अंतरिक्ष में परमाणु युद्ध की आहट, रूस और चीन की साजिश से सहमा अमेरिका विश्व एक घंटा पहले 5
रूस और चीन द्वारा अंतरिक्ष में विकसित किए जा रहे अत्याधुनिक हथियार अमेरिका के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गए हैं। पेंटागन की हालिया रिपोर्टों में चेतावनी दी गई है कि अंतरिक्ष में होने वाला कोई भी परमाणु धमाका आधुनिक विश्व की संचार व्यवस्था को पूरी तरह से नष्ट कर सकता है।

अंतरिक्ष में हथियारों की दौड़ और बदलता युद्ध का स्वरूप

अब तक दुनिया ने युद्ध के मैदान में टैंकों की गर्जना और आसमान में लड़ाकू विमानों की दहाड़ देखी है, लेकिन आने वाले समय में युद्ध की बिसात धरती के ऊपर अंतरिक्ष में बिछ चुकी है। अमेरिका के दो सबसे प्रमुख प्रतिद्वंद्वी, रूस और चीन ने ऐसे उन्नत और घातक हथियार तैयार कर लिए हैं, जिसने व्हाइट हाउस और पेंटागन की नींद उड़ा दी है। रूस द्वारा अंतरिक्ष में परमाणु हथियारों को तैनात करने की योजना और चीन की लेजर तकनीक तथा रोबोटिक आर्म्स वाली क्षमताएं इतनी खतरनाक हैं कि एक झटके में दुश्मन देश को पूरी तरह से अंधा और बहरा बनाया जा सकता है।

युद्ध में अंतरिक्ष का महत्व और खतरे

आधुनिक सैन्य प्रणालियों के लिए अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स किसी रीढ़ की हड्डी की तरह हैं। अमेरिकी सेना अपने हर छोटे और बड़े सैन्य अभियान, कम्युनिकेशन, नेविगेशन और मिसाइल ट्रैकिंग के लिए पूरी तरह से इन्हीं उपग्रहों पर निर्भर रहती है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के विशेषज्ञ क्लेटन स्वोप का मानना है कि यदि कोई दुश्मन देश अंतरिक्ष में मौजूद इन क्षमताओं को जाम या नष्ट कर देता है, तो अमेरिका के लिए किसी भी युद्ध को लड़ना लगभग असंभव हो जाएगा। रूस और चीन इस कमजोरी को बखूबी समझते हैं और वे युद्ध की शुरुआत में ही अमेरिकी सैटेलाइट्स को अपना मुख्य निशाना बनाना चाहते हैं ताकि अमेरिकी सेना को अपंग किया जा सके। यह खतरा केवल सेना तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे बैंक सर्वर, जीपीएस नेविगेशन, मौसम की जानकारी और बिजली ग्रिड जैसी सामान्य जनजीवन की सेवाएं भी ठप हो सकती हैं।

चीन का स्पेस वॉर प्लान और घातक तकनीक

चीन ने अंतरिक्ष में अपनी सर्वोच्चता कायम करने के लिए ऐसे घातक हथियारों का जाल बिछाया है, जिसने अमेरिका को सकते में डाल दिया है। चीनी सैन्य रणनीति का प्राथमिक उद्देश्य दुश्मन के उपग्रहों को निष्प्रभावी करना है। इस दिशा में चीन के पास शक्तिशाली ग्राउंड-आधारित लेजर हथियार मौजूद हैं, जो पृथ्वी की निचली कक्षा में चक्कर लगा रहे अमेरिकी सैटेलाइट्स के सेंसर्स को पलभर में हमेशा के लिए अंधा कर सकते हैं। इसके अलावा, चीन ने ऐसे अंतरिक्ष यान विकसित किए हैं जिनमें एडवांस रोबोटिक हाथ लगे हुए हैं। उदाहरण के तौर पर Shijian-17 जैसे उपग्रह किसी भी अन्य देश के सैटेलाइट को अपने नियंत्रण में लेकर उसे कक्षा से बाहर फेंकने या उसे नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। पेंटागन इन उपकरणों को सीधे तौर पर आक्रामक अंतरिक्ष हथियार मानता है।

