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एक घंटा पहले
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अमेरिका में छात्रों की सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल
अमेरिका के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों से लगातार सामने आ रही खौफनाक घटनाओं ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। न्यूयॉर्क के कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में हाल ही में हुए गैंगरेप के मामले की यादें अभी धुंधली भी नहीं हुई थीं कि अब शिकागो यूनिवर्सिटी से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शिक्षा जगत को शर्मसार कर दिया है। शिकागो स्थित यूनिवर्सिटी के एक फ्रैट हाउस में आयोजित पार्टी के दौरान एक 21 साल की युवती के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। जब एक मासूम लड़की के साथ बाथरूम के अंदर हैवानियत चल रही थी, तब बाहर खड़े दरिंदे न केवल इस तमाशे का आनंद ले रहे थे, बल्कि बेशर्मी से अपनी बारी का इंतजार भी कर रहे थे।
इंस्टाग्राम से पार्टी का आमंत्रण और भयावह रात
मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस शिकायतों के अनुसार, यह घटना शिकागो यूनिवर्सिटी के अल्फा एप्सिलॉन पाई फ्रैटर्निटी हाउस में घटी। यह संस्थान करीब 18,000 छात्रों वाला एक नामी रिसर्च सेंटर है। रविवार तड़के यहाँ एक पार्टी का आयोजन किया गया था। शिकायतकर्ता पीड़िता इस यूनिवर्सिटी की छात्रा नहीं है। वह अपनी सहेली मिया लारा और एक अन्य साथी के साथ इस पार्टी में शामिल होने पहुंची थी। इस पार्टी का विज्ञापन उन्होंने फ्रैटर्निटी के आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज पर देखा था। पार्टी में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन ड्रिंक्स लेने के कुछ देर बाद ही पीड़िता की तबीयत बिगड़ने लगी और वह अपनी सहेलियों की नजरों से ओझल हो गई।
बाथरूम के बाहर खड़ी थी बेशर्म भीड़
काफी देर तक जब अपनी दोस्त को न पाकर मिया लारा ने उसे पूरे घर में खोजना शुरू किया, तो वह बेसमेंट की तरफ पहुंची। वहां का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए। उसने पुलिस को बताया कि तहखाने में स्थित एक बंद बाथरूम के बाहर लड़कों की एक भीड़ जमा थी। ये लड़के मदद करने के बजाय उस बंद दरवाजे के बाहर खड़े होकर हूटिंग कर रहे थे। वे बेहद घटिया और ओछी भाषा का प्रयोग करते हुए चिल्ला रहे थे कि 'अब मेरी बारी कब आएगी' और 'मुझे भी अंदर जाना है'। इस अमानवीय व्यवहार ने साबित कर दिया कि वहां मौजूद भीड़ किसी बड़ी घटना का बेसब्री से इंतजार कर रही थी।
दरवाजे के भीतर का खौफनाक मंजर
मिया लारा ने हिम्मत जुटाकर भीड़ को चीरते हुए बाथरूम का दरवाजा खोला। अंदर का दृश्य रूह कंपा देने वाला था। उसकी सहेली बाथरूम के फर्श पर दीवार के सहारे बेसुध बैठी थी और उसके कपड़े फटे हुए थे। वहां मौजूद एक शख्स, जो कथित तौर पर यूनिवर्सिटी का छात्र भी नहीं था, उसने पीड़िता के हाथों की कलाई मजबूती से पकड़ रखी थी। पीड़िता रोते हुए मदद के लिए चीख रही थी और कह रही थी कि 'इसे रोको' और 'मुझे यहां से बाहर निकालो'। जब मिया ने उस व्यक्ति को पकड़ने की कोशिश की और उस पर हमला करने का आरोप लगाया, तो उस आरोपी ने पूरी ढिठाई के साथ दावा किया कि पीड़िता खुद ऐसा चाहती थी। अंततः भारी विरोध और हंगामे के बाद वह दरिंदा वहां से फरार हो गया।
यूनिवर्सिटी और फ्रैटर्निटी की लीपापोती
घटना के सामने आते ही यूनिवर्सिटी प्रशासन और फ्रैटर्निटी संगठन अपनी छवि सुधारने में जुट गए हैं। फ्रैटर्निटी के नेशनल ऑर्गनाइजेशन के प्रवक्ता जोनाथन पियर्स ने एक आधिकारिक बयान जारी कर घटना से पल्ला झाड़ लिया है। उन्होंने दावा किया कि उनके किसी भी सदस्य ने इस हमले में न तो भागीदारी की और न ही इसे बढ़ावा दिया। उनका तर्क है कि जैसे ही सदस्यों को इस अनहोनी की भनक लगी, उन्होंने पार्टी तुरंत बंद करवा दी। संगठन का दावा है कि मुख्य आरोपी को घर से निकाल दिया गया था और उसके भागने के फुटेज सीसीटीवी में दर्ज हैं। दूसरी ओर, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने यह पुष्टि की है कि मुख्य संदिग्ध उनका छात्र नहीं है और उसका संस्थान से कोई लेना-देना नहीं है। फिलहाल पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अज्ञात आरोपी के खिलाफ जांच तेज कर दी है और पीड़िता का अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया है।
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी और अन्य संस्थानों के जख्म
शिकागो की इस दर्दनाक घटना ने 'कॉर्नेल 7' गैंगरेप केस की यादें ताजा कर दी हैं। पिछले साल अक्टूबर 2024 में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के एक फ्रैट हाउस में एक छात्रा को नशीला पदार्थ देकर सामूहिक दुष्कर्म का शिकार बनाया गया था। उस मामले में लंबी जद्दोजहद के बाद ही यूनिवर्सिटी ने फ्रैटर्निटी पार्टियों पर बैन लगाने का निर्णय लिया था। इसी तरह, यूनिवर्सिटी ऑफ एरिज़ोना में भी लगातार सामने आए मारपीट और उत्पीड़न के मामलों के कारण फ्रैट गतिविधियों को निलंबित करना पड़ा था। अमेरिका के बड़े और महंगे शिक्षण संस्थानों में इन घटनाओं का लगातार सामने आना इस बात का प्रतीक है कि आधुनिकता और बड़ी डिग्रियों की चकाचौंध के पीछे कितनी गहरी और घटिया मानसिकता पनप रही है।
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