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7 घंटे पहले
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ट्रेड डील की विफलता के पीछे छिपे कारण
अमेरिका और कनाडा के बीच काफी समय से चल रही व्यापारिक बातचीत अचानक से विफल हो गई है। इस समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच काफी उम्मीदें थीं, लेकिन अंतिम समय में बात बिगड़ गई। समझौते की मेज पर अमेरिका ने स्टील, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल सेक्टर में भारी टैरिफ कटौती का बड़ा प्रस्ताव रखा था। इसके साथ ही लकड़ी पर लगे सीमा शुल्क को पूरी तरह समाप्त करने का भी आश्वासन दिया गया था। हालांकि, कनाडा का मानना है कि यह समझौता उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा और इसमें मिलने वाली रियायतें काफी कम थीं।
समझौता टूटने का सफर
पिछले एक हफ्ते से लगातार जारी बैठकों के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधि किसी बड़े समाधान के करीब पहुंचते हुए दिखाई दे रहे थे। स्थिति इतनी अनुकूल थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस बात के संकेत दिए थे कि दोनों देश एक समझौते पर पहुंच चुके हैं और अब केवल कागजी औपचारिकताएं बाकी हैं। पहले इन टैरिफ को लागू करने की तारीख 19 अगस्त तय की गई थी, जिसे ट्रंप ने बढ़ाकर 22 अगस्त कर दिया था। उम्मीद की जा रही थी कि यह तारीख समझौते की गवाह बनेगी, लेकिन अंतिम समय में विवाद बढ़ गया। अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमिसन ग्रीर का कहना है कि यह एक ऐतिहासिक समझौता हो सकता था, जिससे कनाडा को अन्य देशों की तुलना में काफी बेहतर व्यापारिक लाभ मिलता। फिर भी शुक्रवार देर रात तक हुई बातचीत बेनतीजा रही।
स्टील और एल्युमीनियम पर अमेरिका का ऑफर
समझौते के दौरान अमेरिका ने अपनी ओर से कई प्रस्ताव रखे थे। स्टील के मामले में अमेरिका ने 50 प्रतिशत के टैरिफ को घटाकर 25 प्रतिशत करने की पेशकश की थी। हालांकि, इसके साथ टैरिफ-रेट कोटा की शर्त जोड़ी गई थी, जिसका मतलब था कि कम टैरिफ का लाभ केवल एक सीमित मात्रा में आने वाले स्टील को ही मिलता। एल्युमीनियम के लिए भी अमेरिका 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत टैरिफ करने पर सहमत था, जिस पर कोई कोटा नहीं रखा गया था। साथ ही, गोल्फ क्लब और बीयर के कैन जैसे स्टील और एल्युमीनियम से बने उत्पादों पर 10 से 25 प्रतिशत तक की राहत देने की बात कही गई थी।
कारों और अन्य उत्पादों पर रियायत
ऑटोमोबाइल सेक्टर कनाडा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कनाडा से अमेरिका जाने वाली कारों पर फिलहाल 25 प्रतिशत का शुल्क लगता है। अमेरिकी प्रस्ताव के तहत अगर कार में एक निश्चित मात्रा में अमेरिकी कलपुर्जों का इस्तेमाल किया जाता, तो यह टैरिफ घटकर करीब 7 प्रतिशत तक आ सकता था। इसके अतिरिक्त, कनाडा की सॉफ्टवुड लंबर यानी लकड़ी पर पिछले वर्ष लगाए गए 10 प्रतिशत टैरिफ को पूरी तरह हटाने का प्रस्ताव था। साथ ही, डेयरी उत्पादों, वाइन और हॉकी स्टिक पर लगाए गए नए 50 प्रतिशत टैरिफ को वापस लेने का आश्वासन भी दिया गया था।
मार्क कार्नी ने क्यों नकारा प्रस्ताव
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इन प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका स्पष्ट कहना था कि यह एक खराब डील है। कनाडा अमेरिका की कुछ शर्तों को मानने के लिए तैयार था, जिसमें अपने जवाबी टैरिफ हटाना और प्रांतों में अमेरिकी शराब की बिक्री दोबारा शुरू करना शामिल था। विवाद का मुख्य बिंदु भारी ट्रक, विशेषकर पिकअप और सेमी-ट्रक बने। कनाडा इन पर अधिक राहत चाहता था। इसके अलावा, कारों में दोनों देशों के सामान के इस्तेमाल पर अतिरिक्त छूट की मांग कनाडा की तरफ से की गई थी, जिस पर सहमति नहीं बन सकी।
सांस्कृतिक और रणनीतिक विवाद
बातचीत का दायरा केवल टैरिफ तक सीमित नहीं रहा। मार्क कार्नी के अनुसार, अमेरिका ने कनाडा की संस्कृति और फ्रेंच भाषा के संरक्षण से जुड़े मामलों में भी रियायतें मांगीं, जो कनाडा के लिए असहज थीं। इसके अलावा, अमेरिका चाहता था कि कनाडा अन्य गैर-अमेरिकी देशों से आने वाले सामानों पर भी टैरिफ कम करे, जबकि कनाडा को इसके बदले कोई स्पष्ट आर्थिक लाभ नजर नहीं आ रहा था। कार्नी ने कड़े शब्दों में कहा कि अमेरिका ने बहुत अधिक मांगा और बदले में बहुत कम देने का प्रयास किया। दूसरी ओर, जैमिसन ग्रीर ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा कि अमेरिकी प्रस्ताव कनाडा की बाजार पहुंच को और अधिक मजबूत बनाने वाला था।
भविष्य पर अनिश्चितता के बादल
इस बातचीत के विफल होने से अमेरिका और कनाडा के व्यापारिक संबंधों पर गहरा असर पड़ सकता है। दोनों देश एक-दूसरे के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं और इस प्रकार का लंबा गतिरोध दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए चिंता का विषय बन सकता है। फिलहाल, दोनों देशों के बीच व्यापारिक भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
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