांड अमेरिका की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी यूनिफाइड कॉम्बैट कमांड रही है तथा दूसरे विश्व युद्ध के बाद एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था खड़ी करने में इसकी अहम भूमिका रही है।
आखिर क्यों बदला गया नाम?
अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, Pacific Command नाम 1 जनवरी 1947 से इस्तेमाल में था। साल 2018 में ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान इसका नाम बदलकर Indo-Pacific Command कर दिया था। अब ट्रंप सरकार का तर्क है कि पुराने नाम की वापसी से कमांड की ऐतिहासिक पहचान और सैन्य विरासत को फिर से मजबूती मिलेगी।
2018 में अमेरिका ने क्या कहा था?
मई 2018 में तत्कालीन अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने पैसेफिक कमांड का नाम बदलकर Indo-Pacific Command किया था। उस समय उन्होंने कहा था कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर अब पहले की तुलना में कहीं अधिक आपस में जुड़ चुके हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया था कि भारत, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम साझेदार बन चुका है, और इसी वजह से कमांड के नाम में 'इंडो' शब्द जोड़ा गया था।
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