रूसी किलर सैटेलाइट्स की सक्रियता

रूस ने अंतरिक्ष में अमेरिका को टक्कर देने के लिए किलर सैटेलाइट्स की एक पूरी फौज तैयार कर ली है, जो अमेरिकी जासूसी और सुरक्षा उपग्रहों पर लगातार नजर बनाए हुए है। साल 2019 से ही रूस अपने कॉसमॉस सीरीज के सैटेलाइट्स को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा उपग्रहों के बेहद करीब तैनात कर रहा है। कॉसमॉस 2543 ने तो अमेरिकी सैटेलाइट का पीछा करते हुए एक प्रोजेक्टाइल भी दागा था, जिसे अमेरिका ने एक सीधा एंटी-सैटेलाइट टेस्ट माना था। इसके बाद कॉसमॉस 2558 और 2576 को भी तैनात किया गया। साल 2025 तक कॉसमॉस 2588 तो अमेरिकी सरकारी सैटेलाइट के महज 93 किलोमीटर के दायरे तक पहुंच गया था। रूस एक ऐसे बुरेवोस्तनिक हथियार पर भी काम कर रहा है जिसे मॉडिफाइड MiG-31 लड़ाकू विमान से लॉन्च किया जा सकेगा, जो बिना किसी पूर्व चेतावनी के लो-ऑर्बिट सैटेलाइट्स को मलबे में तब्दील कर सकता है।

अंतरिक्ष में परमाणु धमाका: एक महाविनाशकारी योजना

इन तमाम खतरों के बीच रूस का सबसे डरावना कदम अंतरिक्ष में परमाणु हथियार ले जाने वाले सैटेलाइट्स का निर्माण है। यदि रूस इस योजना को क्रियान्वित करता है, तो यह 1967 की आउटर स्पेस ट्रीटी का सीधा उल्लंघन होगा। पेंटागन की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि अंतरिक्ष में एक भी परमाणु विस्फोट हुआ, तो लो-ऑर्बिट में मौजूद 15,000 से अधिक सरकारी और कमर्शियल सैटेलाइट्स चंद सेकंड में नष्ट हो जाएंगे। इस धमाके के बाद अंतरिक्ष में रेडियोधर्मी रेडिएशन की ऐसी बेल्ट बन जाएगी, जो वर्षों तक बनी रहेगी और उस मार्ग से गुजरने वाले किसी भी उपग्रह को गलाकर राख कर देगी।

क्या ऑपरेशन एपिक फ्यूरी पहले ही शुरू हो चुका है?

यह केवल भविष्य की कोई काल्पनिक आशंका नहीं है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिक्ष क्षमताओं को लेकर संघर्ष देखा गया था। जून महीने में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास देखी गई भारी जीपीएस जैमिंग ने अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मर्चेंट जहाजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इस घटना ने यह सिद्ध कर दिया है कि आधुनिक युद्ध में साइबर और स्पेस जैमिंग हथियार सबसे पहले इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

वॉशिंगटन की बेचैनी

रूस और चीन के इन कदमों ने अमेरिकी सैन्य अधिकारियों और खुफिया तंत्र में हड़कंप मचा दिया है। फरवरी 2024 में अमेरिकी कांग्रेस में इस राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे पर काफी हंगामा हुआ था। अमेरिकी स्पेस कमांड के प्रमुख जनरल स्टीफन व्हिटिंग जैसे वरिष्ठ अधिकारी यह स्वीकार कर चुके हैं कि रूस और चीन की आक्रामक अंतरिक्ष गतिविधियां अमेरिका की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई हैं। वाशिंगटन को डर है कि युद्ध की स्थिति में उनकी आंखें यानी सैटेलाइट्स बेकार हो जाएंगे, जिससे अमेरिका आसमान में पूरी तरह अंधा हो जाएगा। अंतरिक्ष में महाशक्तियों के बीच जरा सी भी चूक न केवल अमेरिका, बल्कि पूरी मानव सभ्यता को अंधेरे और स्टोन एज के दौर में वापस धकेलने के लिए पर्याप्त है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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