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2 घंटे पहले
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान
दुनिया भर में आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर एक लंबी बहस छिड़ी हुई है। एक तरफ जहां तमाम विशेषज्ञ और वैज्ञानिक इसे भविष्य में मानव सभ्यता के लिए एक बड़ा खतरा मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन दावों को पूरी तरह बेबुनियाद और एक छलावा करार दिया है। ट्रंप का मानना है कि AI के जरिए इंसानियत के खात्मे की बात करना महज लोगों के बीच डर पैदा करने की एक साजिश है।
डर के माहौल को किया खारिज
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि एआई के भविष्य में दुनिया पर नियंत्रण करने जैसी बातें केवल डराने के लिए कही जा रही हैं। उन्होंने इन आशंकाओं की तुलना अपने खिलाफ चले महाभियोग के विवादों और रूस तथा यूक्रेन से जुड़े मामलों से करते हुए उन्हें राजनीतिक षड्यंत्र जैसा बताया। ट्रंप का साफ कहना है कि एआई पर किसी भी तरह के कड़े सरकारी नियम थोपने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह तकनीक विकास के नए रास्ते खोलने वाली है।
विकास का नया इंजन
ट्रंप के दृष्टिकोण से AI और डेटा सेंटर आने वाले समय में अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सक्षम हैं। उन्होंने तो यहां तक दावा किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इतिहास का सबसे प्रभावशाली आर्थिक विकास इंजन साबित हो सकता है। उनके अनुसार, इसका आर्थिक प्रभाव तेल, सोना, हीरा और यहां तक कि इंटरनेट के प्रभाव से भी कहीं अधिक बड़ा हो सकता है।
चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा
राष्ट्रपति ट्रंप की प्राथमिकताओं में अमेरिका का एआई के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व करना शामिल है। वह किसी भी सूरत में चीन के साथ चल रही तकनीकी रेस में अमेरिका को पिछड़ते हुए नहीं देखना चाहते। इसी वजह से वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर अत्यधिक नियंत्रण लगाने या कड़े सुरक्षा नियमों की मांगों को अमेरिकी प्रगति की राह में बाधा मान रहे हैं। उनका मानना है कि अधिक नियम बनाने से अमेरिका की रफ्तार धीमी हो जाएगी।
गूगल के फिनलैंड निवेश पर नाराजगी
इस पूरे मामले के बीच ट्रंप ने गूगल द्वारा फिनलैंड में किए जाने वाले भारी निवेश पर भी अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। गौरतलब है कि गूगल ने फिनलैंड में डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए कम से कम 15 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई है। ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका में परमिट और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं इतनी जटिल और कठिन हैं कि कंपनियां अपने संसाधनों को बाहर के देशों में लगाने पर मजबूर हो रही हैं। उन्होंने गूगल को अपनी निवेश रणनीति पर फिर से विचार करने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों की चिंताएं और ट्रंप का रुख
हालांकि डोनाल्ड ट्रंप का नजरिया इस मामले में एकदम अलग है, लेकिन कई दिग्गज टेक विशेषज्ञों ने एआई के अनियंत्रित विकास को लेकर सावधान रहने की सलाह दी है। इन विशेषज्ञों का तर्क है कि बहुत अधिक शक्तिशाली एआई सिस्टम भविष्य में सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर सकते हैं। उनकी चिंताओं में शामिल हैं:
- संभावित खतरनाक जैविक हथियारों का निर्माण
- परमाणु सुरक्षा प्रणालियों से जुड़े बड़े जोखिम
- एआई सिस्टम का अनियंत्रित होना
इन विशेषज्ञों ने मांग की है कि एआई के विकास की रफ्तार पर लगाम लगाई जानी चाहिए। बावजूद इसके ट्रंप इन चेतावनियों को गंभीरता से लेने के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं। उनके लिए एआई केवल एक सॉफ्टवेयर या तकनीक नहीं है, बल्कि यह भविष्य की ऐसी रणनीतिक ताकत है जो अमेरिकी सत्ता और अर्थव्यवस्था को पूरी दुनिया में सबसे मजबूत आधार प्रदान कर सकती है।
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