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4 घंटे पहले
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अमेरिकी नीति में विरोधाभास
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक उलझन में फंसते नजर आ रहे हैं। एक तरफ उनका प्रशासन रूस से तेल खरीदने वाले देशों, जिनमें भारत और चीन जैसे बड़े नाम शामिल हैं, पर 100% तक टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है, तो दूसरी तरफ वे रूस के सबसे करीबी सहयोगियों में गिने जाने वाले बेलारूस के साथ पोटाश की एक बड़ी डील करना चाहते हैं। यह विरोधाभास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी विदेश नीति की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ट्रंप का मानना है कि बेलारूस से पोटाश मंगवाने से अमेरिकी किसानों को फायदा होगा, क्योंकि यह कनाडा से आने वाले पोटाश की तुलना में काफी सस्ता पड़ेगा।
पोटाश डील की पृष्ठभूमि
पोटाश खाद के उत्पादन के लिए एक अनिवार्य कच्चा माल है। वर्तमान में अमेरिका अपनी पोटाश की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसमें 79% हिस्सेदारी अकेले कनाडा की है। ट्रंप ने तर्क दिया है कि बेलारूस से आयात बढ़ाने से न केवल लागत कम होगी, बल्कि बाजार में एक विकल्प भी तैयार होगा। हालांकि, यह निर्णय तब लिया गया है जब अमेरिका ने रूस के साथ आर्थिक संबंध रखने वाले अन्य देशों को कड़े दंड और व्यापारिक प्रतिबंधों की चेतावनी दे रखी है। ट्रंप प्रशासन का यह दोहरा रवैया अब विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
दोहरे मानदंडों के आरोप
अमेरिकी विदेश नीति के जानकार और पूर्व अधिकारी इवान ए. फाइगेनबॉम ने इस मामले में कड़ी टिप्पणी की है। उनका कहना है कि यदि अमेरिका उन देशों को दंडित करने की बात करता है जो रूस के साथ व्यापारिक रिश्ते बनाए हुए हैं, तो फिर बेलारूस के साथ सौदेबाजी को किस दृष्टिकोण से देखा जाए। फाइगेनबॉम के अनुसार, इस तरह की नीतियां अमेरिका को एक निष्पक्ष व्यापारिक साझेदार के बजाय दोहरे मानदंडों का पालन करने वाली शक्ति के रूप में पेश करती हैं। यह स्थिति भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि हाल ही में ट्रंप ने एक कानून पर हस्ताक्षर किए हैं जो रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी शुल्क लगाने का अधिकार देता है। हालांकि यह कानून स्वतः भारत पर 100% टैरिफ नहीं लगाता, लेकिन यह वैश्विक व्यापारिक संबंधों में अस्थिरता की स्थिति पैदा कर सकता है।
लुकाशेंको ने लगाई उम्मीदों पर लगाम
ट्रंप द्वारा की जा रही डील की घोषणा के बाद बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। लुकाशेंको ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके देश के पास अमेरिका को भेजने के लिए पोटाश की कोई अतिरिक्त मात्रा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि बेलारूस का मौजूदा उत्पादन पहले से ही अन्य अनुबंधित ग्राहकों के लिए तय है। इस प्रकार, जहां ट्रंप डील को लेकर उत्साहित हैं, वहीं लुकाशेंको ने वस्तुतः इसे खारिज कर दिया है। यह स्थिति ट्रंप की रणनीतिक योजना को एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
परिवहन और आर्थिक व्यवहार्यता पर सवाल
डील की व्यावहारिक कठिनाइयों पर भी सवाल उठ रहे हैं। बेलारूस एक भू-आबद्ध देश है, यानी चारों तरफ जमीन से घिरा होने के कारण वहां से पोटाश को अमेरिका तक पहुंचाना एक अत्यंत जटिल और महंगी प्रक्रिया होगी। कनाडा के सस्केचेवान प्रांत के मुख्यमंत्री स्कॉट मो ने भी इस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका तर्क है कि यदि बेलारूस का पोटाश रूस के रास्ते होते हुए अमेरिका पहुंचेगा, तो वह कनाडाई उत्पाद से सस्ता कैसे हो सकता है? यह परिवहन लागत और लॉजिस्टिक की दृष्टि से भी घाटे का सौदा प्रतीत होता है।
पुतिन का प्रभाव और भविष्य की चुनौतियां
यह जगजाहिर है कि बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के अत्यंत विश्वासपात्र हैं। यूक्रेन युद्ध के दौरान भी बेलारूस ने मॉस्को को हर संभव समर्थन दिया है, जिसके परिणामस्वरूप बेलारूस पर कई पश्चिमी प्रतिबंध लगे हुए हैं। हालांकि, हाल के महीनों में ट्रंप प्रशासन ने लुकाशेंको सरकार के साथ संबंधों को सुधारने का प्रयास किया है। अमेरिकी दूत जॉन कोएल की मध्यस्थता के बाद बेलारूस द्वारा कुछ राजनीतिक कैदियों को रिहा करने और बदले में अमेरिका द्वारा कुछ प्रतिबंधों में ढील देने की खबरें भी आई थीं। इन सबके बावजूद, पोटाश डील के मामले में लुकाशेंको का रुख यह बताता है कि रूस के साथ उनकी रणनीतिक साझेदारी अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौतों पर भारी पड़ रही है।
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