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एक घंटा पहले
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पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण तनातनी के कारण एक बार फिर व्यापक युद्ध छिड़ने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है। इस बिगड़ते क्षेत्रीय हालात को संभालने और सैन्य टकराव पर विराम लगाने के लिए सऊदी अरब, तुर्की तथा पाकिस्तान के शीर्ष अधिकारियों का दल ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचा है। सोमवार को होने जा रही इस अत्यंत गोपनीय बैठक में चारों देशों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, बढ़ते तनाव को घटाने और कूटनीतिक रास्तों की तलाश पर गहन मंथन होना तय माना जा रहा है।
तेहरान की सीक्रेट मीटिंग और प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी
सामने आई जानकारी के मुताबिक, तेहरान की इस बैठक में तीनों देशों के अत्यंत उच्चस्तरीय प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। सऊदी अरब की तरफ से रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान, पाकिस्तान की ओर से थल सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और तुर्की के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कालिन तेहरान की इस वार्ता में शामिल होने पहुंचे हैं। ये प्रतिनिधि ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अधिकारियों के साथ सीधी बातचीत करेंगे।
इस वार्ता में पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति के अलावा सबसे प्रमुख मुद्दा सऊदी अरब पर हो रहे लगातार हमले हैं। दरअसल, यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की तीव्रता काफी बढ़ा दी है। ये हमले सऊदी अरब के उन तेल प्रतिष्ठानों और आर्थिक केंद्रों को निशाना बनाकर किए जा रहे हैं, जिन्हें नुकसान पहुंचने पर सऊदी अर्थव्यवस्था लंबे समय तक संकट में पड़ सकती है। चूंकि हूती विद्रोहियों को ईरान का प्रत्यक्ष समर्थन प्राप्त है, इसलिए माना जा रहा है कि इस संघर्ष को रोकने की सबसे बड़ी कुंजी ईरान के पास ही है। इसके अतिरिक्त, 3 नवंबर को अमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनाव भी इस संपूर्ण घटनाक्रम का एक अहम पहलू बने हुए हैं।
मक्का पैक्ट के तहत पहली साझा कूटनीतिक पहल
पश्चिम एशिया के इस नए घटनाक्रम को इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अगस्त में अस्तित्व में आए मक्का पैक्ट के तीनों सदस्य देश पहली बार सामूहिक रूप से ईरान के साथ इतने उच्च स्तर पर बातचीत की मेज पर बैठे हैं।
मक्का पैक्ट के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
- साझा सुरक्षा की गारंटी: अगस्त में हुए इस ऐतिहासिक रक्षा समझौते के प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी भी एक सदस्य देश पर कोई सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
- आपातकालीन बैठक: सऊदी अरब पर बढ़ते मिसाइल हमलों के बाद इसी महीने मक्का पैक्ट के सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों की रियाद में एक आपातकालीन बैठक हुई थी।
- सैन्य बलों की तैनाती: रियाद की बैठक में सऊदी अरब की सुरक्षा मजबूत करने के लिए सैन्य बलों और रणनीतिक क्षमताओं की त्वरित तैनाती सुनिश्चित करने पर सहमति बनी थी।
- संसदीय मंजूरी की प्रक्रिया: हालांकि यह रक्षा समझौता पूरी तरह से लागू होने की प्रक्रिया में है। पाकिस्तान ने पिछले सप्ताह ही इसे अपनी मंजूरी दे दी थी, जबकि तुर्की की संसद में अभी इसे पारित किया जाना बाकी है।
सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के लगातार हो रहे हमले इस वक्त मक्का पैक्ट की साझा सुरक्षा प्रतिबद्धताओं की सबसे बड़ी परीक्षा ले रहे हैं।
पाकिस्तान की मध्यस्थता और शांति समझौते के प्रयास
ईरानी सूत्रों के अनुसार, तेहरान में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक की पहल मुख्य रूप से पाकिस्तान की ओर से की गई थी। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने पिछले सप्ताह तेहरान का दौरा किया था। अपनी उस यात्रा के दौरान उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान तथा ईरान के अन्य शीर्ष सैन्य व राजनीतिक नेतृत्व से मुलाकात की थी।
हालांकि, ईरानी मीडिया की रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि उस दौरान ईरानी नेतृत्व ने आसिम मुनीर के सामने यह स्पष्ट कर दिया था कि जब तक तेहरान की प्रमुख मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक वे अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की सीधी या अप्रत्यक्ष बातचीत के लिए तैयार नहीं होंगे। इससे पहले भी जून के महीने में पाकिस्तान और कतर की संयुक्त मध्यस्थता के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम शांति समझौता कराया गया था। लेकिन वह समझौता कुछ ही हफ्तों तक टिक सका और दोनों देशों के बीच फिर से सैन्य टकराव शुरू हो गया।
मौजूदा समय में कतर के मध्यस्थ भी तनाव कम करने की दिशा में लगातार सक्रिय हैं। कतर के प्रतिनिधियों ने रविवार को भी तेहरान में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात कर कूटनीतिक समाधान पर चर्चा की थी।
हूती हमलों का संकट और अमेरिकी रुख
क्षेत्रीय तनातनी के बीच यमन के हूती विद्रोहियों के हमले सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं। रविवार को सऊदी अरब ने दावा किया कि उसने अपनी ओर आ रहे कई ड्रोन और मिसाइल हमलों को सफलतापूर्वक हवा में ही नाकाम कर दिया। हूती विद्रोहियों की ओर से किए जा रहे ये हमले असल में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों की प्रतिक्रिया के तौर पर देखे जा रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
सऊदी अरब के सार्वजनिक कूटनीति मामलों के उपमंत्री रायद क्रीमली ने इस बाबत कहा कि तेहरान की यह यात्रा मौजूदा तनाव को कम करने, कूटनीतिक समाधान की राह तलाशने और कतर तथा पाकिस्तान द्वारा चलाई जा रही मध्यस्थता की कोशिशों को समर्थन देने का ही एक हिस्सा है।
ट्रंप की चेतावनी और खाड़ी में इंटरनेट केबल्स का खतरा
दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग और सैन्य धमकियां लगातार तीखी होती जा रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को बयान दिया था कि अमेरिका आवश्यकता पड़ने पर ईरान के खिलाफ एक और बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर सकता है। अमेरिकी राजनीति के जानकार मानते हैं कि 3 नवंबर के मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप ईरान के खिलाफ कड़ा रुख दिखाकर अपनी मजबूत स्थिति प्रदर्शित करना चाहते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप की इस चेतावनी पर ईरानी नेतृत्व ने भी कड़ा एतराज जताया है और चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने दोबारा कोई सैन्य कार्रवाई करने की कोशिश की, तो ईरान का जवाब पहले से कहीं अधिक आक्रामक और भयावह होगा। ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने तो यहां तक धमकी दी है कि यदि नया हमला होता है, तो वे खाड़ी क्षेत्र में समुद्र के नीचे बिछी प्रमुख इंटरनेट केबल्स को काट देंगे, जिससे पूरे दुनिया में बड़ा संचार संकट खड़ा हो सकता है।
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