डोनाल्ड ट्रंप का अजीब दावा: भारत के टैरिफ आंकड़ों को बताया बकवास, सरकारी रिपोर्ट देख भड़के विश्व एक महीने पहले 70
एक नई किताब में खुलासा हुआ है कि डोनाल्ड ट्रंप भारत द्वारा अमेरिकी सामानों पर लिए जाने वाले टैरिफ के सरकारी आंकड़ों को मानने को तैयार नहीं थे। अपने ही मंत्री द्वारा पेश किए गए आधिकारिक रिकॉर्ड को उन्होंने बकवास करार दिया था।

ट्रंप और भारतीय टैरिफ का विवाद

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकारों की किताब रेजीम चेंज में दावा किया गया है कि ट्रंप का मानना था कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर 175 परसेंट तक टैक्स वसूलता है। जब उनके वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने उन्हें आधिकारिक सरकारी आंकड़े दिखाने की कोशिश की, तो ट्रंप ने अपना आपा खो दिया। किताब के अनुसार, ट्रंप ने सरकारी फाइलों को पूरी तरह से बकवास बताते हुए अपशब्दों का प्रयोग किया और आंकड़ों को झूठा करार दे दिया।

आधिकारिक रिकॉर्ड बनाम ट्रंप का दावा

किताब में बताया गया है कि हॉवर्ड लुटनिक ने जब यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव के आधिकारिक आंकड़े पेश किए, तो ट्रंप ने उन्हें मानने से साफ इनकार कर दिया। ट्रंप को पूरा यकीन था कि सरकारी रिकॉर्ड वास्तविकता से बहुत दूर हैं। हालांकि, व्हाइट हाउस की आधिकारिक फैक्ट शीट के मुताबिक स्थिति अलग है:

  • कृषि उत्पादों पर भारत औसतन 37 परसेंट का टैरिफ लगाता है।
  • कुछ विशिष्ट वाहनों और ऑटो पार्ट्स पर यह टैक्स 100 परसेंट से अधिक है, लेकिन यह ट्रंप के 175 परसेंट वाले दावे से काफी कम है।

व्यापारिक तनाव और रूसी तेल का मुद्दा

ट्रंप और भारत के बीच व्यापारिक कड़वाहट उस समय और बढ़ गई थी जब अगस्त 2025 में उन्होंने भारत पर रूसी तेल खरीदने का आरोप लगाया था। ट्रंप का दावा था कि भारत इसके जरिए यूक्रेन युद्ध में पुतिन की मदद कर रहा है। इसके बाद अमेरिका ने भारत पर 25 परसेंट का अतिरिक्त टैक्स लगा दिया था, जिससे कुल टैरिफ बोझ बढ़कर 50 परसेंट तक पहुंच गया था। इसके साथ ही, ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध को रोकने का विवादास्पद दावा भी किया था, जिसे नई दिल्ली ने आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया था।

व्यापार समझौते से राहत की उम्मीद

तमाम गतिरोधों के बीच, फरवरी 2026 में दोनों देशों के बीच एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क पर सहमति बनी है। इस समझौते का उद्देश्य व्यापारिक बाधाओं को कम करना है। नई ट्रेड डील के पूरी तरह से लागू होने पर अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ को घटाकर मात्र 18 परसेंट कर दिया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी और दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव समाप्त होगा।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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