नासा का नया स्पेस टेलिस्कोप ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों को करेगा उजागर, अंतरिक्ष में भेजी गई 'नई आंख' विश्व 2 घंटे पहले 6
नासा ने नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलिस्कोप को अंतरिक्ष में लॉन्च कर दिया है, जो डार्क मैटर और डार्क एनर्जी के रहस्यों को सुलझाने के साथ ही ब्रह्मांड का सबसे बड़ा 3D मैप तैयार करेगा।

अंतरिक्ष की गहराइयों में नासा का नया मिशन

ब्रह्मांड के अनंत रहस्यों को समझने की दिशा में नासा ने एक और बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने अपनी सबसे अत्याधुनिक अंतरिक्ष वेधशाला, नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलिस्कोप, को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेज दिया है। रविवार को फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के शक्तिशाली फाल्कन हेवी रॉकेट की मदद से इसे कक्षा में स्थापित करने के लिए रवाना किया गया। करीब 4.3 अरब डॉलर की लागत से तैयार यह टेलिस्कोप अब पृथ्वी से 16 लाख किलोमीटर दूर लैग्रेंज प्वाइंट-2 यानी एल2 की अपनी मंजिल की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

मिशन का मुख्य उद्देश्य और तकनीक

यह वेधशाला आकार में किसी बस के बराबर है और इसका मुख्य काम ब्रह्मांड की ऐसी विशाल तस्वीरों को कैप्चर करना है, जो अब तक के किसी भी टेलिस्कोप के लिए एक बड़ी चुनौती रही हैं। एल2 वही जगह है जहां जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप पहले से ही ब्रह्मांड की गहराइयों को टटोल रहा है। हालांकि, रोमन टेलिस्कोप की कार्यप्रणाली वेब से काफी भिन्न है। यह ब्रह्मांड का बहुत बड़ा सर्वे करने और उसके व्यापक परिदृश्य को सामने लाने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे अपने गंतव्य तक पहुँचने में तीन महीने से अधिक का समय लगेगा, जिसके बाद इसका असली वैज्ञानिक कार्य शुरू होगा।

ब्रह्मांड का सबसे व्यापक 3D नक्शा

रोमन टेलिस्कोप का सबसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य ब्रह्मांड का एक विशाल और विस्तृत 3D नक्शा बनाना है। नासा के वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि अपने पहले एक साल के मुख्य सर्वे के दौरान, यह टेलिस्कोप दो अरब से अधिक आकाशगंगाओं का विस्तृत अध्ययन करेगा। इस डेटा के जरिए वैज्ञानिक यह समझ पाएंगे कि आकाशगंगाओं का निर्माण कैसे हुआ और ब्रह्मांड के विस्तार की दर समय के साथ क्यों बढ़ती जा रही है।

डार्क मैटर और डार्क एनर्जी की गुत्थी

वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ा सवाल डार्क मैटर और डार्क एनर्जी का है। अनुमानों के अनुसार, ब्रह्मांड का केवल 5 प्रतिशत हिस्सा ही सामान्य पदार्थों जैसे कि तारे, ग्रह और गैस से बना है। शेष 27 प्रतिशत डार्क मैटर है और करीब 68 प्रतिशत डार्क एनर्जी है। चूँकि डार्क मैटर को सीधे देखना संभव नहीं है, रोमन टेलिस्कोप इसके गुरुत्वाकर्षण प्रभावों का विश्लेषण करके यह पता लगाएगा कि इसने ब्रह्मांड की संरचना को किस तरह से आकार दिया है। वहीं, डार्क एनर्जी के संदर्भ में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि ब्रह्मांड का फैलाव क्यों तेज हो रहा है।

हबल से 100 गुना अधिक देखने की क्षमता

रोमन की सबसे बड़ी खासियत उसका फील्ड ऑफ व्यू है। यह हबल स्पेस टेलिस्कोप की तुलना में 100 गुना बड़े क्षेत्र को एक साथ देख सकता है। एक सरल उदाहरण के तौर पर देखें तो जिस काम को पूरा करने में हबल को लगभग 100 साल लग सकते हैं, रोमन उसी काम को महज एक महीने के भीतर पूरा करने में सक्षम है। यदि हबल और जेम्स वेब ने ब्रह्मांड को एक छेद से झांककर देखा है, तो रोमन का काम मानो पूरे दरवाजे को खोल देना है।

नए ग्रहों की तलाश और कोरोनाग्राफ की भूमिका

यह टेलिस्कोप सिर्फ आकाशगंगाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सौर मंडल से बाहर स्थित हजारों बाह्यग्रहों की भी खोज करेगा। इसमें एक विशेष उपकरण 'कोरोनाग्राफ' लगाया गया है, जो किसी चमकीले तारे की रोशनी को रोककर उसके आसपास मौजूद धुंधले ग्रहों की स्पष्ट तस्वीर लेने में मदद करेगा। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में आसानी होगी कि हमारे सौर मंडल जैसी प्रणालियां पूरे ब्रह्मांड में कितनी आम हैं।

मिशन की अवधि और भविष्य की संभावनाएं

नासा ने अभी के लिए इस मिशन को पांच साल की अवधि के लिए निर्धारित किया है। हालांकि, इसमें इतनी मात्रा में ईंधन मौजूद है कि मिशन को अगले पांच वर्षों तक और बढ़ाया जा सकता है। भविष्य में यदि तकनीक ने इजाजत दी और रोबोटिक टैंकर उपलब्ध हुए, तो अंतरिक्ष में ही इसमें ईंधन भरने की संभावना पर भी काम किया जा सकता है। यह मिशन हबल और जेम्स वेब का प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि उनका पूरक बनकर काम करेगा।

नैंसी ग्रेस रोमन: एक प्रेरणा

इस टेलिस्कोप का नाम नासा की पहली मुख्य खगोलशास्त्री नैंसी ग्रेस रोमन के सम्मान में रखा गया है, जिन्हें अक्सर 'हबल की मां' के रूप में जाना जाता है। 1959 में नासा से जुड़ीं नैंसी ने अंतरिक्ष आधारित वेधशालाओं की नींव रखने में अहम भूमिका निभाई थी। 2018 में 93 वर्ष की आयु में निधन होने तक उन्होंने खगोल विज्ञान में अपना अमूल्य योगदान दिया। इस टेलिस्कोप का 2.4 मीटर का प्राथमिक दर्पण, जो कभी एक जासूसी उपग्रह कार्यक्रम के लिए बनाया गया था, अब ब्रह्मांड के सबसे गहरे रहस्यों को खोजने का काम करेगा।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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