होर्मुज जलडमरूमध्य ने बढ़ाई डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें, ईरान से डील के लिए बड़ी शर्त छोड़ने को तैयार
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2 घंटे पहले
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तनाव कम करने की कोशिश में डोनाल्ड ट्रंप
ईरान के साथ लंबे समय से चल रहे गतिरोध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब इस स्थिति से बाहर निकलने का रास्ता खोज रहे हैं। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए वे अमेरिकी जनता के सामने यह संदेश ले जाना चाहते हैं कि अमेरिका इस संघर्ष में विजयी हुआ है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन अब एक नई रणनीति पर विचार कर रहा है, जिसमें किसी भी नए न्यूक्लियर समझौते पर हस्ताक्षर किए बिना ही ईरान के साथ बातचीत को समाप्त किया जा सकता है। यह कदम तब उठाया जा रहा है जब अमेरिका में मिडटर्म चुनाव में अब तीन महीने से भी कम का समय बचा है।
चुनाव और बढ़ती महंगाई का दबाव
ट्रंप के लिए घरेलू मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। एक तरफ चुनाव की तारीखें करीब आ रही हैं, तो दूसरी तरफ युद्ध के कारण अमेरिका में ईंधन और पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं। जनता का आक्रोश और आर्थिक दबाव राष्ट्रपति प्रशासन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इसी बीच शुक्रवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक लेख साझा किया, जिसका शीर्षक था डोनाल्ड ट्रंप ईरान वॉर जीत गए हैं। इस संकेत से यह स्पष्ट होता है कि वे किसी ठोस न्यूक्लियर डील के अभाव में भी इस पूरे घटनाक्रम को अपनी एक बड़ी कूटनीतिक जीत की तरह जनता के बीच पेश करना चाहते हैं।
ईरान की कड़ी शर्तें और होर्मुज का मुद्दा
ईरान ने भी अपनी ओर से रुख सख्त कर लिया है। शनिवार को ईरान ने अमेरिका के सामने कई कठिन मांगें रखी हैं, जिन्होंने ट्रंप के लिए स्थिति को और जटिल बना दिया है। ईरान का स्पष्ट कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया के लिए पूरी तरह खोलने से पहले अमेरिका को उसे अरबों डॉलर का भुगतान करना होगा। इसके अलावा, ईरान ने क्षेत्र से सभी अमेरिकी सैनिकों को हटाने और नौसैनिक नाकाबंदी को तुरंत प्रभाव से समाप्त करने की शर्त रखी है। गौरतलब है कि होर्मुज दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, और यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ना तय है।
ईरान की सैन्य रणनीति और वैश्विक चिंता
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान द्वारा लगातार किए जा रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों ने होर्मुज के रास्ते होने वाले जहाजों की आवाजाही को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस अनिश्चितता ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को लेकर हड़कंप मचा दिया है। अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का मानना है कि ईरान इस संघर्ष को जल्दी खत्म करने के मूड में नहीं है, बल्कि वह इसे एक लंबे और थका देने वाले युद्ध में बदलने की तैयारी कर रहा है। इसी सप्ताह ट्रंप ने एक बड़े सैन्य हमले के संकेत दिए थे, लेकिन उनके सहयोगी देशों ने उन्हें किसी भी तरह के बड़े कदम उठाने से परहेज करने की सलाह दी थी।
जेडी वेंस का रुख और भविष्य की रणनीति
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने मौजूदा स्थिति पर सफाई देते हुए कहा कि अमेरिका अभी ईरान के साथ संघर्ष के बीच में खड़ा है। उनका कहना है कि वाशिंगटन ईरान पर लगातार दबाव बनाए रखना चाहता है ताकि भविष्य में दोनों देशों के संबंधों में एक स्थायी बदलाव आ सके। हालांकि, हकीकत यह है कि ट्रंप एक तरफ युद्ध से बाहर निकलने का सम्मानजनक रास्ता तलाश रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान द्वारा रखी गई शर्तें इतनी कठोर हैं कि उन्हें स्वीकार करना या पूरी तरह नजरअंदाज करना अमेरिका के लिए बेहद मुश्किल हो रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ट्रंप वास्तव में अपनी सबसे बड़ी मांगों को दरकिनार कर ईरान से डील के लिए तैयार होते हैं या फिर कोई नया रुख अपनाते हैं।
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